लखनऊ/कानपुर (Thu, 07 May 2026)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को एक कार्यक्रम के दौरान कानपुर की मूक-बधिर बच्ची “खुशी” की ऐसी कहानी सुनाई, जिसने मौजूद लोगों को भावुक कर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिव्यांगजन किसी से कम नहीं होते, उन्हें केवल सही अवसर, संवेदना और समय पर सहयोग की जरूरत होती है।
नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में संबोधन देते हुए सीएम योगी ने बताया कि कुछ महीने पहले कानपुर की एक बच्ची अकेले लखनऊ पहुंच गई थी। वह न सुन सकती थी और न ही बोल सकती थी, लेकिन उसके भीतर अपने भाव व्यक्त करने की अद्भुत क्षमता थी। मुख्यमंत्री के मुताबिक, बच्ची अपने हाथों से बनाया गया उनका एक चित्र लेकर आई थी और विधान भवन के सामने चुपचाप बैठ गई थी।
मुख्यमंत्री ने कहा, “उस बच्ची ने कुछ नहीं कहा, क्योंकि वह बोल नहीं सकती थी। लेकिन उसकी आंखों में एक विश्वास था। उसने अपने हाथ से बनाया चित्र सामने रखा और वहीं बैठी रही। बाद में पता चला कि वह कानपुर से अकेले यहां पहुंची थी।”
CM योगी की पहल से बदली खुशी की जिंदगी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि पुलिसकर्मियों और दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के प्रशिक्षित शिक्षकों ने इशारों की मदद से बच्ची से संवाद किया और उसके परिवार तक जानकारी पहुंचाई। इसके बाद उसे सुरक्षित कानपुर भेजा गया।
जब मुख्यमंत्री को पूरी घटना की जानकारी मिली तो उन्होंने बच्ची को दोबारा बुलाने और उसके इलाज की व्यवस्था कराने के निर्देश दिए। चिकित्सकीय जांच में सामने आया कि खुशी को सुनने के लिए कॉक्लियर इम्प्लांट (Cochlear Implant) सर्जरी की जरूरत है। इस ऑपरेशन पर करीब छह से सात लाख रुपये का खर्च आने वाला था।
सरकार के निर्देश पर समाज कल्याण विभाग, दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग और एक फाउंडेशन के सहयोग से उसके इलाज की पूरी व्यवस्था कराई गई। 26 जनवरी 2026 को खुशी का कॉक्लियर इम्प्लांट ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया गया।
अब खुशी आवाजें सुन पा रही है और उसने धीरे-धीरे बोलना भी शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि ऑपरेशन के बाद जब खुशी उनसे मिली तो उसके मुंह से निकले पहले शब्द थे — “थैंक यू योगी जी।”
“हर दिव्यांग में छिपी होती है प्रतिभा”
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि समाज को दिव्यांगजनों के प्रति नजरिया बदलने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति के साथ उसकी शारीरिक स्थिति के कारण भेदभाव किया जाता है तो यह अन्याय है।
उन्होंने कहा, “हर व्यक्ति में प्रतिभा होती है। जरूरत इस बात की है कि हम उसे पहचानें, अवसर दें और उसके साथ संवेदनशील व्यवहार करें।”
डॉक्टरों के अनुसार खुशी को अभी नियमित स्पीच थैरेपी और अभ्यास की आवश्यकता है। आने वाले कुछ महीनों में उसकी बोलने की क्षमता और बेहतर होगी तथा लगभग एक वर्ष के भीतर वह सामान्य बच्चों की तरह बातचीत कर सकेगी।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि ऑपरेशन के बाद खुशी ने सबसे पहले उस पुलिस इंस्पेक्टर का चित्र बनाकर भेंट किया, जिन्होंने लखनऊ में उसकी मदद की थी। योगी ने कहा कि एक छोटी बच्ची का यह कृतज्ञता भाव समाज के लिए बड़ी सीख है।
खुशी की यह कहानी अब सिर्फ एक बच्ची के इलाज तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह उन हजारों परिवारों के लिए उम्मीद का संदेश बन गई है, जो अपने दिव्यांग बच्चों के बेहतर भविष्य का सपना देखते हैं।












