लखनऊ (Thu, 07 May 2026)। उत्तर प्रदेश में कृषि क्षेत्र को नई गति देने की दिशा में बड़ा फैसला लिया गया है। प्रधानमंत्री-राष्ट्रीय कृषि विकास योजना यानी PM-RKVY Scheme UP के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 3379.11 करोड़ रुपये की व्यापक कार्ययोजना को मंजूरी दे दी गई है। यह फैसला मुख्य सचिव एसपी गोयल की अध्यक्षता में आयोजित राज्य स्तरीय स्वीकृति समिति (SLSC) की बैठक में लिया गया।
सरकार की इस कार्ययोजना का केंद्र किसानों की आय बढ़ाना, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना और कृषि को आधुनिक तकनीक से जोड़ना है। बैठक में साफ तौर पर कहा गया कि आने वाले वर्षों में खेती को केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उसे आत्मनिर्भर और टिकाऊ मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा।
मुख्य सचिव एसपी गोयल ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि सभी परियोजनाओं का क्रियान्वयन तय समयसीमा के भीतर और पूरी पारदर्शिता के साथ किया जाए। उन्होंने प्राकृतिक कृषि (Natural Farming), फसल उत्पादकता वृद्धि और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार को प्राथमिकता देने पर विशेष बल दिया।
बैठक में मखाना खेती, मधुमक्खी पालन और आधुनिक कृषि तकनीकों को ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने की जरूरत पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों का मानना है कि पारंपरिक खेती के साथ वैकल्पिक कृषि गतिविधियों को बढ़ावा देने से किसानों की अतिरिक्त आय सुनिश्चित की जा सकती है।
मुख्य सचिव ने गुणवत्तापूर्ण बीज वितरण, समेकित पोषण प्रबंधन और कीट नियंत्रण योजनाओं को मजबूत बनाने के निर्देश दिए। इसके अलावा फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने के लिए फसलोत्तर अवसंरचना (Post-Harvest Infrastructure) के विकास पर भी जोर दिया गया।
बैठक में किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को मजबूत करने और कृषि उद्यमिता को प्रोत्साहन देने पर भी गंभीरता से विचार हुआ। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि ग्रामीण स्तर पर ऐसे मॉडल विकसित किए जाएं, जिनसे छोटे और सीमांत किसानों को बाजार तक बेहतर पहुंच मिल सके।
PM-RKVY Scheme UP के अंतर्गत कई निर्माणपरक परियोजनाओं की समीक्षा भी की गई। मुख्य सचिव ने कृषि कल्याण केंद्रों की स्थापना, PACS गोदाम निर्माण, रेशम उत्पादन से जुड़े चाकी रियरिंग सेंटर और कृषि विश्वविद्यालयों में चल रहे विकास कार्यों को जून 2026 तक पूरा करने के निर्देश दिए। साथ ही इन परियोजनाओं की त्रैमासिक समीक्षा सुनिश्चित करने को कहा गया।
बैठक में यह भी निर्देश दिया गया कि केंद्रांश के रूप में मिलने वाली 1551.62 करोड़ रुपये की राशि भारत सरकार से शत-प्रतिशत जारी कराई जाए, ताकि परियोजनाओं के संचालन में किसी प्रकार की वित्तीय बाधा न आए।
गन्ना विभाग को रेडरॉट (Red Rot) प्रतिरोधी गन्ना प्रजातियों को बढ़ावा देने और धान की पारंपरिक खेती के स्थान पर वैकल्पिक फसलों को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष रणनीति बनाने को कहा गया। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे जल संरक्षण और मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने में मदद मिलेगी।
समिति ने नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल्स, दालों में आत्मनिर्भरता मिशन, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन, कृषि यंत्रीकरण, उद्यान विकास, मखाना विकास, लघु सिंचाई और डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन जैसी कई महत्वपूर्ण योजनाओं के तहत कार्ययोजनाओं को भी मंजूरी दी।
बैठक के दौरान वर्ष 2025-26 में 91 प्रतिशत व्यय प्रगति पर संतोष जताया गया। इस मौके पर कृषि, उद्यान, पशुपालन, मत्स्य, सहकारिता, खाद्य प्रसंस्करण, पंचायती राज और ग्रामीण विकास विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।












