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वीडी सतीशन होंगे केरल के नए मुख्यमंत्री, सोमवार को शपथ ग्रहण; मंत्रिमंडल गठन पर तेज हुई कवायद

On: May 14, 2026
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वीडी सतीशन होंगे केरल के नए मुख्यमंत्री, सोमवार को शपथ ग्रहण
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तिरुवनंतपुरम, 14 मई 2026। केरल की राजनीति में पिछले कई दिनों से जारी सस्पेंस आखिरकार गुरुवार को खत्म हो गया। कांग्रेस नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) ने वरिष्ठ कांग्रेस नेता वीडी सतीशन के नाम पर मुहर लगाते हुए उन्हें राज्य का अगला मुख्यमंत्री घोषित कर दिया। लंबे मंथन, अंदरूनी बैठकों और सहयोगी दलों से सलाह-मशविरा के बाद लिया गया यह फैसला अब सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया को अंतिम चरण में पहुंचा चुका है।

सूत्रों के मुताबिक, वीडी सतीशन सोमवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। राजनीतिक गलियारों में अब सबसे ज्यादा चर्चा नए मंत्रिमंडल के गठन और विभागों के बंटवारे को लेकर हो रही है। कांग्रेस आलाकमान चाहता है कि नई सरकार शुरुआत से ही एकजुट और स्थिर नजर आए।

20 मंत्रियों के साथ हो सकता है शपथ ग्रहण

यूडीएफ खेमे से जुड़ी जानकारी के अनुसार, कोशिश यह है कि मुख्यमंत्री के साथ ही पूरा मंत्रिमंडल भी एक साथ शपथ ले। यदि ऐसा होता है तो यह केरल की नई सरकार का पूर्ण राजनीतिक लॉन्च माना जाएगा।

राज्य की राजनीति में परंपरा रही है कि गठबंधन के प्रमुख सहयोगी दलों के मंत्री मुख्यमंत्री के साथ ही शपथ लेते हैं। हालांकि इस बार मुख्यमंत्री के नाम को अंतिम रूप देने में हुई देरी के कारण राजनीतिक अनिश्चितता का माहौल बन गया था। अब कांग्रेस नेतृत्व किसी भी तरह की नई अटकलों को जन्म नहीं देना चाहता।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यूडीएफ जनता को यह संदेश देना चाहता है कि गठबंधन पूरी तरह एकजुट है और सरकार गठन को लेकर अब कोई असमंजस नहीं बचा है।

राजभवन पहुंचे कांग्रेस नेता

गुरुवार शाम कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए राजभवन पहुंचे। इसके साथ ही नई सरकार के गठन की औपचारिक प्रक्रिया भी तेज हो गई।

यूडीएफ को हालिया विधानसभा चुनाव में भारी जनादेश मिला था और गठबंधन ने 102 सीटों पर जीत दर्ज की। ऐसे में जनता की अपेक्षाएं भी काफी बढ़ गई हैं। पार्टी नेतृत्व इस बात को लेकर सजग है कि सरकार गठन में किसी तरह की देरी विपक्ष को सवाल उठाने का मौका दे सकती है।

पोर्टफोलियो आवंटन पर जारी मंथन

मुख्यमंत्री पद पर सहमति बनने के बाद अब सबसे अहम मुद्दा विभागों के बंटवारे का है। कांग्रेस नेतृत्व और उसके प्रमुख सहयोगी दलों — इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) तथा केरल कांग्रेस के विभिन्न गुटों — के बीच लगातार बातचीत चल रही है।

सूत्रों का कहना है कि सत्ता साझेदारी का प्रारूप लगभग तय हो चुका है, लेकिन गृह, वित्त और लोक निर्माण जैसे महत्वपूर्ण विभागों को लेकर अभी भी चर्चा जारी है। इसके साथ-साथ क्षेत्रीय और सामुदायिक संतुलन बनाए रखने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

कांग्रेस नेतृत्व चाहता है कि नई कैबिनेट में सभी प्रमुख क्षेत्रों और सामाजिक समूहों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिले ताकि सरकार की शुरुआत मजबूत और संतुलित दिखाई दे।

IUML ने फैसले का किया स्वागत

आईयूएमएल सुप्रीमो पनक्कड़ सैय्यद सादिक अली शिहाब थंगल ने वीडी सतीशन को मुख्यमंत्री चुने जाने का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी शुरू से ही एआईसीसी नेतृत्व के फैसले के साथ खड़ी रही है।

थंगल ने कहा, “यह सरकार अगले पांच वर्षों तक एक सच्ची ‘टीम यूडीएफ’ सरकार के रूप में काम करेगी। कांग्रेस नेतृत्व ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत सहयोगी दलों से व्यापक चर्चा के बाद यह फैसला लिया है।”

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि उनकी पार्टी जल्द ही अपने मंत्री प्रतिनिधियों के नामों पर अंतिम फैसला करेगी।

सत्ता परिवर्तन का बड़ा राजनीतिक संकेत

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सोमवार को होने वाला शपथ ग्रहण समारोह केवल सत्ता परिवर्तन की औपचारिकता नहीं होगा, बल्कि यह केरल की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत का संकेत भी देगा।

वीडी सतीशन पिछले कुछ वर्षों में राज्य की वामपंथी सरकार के सबसे मुखर आलोचकों में रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री पद तक उनका पहुंचना कांग्रेस और यूडीएफ के लिए एक बड़ी राजनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है।

यदि मौजूदा योजना के अनुसार पूरा मंत्रिमंडल एक साथ शपथ लेता है, तो यह संदेश जाएगा कि यूडीएफ सरकार शुरुआत से ही प्रशासनिक तेजी और राजनीतिक स्थिरता के साथ काम करना चाहती है।

कौन हैं वीडी सतीशन?

वीडी सतीशन केरल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं और लंबे समय से पार्टी संगठन तथा विधानसभा राजनीति में सक्रिय रहे हैं। विपक्ष के नेता के तौर पर उन्होंने कई मुद्दों पर तत्कालीन सरकार को घेरा था। साफ-सुथरी छवि और आक्रामक राजनीतिक शैली के कारण वे कांग्रेस के भीतर मजबूत जनाधार वाले नेताओं में शामिल माने जाते हैं।

अब मुख्यमंत्री के तौर पर उनकी सबसे बड़ी चुनौती चुनावी वादों को जमीन पर उतारने और गठबंधन के भीतर संतुलन बनाए रखने की होगी।

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