जोधपुर/04 जुलाई 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राजस्थान के बालोतरा जिले के पचपदरा में देश की पहली ग्रीनफील्ड इंटीग्रेटेड रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने इसे भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि वैश्विक ऊर्जा संकट के सबसे कठिन दौर में भारत ने समय पर सही फैसले लिए, प्रभावी रणनीति अपनाई और आम नागरिकों पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ने दिया।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि यह परियोजना केवल राजस्थान ही नहीं, बल्कि पूरे देश के औद्योगिक और ऊर्जा क्षेत्र के लिए नई संभावनाओं का द्वार खोलेगी। उनके अनुसार, आने वाले वर्षों में यह कॉम्प्लेक्स ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ पेट्रोकेमिकल उद्योग को भी नई मजबूती देगा।
ग्रीनफील्ड रिफाइनरी उद्घाटन के दौरान वैश्विक ऊर्जा संकट का किया जिक्र
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पश्चिमी एशिया में जारी युद्ध के कारण पूरी दुनिया अभूतपूर्व ऊर्जा संकट का सामना कर रही है। कई देशों में ईंधन की उपलब्धता प्रभावित हुई, लेकिन भारत ने दूरदर्शी नीतियों और समय पर लिए गए फैसलों के दम पर इस चुनौती का प्रभाव काफी हद तक नियंत्रित रखा।
उन्होंने कहा, “21वीं सदी के सबसे बड़े ऊर्जा संकट के दौरान भारत ने हर स्तर पर सही निर्णय लिए। समय रहते हालात का सटीक आकलन किया, संसाधनों का संतुलित उपयोग किया और अपनी कूटनीतिक क्षमता का सकारात्मक इस्तेमाल किया। यही वजह रही कि देश इस संकट से मजबूती के साथ उबर सका।”
‘अफवाहों के बीच सरकार लगातार करती रही काम’
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि संकट के दौरान कुछ ताकतें लगातार भ्रम और आशंकाएं फैलाने में लगी थीं, जबकि सरकार पर्दे के पीछे दिन-रात हालात को सामान्य बनाए रखने के लिए काम कर रही थी।
उन्होंने कहा कि नीतिगत और कूटनीतिक स्तर पर उठाए गए कई संवेदनशील कदमों की चर्चा शायद आज न हो, लेकिन भविष्य में इतिहास उन प्रयासों को जरूर दर्ज करेगा। उनके मुताबिक, कठिन परिस्थितियों में सरकार का धैर्य और समन्वित रणनीति ही देश को बड़ी चुनौतियों से बाहर निकालने में सफल रही।
‘ईंधन आपूर्ति प्रभावित नहीं होने दी’
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कई तरह की अफवाहें फैलाकर लोगों में भय का माहौल बनाने की कोशिश की गई, लेकिन सरकार ने देशभर में ईंधन आपूर्ति की श्रृंखला को मजबूत बनाए रखा। उन्होंने कहा कि दूर-दराज के इलाकों में भी मामूली बाधाओं को छोड़ दें तो पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल संकट से निपटना नहीं था, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी था कि आम लोगों का दैनिक जीवन सामान्य रूप से चलता रहे।
अप्रैल से जून के बीच 75 हजार करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान सहा
प्रधानमंत्री ने बताया कि अप्रैल से जून के बीच सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर 75 हजार करोड़ रुपये से अधिक का घाटा उठाना पड़ा। इस वित्तीय बोझ को सरकारी स्तर पर संभाला गया ताकि आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त भार न आए।
उन्होंने कहा कि इसी अवधि में केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर प्रति लीटर 10 रुपये एक्साइज ड्यूटी भी कम की। इसका उद्देश्य वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद महंगाई का दबाव कम करना और नागरिकों को राहत देना था।
ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में अहम कदम
पचपदरा में शुरू हुआ यह ग्रीनफील्ड इंटीग्रेटेड रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स भारत के ऊर्जा ढांचे को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे घरेलू रिफाइनिंग क्षमता बढ़ेगी, पेट्रोकेमिकल उद्योग को गति मिलेगी और राजस्थान सहित पश्चिमी भारत में निवेश एवं रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।











