लखनऊ (Sat, 09 May 2026)। उत्तर प्रदेश सरकार ने नदियों को प्रदूषणमुक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए साफ संदेश दिया है कि अब बिना शोधित सीवेज का पानी किसी भी हालत में नदियों में नहीं गिरना चाहिए। जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने शनिवार को नमामि गंगे परियोजनाओं की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माणाधीन सीवेज शोधन संयंत्रों (STP) का काम तय समयसीमा में पूरा किया जाए और सभी नालों के पानी को ट्रीटमेंट के बाद ही नदियों में छोड़ा जाए।
जल निगम (ग्रामीण) सभागार में आयोजित बैठक में मंत्री ने साफ कहा कि गंगा और अन्य नदियों को स्वच्छ बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए हर शहर में जरूरत के अनुसार आधुनिक एसटीपी स्थापित किए जाएं और उनकी कार्यप्रणाली लगातार मॉनिटर की जाए।
प्रयागराज से गोरखपुर तक STP नेटवर्क मजबूत करने की तैयारी
बैठक के दौरान स्वतंत्र देव सिंह ने प्रयागराज, वाराणसी, कानपुर, मथुरा और आगरा जैसे बड़े शहरों के साथ-साथ लखनऊ, अयोध्या और गोरखपुर में भी अतिरिक्त सीवेज शोधन संयंत्र लगाने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण सीवेज प्रबंधन की चुनौती भी बढ़ रही है। यदि समय रहते मजबूत व्यवस्था नहीं बनाई गई तो नदियों का प्रदूषण नियंत्रण मुश्किल हो जाएगा।
मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि सिर्फ परियोजनाएं शुरू करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका समय पर पूरा होना और प्रभावी संचालन भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कार्यों में लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए।
छोटी नदियों के पुनरोद्धार पर भी सरकार का फोकस
बैठक में केवल गंगा ही नहीं, बल्कि प्रदेश की छोटी नदियों के पुनर्जीवन को लेकर भी चर्चा हुई। स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि छोटी नदियां ग्रामीण अर्थव्यवस्था और भूजल संतुलन के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। इसलिए इनके पुनरोद्धार के लिए अलग और प्रभावी कार्ययोजना बनाई जाए।
उन्होंने ‘रीयूज ऑफ ट्रीटेड वाटर’ नीति के तेजी से क्रियान्वयन पर भी जोर दिया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर शोधित पानी के पुन: उपयोग को बढ़ावा दिया जाए, ताकि जल संरक्षण को मजबूती मिल सके।
गर्मी में गांवों तक नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश
गर्मी के मौसम को देखते हुए जलशक्ति मंत्री ने जल जीवन मिशन और ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि अधिक से अधिक गांवों में नियमित और सुचारु पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
मंत्री ने निर्देश दिए कि जहां भी पेयजल संकट या तकनीकी समस्याएं सामने आ रही हैं, उनका तत्काल समाधान किया जाए। उन्होंने आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, उन्नाव और बलिया जैसे गुणवत्ता एवं मात्रा प्रभावित जिलों की योजनाओं की भी अलग से समीक्षा की।
15 दिन में पूरे होंगे ट्यूबवेल मरम्मत कार्य
बैठक में यह भी निर्देश दिए गए कि पुराने और नए ट्यूबवेलों, पोस्ट ट्रीटमेंट इकाइयों और अन्य जलापूर्ति प्रणालियों की मरम्मत का कार्य अगले 15 दिनों के भीतर पूरा कराया जाए।
इसके साथ ही आर्सेनिक रिमूवल यूनिट (ARU) और फ्लोराइड रिमूवल यूनिट (FRU) को पूरी तरह सक्रिय रखने के निर्देश भी दिए गए, ताकि प्रभावित इलाकों में लोगों को सुरक्षित पेयजल मिल सके।
भूजल संकट में आई कमी, लेकिन चिंता अभी बाकी
बैठक में भूगर्भ जल विभाग की ओर से बताया गया कि वर्ष 2017 में प्रदेश के 82 विकासखंड अतिदोहित श्रेणी में थे, जबकि 2025 के आकलन में यह संख्या घटकर 44 रह गई है।
हालांकि मंत्री ने कहा कि यह सुधार सकारात्मक संकेत जरूर है, लेकिन अभी और व्यापक प्रयासों की जरूरत है। उन्होंने भूजल संकट से प्रभावित 10 शहरों में जनजागरूकता अभियान और कार्यशालाएं आयोजित करने के निर्देश दिए।
बैठक में अपर मुख्य सचिव नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग अनुराग श्रीवास्तव, उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) के प्रबंध निदेशक डॉ. राजशेखर समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।











