लखनऊ/30 जुलाई 2026: उत्तर प्रदेश विधानमंडल का यूपी मानसून सत्र 2026 तीन अगस्त से शुरू होकर छह अगस्त तक चलने की संभावना है। इस दौरान सरकार 4 अगस्त को वित्तीय वर्ष 2026-27 का अनुपूरक बजट सदन में पेश करेगी। माना जा रहा है कि 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए इस बार के अनुपूरक बजट में कई नई योजनाओं और जनहित से जुड़े प्रस्तावों की घोषणा की जा सकती है।
सत्र के दौरान सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों को भी सदन में पेश कर सकती है। साथ ही नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की विभिन्न विभागों से जुड़ी रिपोर्टें और संभल हिंसा की न्यायिक जांच रिपोर्ट भी सदन के पटल पर रखे जाने की संभावना है।
4 अगस्त को पेश होगा अनुपूरक बजट
सरकारी कार्यक्रम के अनुसार, 4 अगस्त को दोपहर 12:20 बजे वित्तीय वर्ष 2026-27 के अनुपूरक अनुदानों की मांग सदन में प्रस्तुत की जाएगी। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए योगी सरकार इस बजट के जरिए कुछ नई विकास योजनाओं और जनकल्याणकारी घोषणाओं को शामिल कर सकती है।
गौरतलब है कि सरकार इससे पहले वित्तीय वर्ष 2026-27 का 9.12 लाख करोड़ रुपये से अधिक का मूल बजट पहले ही पारित करा चुकी है। अब अनुपूरक बजट के माध्यम से अतिरिक्त वित्तीय प्रावधान किए जाएंगे।
पहले दिन शोक प्रस्ताव, फिर शुरू होगा विधायी कामकाज
सत्र की शुरुआत 3 अगस्त को शोक प्रस्ताव के साथ होगी। समाजवादी पार्टी के निजामाबाद (आजमगढ़) से विधायक आलमबदी के निधन पर सदन श्रद्धांजलि देगा। परंपरा के अनुसार, शोक प्रस्ताव के बाद पहले दिन की कार्यवाही स्थगित कर दी जाएगी।
इसके बाद 5 अगस्त को विधायी और अन्य सरकारी कार्यों पर चर्चा होगी, जबकि 6 अगस्त को अनुपूरक बजट पर बहस के बाद उसे पारित कराने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
नौ अध्यादेशों की जगह लाए जा सकते हैं नए विधेयक
यूपी मानसून सत्र 2026 में सरकार पिछले सत्र के बाद जारी किए गए नौ अध्यादेशों के स्थान पर प्रतिस्थानी विधेयक पेश कर सकती है। इनमें उत्तर प्रदेश वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय, उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय तथा उत्तर प्रदेश लोक सेवा (अधिकरण) से जुड़े संशोधन अध्यादेश शामिल हैं।
सूत्रों के अनुसार, इन विधेयकों के अलावा कुछ नए विधायी प्रस्ताव भी सरकार सदन के सामने रख सकती है, जिन पर चर्चा और पारित कराने की तैयारी है।
CAG रिपोर्ट और संभल हिंसा जांच रिपोर्ट भी होगी पेश
सत्र के दौरान विभिन्न विभागों से संबंधित भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की रिपोर्टें भी विधानसभा और विधान परिषद के पटल पर रखी जाएंगी।
इसके अलावा 24 नवंबर 2024 को संभल स्थित शाही जामा मस्जिद के सर्वेक्षण के दौरान हुई हिंसा की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग की रिपोर्ट भी इस सत्र में प्रस्तुत किए जाने की संभावना है। इस रिपोर्ट पर राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर विशेष नजर रहेगी।
चुनावी साल से पहले अहम माना जा रहा है यह सत्र
राजनीतिक विश्लेषकों की नजर में यूपी मानसून सत्र 2026 केवल वित्तीय कार्यवाही तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आगामी 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सरकार की नीतिगत प्राथमिकताओं की झलक भी इसी सत्र में देखने को मिल सकती है। अनुपूरक बजट, नए विधेयक और महत्वपूर्ण रिपोर्टों की प्रस्तुति इस सत्र को राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण बना रही है।











