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यूपी भूसा बैंक अभियान: पशुओं के लिए 26 लाख कुंतल से ज्यादा चारा जमा, CM योगी ने सभी जिलों को दिए सख्त निर्देश

On: May 7, 2026
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पशुओं के लिए 26 लाख कुंतल से ज्यादा चारा जमा, CM योगी ने सभी जिलों को दिए सख्त निर्देश
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लखनऊ (Thu, 07 May 2026)। उत्तर प्रदेश में बढ़ती गर्मी और संभावित सूखे की परिस्थितियों को देखते हुए योगी सरकार ने पशुओं के लिए बड़े स्तर पर “यूपी भूसा बैंक अभियान” तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेशभर के गो आश्रय स्थलों में भूसा संग्रह, पशु आहार और गर्मी से बचाव की व्यवस्थाओं को मिशन मोड में लागू किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य सिर्फ गोवंश संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और डेयरी व्यवस्था को भी मजबूत करना है।

प्रदेश सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, एक वर्ष के लिए कुल 131.40 लाख कुंतल भूसे की आवश्यकता आंकी गई है। इसके मुकाबले 60.99 लाख कुंतल भूसा संग्रह का लक्ष्य तय किया गया था, जिसमें अब तक 26.78 लाख कुंतल भूसा एकत्र किया जा चुका है। यह लक्ष्य का लगभग 43.9 प्रतिशत माना जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि जिन जिलों में प्रगति धीमी है, वहां अभियान को युद्धस्तर पर चलाया जाए।

ललितपुर, देवरिया और गोरखपुर बने भूसा संग्रह अभियान के मॉडल जिले

प्रदेश में भूसा संग्रह की रफ्तार की बात करें तो ललितपुर ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया है। यहां तय लक्ष्य के मुकाबले 102.9 प्रतिशत भूसा संग्रह किया जा चुका है। देवरिया 100.7 प्रतिशत और गोरखपुर 96.1 प्रतिशत के साथ शीर्ष जिलों में शामिल हैं। इसके अलावा मऊ, आगरा, महाराजगंज, सहारनपुर और हरदोई ने भी उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है।

हालांकि कुछ जिले अभी पीछे चल रहे हैं। लखनऊ, कानपुर नगर, संभल और इटावा जैसे जिलों में संग्रह प्रतिशत कम पाया गया है। शासन स्तर से इन जिलों के अधिकारियों को विशेष निर्देश जारी किए गए हैं कि स्थानीय किसानों, स्वयंसेवी संस्थाओं और पंचायत स्तर के नेटवर्क के जरिए भूसा संग्रह को तेजी से बढ़ाया जाए।

ग्रामीण इलाकों में इस अभियान को लेकर किसानों की भागीदारी भी देखने को मिल रही है। कई स्थानों पर किसान स्वेच्छा से भूसा दान कर रहे हैं। प्रशासन का मानना है कि यह सिर्फ सरकारी योजना नहीं बल्कि सामुदायिक सहयोग का अभियान बनता जा रहा है।

दान आधारित भूसा संग्रह में महाराजगंज और जौनपुर सबसे आगे

सरकार ने भूसा संग्रह के लिए खरीद के साथ-साथ दान मॉडल को भी सक्रिय किया है। अब तक 12.19 लाख कुंतल लक्ष्य के मुकाबले 2.65 लाख कुंतल भूसा दान के माध्यम से जुटाया गया है। यह कुल लक्ष्य का करीब 21.8 प्रतिशत है।

दान आधारित संग्रह में महाराजगंज, जौनपुर, गाजियाबाद और रामपुर जैसे जिले आगे हैं। सरकार ने गोसेवकों, सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं और आम नागरिकों से अपील की है कि वे गो आश्रय स्थलों के लिए भूसा उपलब्ध कराने में सहयोग करें।

ग्रामीण क्षेत्रों में यह पहल सामाजिक भागीदारी का उदाहरण भी बन रही है। कई गांवों में किसानों ने सामूहिक रूप से भूसा दान कर स्थानीय गोशालाओं की मदद शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि गर्मियों में चारे की उपलब्धता बनाए रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

गो आश्रय स्थलों में केवल मानक युक्त पशु आहार देने के निर्देश

मुख्यमंत्री ने साफ निर्देश दिए हैं कि गो आश्रय स्थलों में पशुओं को केवल गुणवत्ता युक्त और संतुलित आहार ही उपलब्ध कराया जाए। इसके लिए एफएसएसएआई मानकों और बीआईएस प्रमाणित आईएस 2023 के अनुरूप पशु आहार खरीदने के आदेश जारी किए गए हैं।

सरकार ने पीसीडीएफ द्वारा निर्मित “पराग” पशु आहार को प्राथमिकता देने के निर्देश भी दिए हैं। साथ ही हर पैकेट पर बैच नंबर, निर्माण तिथि और समाप्ति तिथि का स्पष्ट उल्लेख अनिवार्य किया गया है।

प्रदेश सरकार की योजना है कि प्रत्येक गोवंश को प्रतिदिन न्यूनतम 500 ग्राम संतुलित पशु आहार उपलब्ध कराया जाए। पशुपालन विभाग के अधिकारियों को नियमित निरीक्षण और गुणवत्ता जांच के निर्देश दिए गए हैं।

प्रदेशभर में बनाए गए हजारों स्थायी और अस्थायी भूसा बैंक

राज्य सरकार ने भूसा भंडारण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर “भूसा बैंक” स्थापित किए हैं। अब तक प्रदेश में 1905 अस्थायी और 7285 स्थायी भूसा बैंक बनाए जा चुके हैं।

भूसा टेंडर प्रक्रिया में भी तेजी लाई गई है। 14 जिलों में टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि अन्य जनपदों में प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इसके साथ ही साइलेज टेंडर प्रक्रिया को भी तेज किया गया है ताकि बरसात और सूखे के दौरान भी पशुओं के लिए हरा और सूखा चारा उपलब्ध कराया जा सके।

सरकार का फोकस केवल संग्रह तक सीमित नहीं है, बल्कि स्टोरेज और वितरण प्रणाली को भी मजबूत करना है ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत चारा उपलब्ध कराया जा सके।

गर्मी से बचाव के लिए गो आश्रय स्थलों में विशेष इंतजाम

प्रदेश में लगातार बढ़ते तापमान को देखते हुए मुख्यमंत्री ने गो आश्रय स्थलों में पशुओं के लिए गर्मी से बचाव के विशेष इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं। सभी आश्रय स्थलों पर स्वच्छ पेयजल, पर्याप्त छाया, पंखे और कूलर लगाने के आदेश दिए गए हैं।

इसके अलावा स्थानीय किसानों के सहयोग से हरे चारे की आपूर्ति भी सुनिश्चित की जा रही है। सरकार का कहना है कि गो संरक्षण केवल धार्मिक भावनाओं से जुड़ा विषय नहीं, बल्कि कृषि आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था और डेयरी सेक्टर की स्थिरता से भी सीधे जुड़ा हुआ है।

प्रदेश सरकार अब भूसा संग्रह, पशु आहार और गो आश्रय प्रबंधन को दीर्घकालिक रणनीति के रूप में आगे बढ़ा रही है ताकि भविष्य में किसी भी आपात स्थिति में पशुओं को चारे की समस्या का सामना न करना पड़े।

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