चित्रकूट, 08 जुलाई 2026। प्रभु श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट की पहचान केवल उसके धार्मिक स्थलों से नहीं, बल्कि आस्था की प्रतीक मंदाकिनी नदी से भी जुड़ी है। लंबे समय से प्रदूषण और अव्यवस्था की मार झेल रही इस पवित्र नदी के संरक्षण की दिशा में अब नई उम्मीद जगी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को चित्रकूट दौरे के दौरान मंदाकिनी नदी पुनरुद्धार को सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल करते हुए सिंचाई विभाग को ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि नदी को स्वच्छ, निर्मल और श्रद्धालुओं के अनुकूल बनाने के लिए सभी संबंधित विभागों को मिलकर समन्वित रूप से काम करना होगा।
जनसभा से लेकर समीक्षा बैठक तक छाई रही मंदाकिनी की चिंता
चित्रकूट में आयोजित जनसभा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए “जय श्रीराम”, “जय श्रीहनुमान” के साथ “जय मंदाकिनी माता” का उद्घोष कराया। उन्होंने कहा कि मंदाकिनी केवल एक नदी नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और चित्रकूट की सांस्कृतिक पहचान की जीवनरेखा है।
इसके बाद कलेक्ट्रेट सभागार में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में भी मुख्यमंत्री ने मंदाकिनी नदी की स्थिति पर विशेष चर्चा की और अधिकारियों को पुनरुद्धार की दिशा में शीघ्र कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
सिंचाई विभाग को प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने सिंचाई विभाग को निर्देश दिया कि मंदाकिनी नदी पुनरुद्धार के लिए व्यापक और प्रभावी कार्ययोजना तैयार कर शासन को भेजी जाए। उन्होंने कहा कि योजना केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि उसके माध्यम से नदी की स्वच्छता, जल प्रवाह और पर्यावरणीय संतुलन में वास्तविक सुधार दिखाई देना चाहिए।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि नदी संरक्षण से जुड़े सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें, ताकि पुनर्जीवन की प्रक्रिया तेज गति से आगे बढ़ सके।
श्रद्धालुओं को बेहतर वातावरण देने पर सरकार का फोकस
चित्रकूट हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों का स्वागत करता है। ऐसे में मुख्यमंत्री ने कहा कि मंदाकिनी नदी को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाए बिना धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाई नहीं दी जा सकती।
उन्होंने संकेत दिया कि नदी तटों की साफ-सफाई, पर्यावरण संरक्षण और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए समग्र योजना तैयार की जाएगी, जिससे आने वाले लोगों को बेहतर अनुभव मिल सके।
पुनर्जीवन की उम्मीद हुई मजबूत
लंबे समय से स्थानीय नागरिक और सामाजिक संगठन मंदाकिनी नदी के संरक्षण की मांग उठाते रहे हैं। मुख्यमंत्री के ताजा निर्देशों के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि नदी के पुनरुद्धार की दिशा में ठोस और समयबद्ध पहल शुरू होगी।
यदि प्रस्तावित कार्ययोजना प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो इससे न केवल नदी की स्वच्छता और प्राकृतिक स्वरूप में सुधार होगा, बल्कि चित्रकूट की धार्मिक और पर्यटन पहचान को भी नई मजबूती मिलेगी।
धार्मिक विरासत के संरक्षण पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने दौरे के दौरान यह भी दोहराया कि चित्रकूट की पहचान उसकी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत से है। ऐसे में मंदाकिनी नदी का संरक्षण केवल पर्यावरण का विषय नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा दायित्व भी है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पुनरुद्धार कार्यों में गुणवत्ता, समयसीमा और पारदर्शिता का विशेष ध्यान रखा जाए, ताकि भविष्य में मंदाकिनी फिर से अपने स्वच्छ और निर्मल स्वरूप में दिखाई दे।









