लखनऊ|04 जुलाई 2026: उत्तर प्रदेश के आम को वैश्विक बाजार में और मजबूत पहचान दिलाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। यूपी आम निर्यात को गति देने के उद्देश्य से आयोजित आम महोत्सव 2026 के क्रेता-विक्रेता सम्मेलन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने निर्यात प्रक्रिया में आ रही व्यावहारिक चुनौतियों को जल्द दूर करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यदि गुणवत्ता, प्रमाणन और आधुनिक तकनीक से जुड़ी समस्याओं का समाधान किया जाए तो प्रदेश के आम की अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग और अधिक बढ़ सकती है।
शनिवार को लखनऊ स्थित जन भवन में आयोजित सम्मेलन में राज्यपाल ने आम उत्पादकों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), निर्यातकों और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। इस अवसर पर निर्यात और विपणन को बढ़ावा देने के लिए चार महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर भी हस्ताक्षर किए गए।
यूपी आम निर्यात बढ़ाने के लिए गुणवत्ता और तकनीक पर जोर
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि प्रदेश के आम उत्पादकों और एफपीओ के सामने वैश्विक श्रेष्ठ कृषि अभ्यास (GAP) प्रमाणन, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन और आम की सुरक्षित एवं वैज्ञानिक तरीके से तुड़ाई जैसी कई चुनौतियां मौजूद हैं। इन बाधाओं को दूर करने के लिए आधुनिक उपकरणों और आवश्यक तकनीकी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि किसानों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप उत्पादन और प्रबंधन अपनाने में हर संभव सहयोग दिया जाए, ताकि उत्तर प्रदेश के आम की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता वैश्विक बाजार में और मजबूत हो सके।
राज्यपाल ने प्रदेश में बारहमासी आम के पौधों के रोपण को बढ़ावा देने की भी बात कही। साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि जिस प्रकार जन भवन परिसर में चंदन वाटिका विकसित की गई है, उसी तर्ज पर प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी चंदन वाटिकाएं विकसित की जाएं।
उन्होंने हाल ही में नाबार्ड में एफपीओ से जुड़ी कृषि चुनौतियों पर हुए विचार-विमर्श का उल्लेख करते हुए कहा कि कृषि विज्ञान केंद्रों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया जाना चाहिए। साथ ही सरकारी अनुदान का उपयोग पूरी पारदर्शिता और प्रभावशीलता के साथ सुनिश्चित किया जाए।
प्रसंस्करण और निर्यात पर किसानों को देना होगा अधिक ध्यान
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि यदि विभागीय मंत्री और अधिकारी समन्वित तरीके से कार्य करें तो कृषि क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं। उन्होंने किसानों से केवल उत्पादन तक सीमित न रहकर प्रसंस्करण और निर्यात गतिविधियों से भी जुड़ने का आह्वान किया। उनका कहना था कि छोटे और बड़े, दोनों वर्ग के किसानों के लिए मूल्य संवर्धन और प्रोसेसिंग भविष्य की जरूरत बन चुकी है।
उद्यान राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि प्रदेश के आम उत्पादकों ने अपनी मेहनत के दम पर उत्तर प्रदेश को देश और दुनिया में नई पहचान दिलाई है। उन्होंने किसानों से खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना करने की अपील करते हुए भरोसा दिलाया कि सरकार इस दिशा में हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी।
सम्मेलन में आम की सुरक्षित तुड़ाई, तुड़ाई उपरांत प्रबंधन, आम आधारित उद्यमिता एवं स्टार्टअप, मूल्य संवर्धन, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, निर्यात प्रोत्साहन, ब्रांडिंग और वैश्विक मानकों जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तृत जानकारी दी। साथ ही जैविक और प्राकृतिक तरीके से गुणवत्तापूर्ण आम उत्पादन की आधुनिक तकनीकों पर भी चर्चा हुई।
इस दौरान निर्यात क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए चार एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इनमें विदुशी कंसलटेंसी एंड एक्सपोर्टर और आम उत्पादक विजय कुमार सिंह, फ्रूट एंड वेजिटेबल फेयर एक्सपोर्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड एवं आम उत्पादक आशीष कुमार द्विवेदी, इशांत सैनी ग्रोवर्स एंड एक्सपोर्टर्स तथा आम उत्पादक दीपक दीक्षित, और भूपति एफपीओ व इरादा एफपीओ के निदेशक दया शंकर सिंह के साथ आम उत्पादक राजेंद्र कुमार तिवारी के बीच समझौते शामिल रहे।
इन समझौतों से प्रदेश के आम उत्पादकों को नए बाजार, बेहतर विपणन अवसर और निर्यात नेटवर्क का लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।











