नई दिल्ली, 14 मई 2026। भारत और रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की दिशा में गुरुवार को एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक बैठक हुई। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया के हालात, वैश्विक सुरक्षा और द्विपक्षीय सहयोग जैसे कई अहम मुद्दों पर विस्तार से बातचीत हुई।
सर्गेई लावरोव इन दिनों भारत में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने पहुंचे हैं। ऐसे समय में यह मुलाकात काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जब दुनिया कई भू-राजनीतिक तनावों और वैश्विक अस्थिरता के दौर से गुजर रही है।
यूक्रेन और पश्चिम एशिया पर भारत का स्पष्ट रुख
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर भारत की पुरानी और स्पष्ट नीति दोहराई। उन्होंने कहा कि किसी भी संघर्ष या अंतरराष्ट्रीय विवाद का समाधान युद्ध के बजाय बातचीत और कूटनीति के जरिए ही संभव है।
सूत्रों के मुताबिक, चर्चा में यूक्रेन संकट और पश्चिम एशिया में लगातार बिगड़ते हालात प्रमुख रूप से शामिल रहे। प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए सभी देशों को संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए।
पिछले कुछ वर्षों में भारत ने रूस-यूक्रेन संघर्ष पर संतुलित रुख बनाए रखा है। भारत लगातार यह कहता रहा है कि स्थायी समाधान केवल शांतिपूर्ण वार्ता से ही निकल सकता है। गुरुवार की बैठक में भी यही संदेश साफ तौर पर सामने आया।
भारत-रूस सहयोग की प्रगति पर हुई समीक्षा
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की ओर से जारी बयान में बताया गया कि सर्गेई लावरोव ने प्रधानमंत्री मोदी को भारत और रूस के बीच चल रहे विभिन्न सहयोगी कार्यक्रमों की प्रगति की जानकारी दी।
विशेष रूप से दिसंबर 2025 में आयोजित 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के बाद शुरू हुई पहलों की समीक्षा की गई। उस शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच व्यापक बातचीत हुई थी।
दोनों देशों के बीच रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, परमाणु सहयोग और रणनीतिक साझेदारी लंबे समय से मजबूत संबंधों का आधार रहे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में भारत और रूस दोनों अपने संबंधों को और अधिक व्यावहारिक तथा संतुलित दिशा देने की कोशिश कर रहे हैं।
पीएम मोदी ने पुतिन को भेजीं शुभकामनाएं
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लिए अपनी शुभकामनाएं भी भेजीं। उन्होंने कहा कि भारत और रूस के बीच दशकों पुराने संबंध आपसी विश्वास और रणनीतिक सहयोग पर आधारित हैं।
प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों के बीच लगातार संवाद बनाए रखना बेहद जरूरी है, ताकि बदलती वैश्विक चुनौतियों का मिलकर सामना किया जा सके।
राजनयिक जानकारों के मुताबिक, भारत और रूस के रिश्ते केवल राजनीतिक स्तर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा उत्पादन और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहयोग तक फैले हुए हैं।
BRICS बैठक के बीच बढ़ी कूटनीतिक सक्रियता
नई दिल्ली में आयोजित BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान कई देशों के प्रतिनिधियों के बीच लगातार द्विपक्षीय मुलाकातों का दौर चल रहा है। भारत इस वर्ष BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और सरकार इसे वैश्विक दक्षिण की आवाज मजबूत करने के अवसर के रूप में देख रही है।
ऐसे में रूस के विदेश मंत्री की प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात को विशेष महत्व दिया जा रहा है। यह बैठक केवल द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें बदलते वैश्विक शक्ति संतुलन और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे व्यापक मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
भविष्य की रणनीतिक साझेदारी पर नजर
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और रूस आने वाले वर्षों में रक्षा तकनीक, ऊर्जा आपूर्ति, आर्कटिक सहयोग और बहुपक्षीय मंचों पर तालमेल जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा सकते हैं।
गुरुवार की बैठक ने यह संकेत भी दिया कि वैश्विक राजनीतिक परिस्थितियां चाहे जितनी बदलें, भारत और रूस दोनों अपने रणनीतिक रिश्तों को मजबूत बनाए रखने के पक्ष में हैं।













