तारकेश्वर (पश्चिम बंगाल)|20 जून 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को पश्चिम बंगाल के तारकेश्वर से राज्य की नई राजनीतिक और विकास यात्रा को लेकर बड़ा संदेश दिया। पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों के बैंक खातों में दो-दो हजार रुपये की किस्त जारी करने के बाद उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल अब दशकों के कुशासन और विकास अवरोधों से बाहर निकलकर नई दिशा में आगे बढ़ रहा है।
‘पश्चिम बंगाल दिवस’ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने राज्यवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बंगाल में बदलाव की एक नई ऊर्जा महसूस की जा सकती है। उनके अनुसार, लंबे समय बाद राज्य में ऐसा माहौल बना है जहां विकास, निवेश और जनकल्याण को प्राथमिकता दी जा रही है।
“बंगाल की हवा में बदलाव की नई ताजगी महसूस हो रही”
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता ने बदलाव के जिस संकल्प को चुना है, उसके परिणाम अब दिखाई देने लगे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में नई सरकार बनने के बाद विकास कार्यों की गति तेज हुई है और प्रशासनिक व्यवस्था को जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप ढालने का प्रयास किया जा रहा है।
पीएम मोदी ने कहा कि बंगाल केवल एक राज्य नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक, बौद्धिक और राष्ट्रीय चेतना का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। ऐसे में यहां का विकास देश के विकास से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है।
इतिहास का जिक्र कर कांग्रेस पर साधा निशाना
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में बंगाल के विभाजन और स्वतंत्रता से जुड़े ऐतिहासिक घटनाक्रमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 1940 के दशक में बंगाल ने हिंसा, विस्थापन और विभाजन की पीड़ा को बेहद करीब से महसूस किया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि जब पूरे बंगाल को पाकिस्तान में शामिल करने की कोशिशें हो रही थीं, तब कांग्रेस नेतृत्व निर्णायक भूमिका निभाने में विफल रहा। पीएम मोदी ने कहा कि उस समय डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने बंगाल की पहचान और अस्तित्व को बचाने के लिए आवाज उठाई थी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि अप्रैल 1947 में पारित प्रस्ताव और उसके बाद चले आंदोलन ने पश्चिम बंगाल को भारत का अभिन्न हिस्सा बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को इन ऐतिहासिक घटनाओं और उनसे जुड़े संघर्षों के बारे में अवश्य जानना चाहिए।
“इतिहास को भुलाने की कोशिश हुई”
पीएम मोदी ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद पश्चिम बंगाल के इतिहास और उससे जुड़े कई महत्वपूर्ण अध्यायों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक कारणों से कुछ ऐतिहासिक व्यक्तित्वों और घटनाओं को सार्वजनिक विमर्श से दूर रखने की कोशिश हुई।
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल दिवस केवल एक सरकारी आयोजन नहीं, बल्कि उन लाखों लोगों के संघर्ष, त्याग और बलिदान को याद करने का अवसर है जिन्होंने अपनी पहचान और मातृभूमि की रक्षा के लिए कठिन परिस्थितियों का सामना किया।
किसानों को मिली सम्मान निधि की नई किस्त
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों के खातों में नई किस्त भी जारी की। इसके माध्यम से पात्र किसानों को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के जरिए आर्थिक सहायता प्रदान की गई।
उन्होंने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने, आधुनिक कृषि को बढ़ावा देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार लगातार कई योजनाओं पर काम कर रही है।
योग दिवस से पहले देशवासियों को दिया संदेश
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अगले दिन वह स्वयं पश्चिम बंगाल में योग दिवस कार्यक्रम में शामिल होंगे।
स्वामी विवेकानंद और महर्षि अरविंद की धरती का उल्लेख करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि बंगाल की आध्यात्मिक और वैचारिक विरासत पूरी दुनिया को प्रेरित करती रही है। उन्होंने राज्य के लोगों से अपील की कि योग दिवस को जनभागीदारी का उत्सव बनाएं और अधिक से अधिक लोग इसमें शामिल हों।
प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि विकास, सांस्कृतिक विरासत और जनसहभागिता के बल पर पश्चिम बंगाल आने वाले वर्षों में देश की प्रगति का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरेगा।













