नई दिल्ली/16 जुलाई 2026: भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने पूर्वी कमान के तहत आने वाले रणनीतिक सैन्य ठिकानों का दौरा कर सिलिगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। पश्चिम बंगाल के बेंगडुबी सैन्य स्टेशन से लेकर नागालैंड स्थित 3 कोर (स्पीयर कोर) तक हुए इस दौरे में परिचालन तैयारियों, आधुनिक सैन्य तकनीक, एजेंसियों के बीच तालमेल और भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों पर विशेष जोर दिया गया। यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब भारत अपनी पूर्वी सीमाओं और पूर्वोत्तर राज्यों की सुरक्षा को और मजबूत बनाने पर लगातार काम कर रहा है।
आखिर क्या है सिलिगुड़ी कॉरिडोर, जिसे ‘चिकन नेक’ कहा जाता है?
भारत के नक्शे पर पश्चिम बंगाल में स्थित सिलिगुड़ी कॉरिडोर एक बेहद संकरा भू-भाग है, जिसे आम भाषा में ‘चिकन नेक’ कहा जाता है। नेपाल और बांग्लादेश के बीच स्थित यह हिस्सा कई स्थानों पर 20 किलोमीटर से भी कम चौड़ा है।
यही संकरा गलियारा देश के आठ पूर्वोत्तर राज्यों—असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा—को शेष भारत से सड़क और रेल मार्ग के जरिए जोड़ता है। यही वजह है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से इसकी अहमियत बेहद संवेदनशील मानी जाती है।
बेंगडुबी सैन्य स्टेशन का दौरा क्यों रहा खास?
सेना प्रमुख ने पूर्वी कमान के तहत आने वाले बेंगडुबी सैन्य स्टेशन का भी निरीक्षण किया। यह सैन्य ठिकाना सिलिगुड़ी कॉरिडोर के उत्तरी प्रवेश क्षेत्र के निकट स्थित है और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां उन्हें मौजूदा सुरक्षा हालात, सैनिकों की तैनाती, निगरानी तंत्र और परिचालन तैयारियों की विस्तृत जानकारी दी गई।
इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने पर सरकार का जोर
सिलिगुड़ी कॉरिडोर को और सुरक्षित बनाने के लिए केंद्र सरकार लगातार बुनियादी ढांचे का विस्तार कर रही है। हाल ही में भारतीय रेलवे ने करीब 35 किलोमीटर लंबी भूमिगत रेल लाइन विकसित करने की योजना की घोषणा की है। इसका उद्देश्य किसी भी संघर्ष, आपात स्थिति या तोड़फोड़ की स्थिति में सैन्य और नागरिक आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखना है।
इसके अलावा पश्चिम बंगाल सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गों के सात महत्वपूर्ण हिस्सों के विस्तार का कार्य केंद्रीय एजेंसियों को सौंप दिया है। वहीं निगरानी व्यवस्था मजबूत करने और सुरक्षा बलों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए 120 एकड़ से अधिक भूमि सीमा सुरक्षा बल (BSF) और अन्य केंद्रीय एजेंसियों को हस्तांतरित की गई है।
बागडोगरा और हासिमारा एयरबेस की भी अहम भूमिका
इस पूरे रणनीतिक क्षेत्र में बागडोगरा हवाई अड्डा और हासिमारा वायुसेना स्टेशन भारतीय रक्षा व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। विशेष रूप से हासिमारा एयरबेस इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां भारतीय वायुसेना का 101 स्क्वाड्रन तैनात है, जो देश के परिचालनशील राफेल स्क्वाड्रनों में शामिल है। किसी भी आपात स्थिति में यह एयरबेस पूर्वी मोर्चे पर त्वरित सैन्य प्रतिक्रिया देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
नागालैंड में 3 कोर का भी किया दौरा
पूर्वी क्षेत्र के दौरे के दौरान सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ नागालैंड स्थित 3 कोर (स्पीयर कोर) मुख्यालय भी पहुंचे। यहां उन्होंने बदलते सुरक्षा परिदृश्य, विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय, आधुनिक युद्ध की तैयारियों और सैन्य क्षमता बढ़ाने से जुड़े प्रयासों की समीक्षा की।
उन्होंने सैन्य अधिकारियों के साथ बातचीत में सेना के भविष्य के विजन ‘VIJAY’ को भी साझा किया। इस विजन में Vigilance (सतर्कता), Innovation (नवाचार), Jointness (संयुक्तता), Aatmanirbharta (आत्मनिर्भरता) और Warrior-Centricity (सैनिक-केंद्रित दृष्टिकोण) को सेना के आधुनिकीकरण का आधार बताया गया।
भविष्य की चुनौतियों के लिए सेना को तैयार करने पर जोर
जनरल धीरज सेठ ने कहा कि आधुनिक तकनीक को अपनाना, संयुक्त सैन्य संचालन की क्षमता बढ़ाना और आत्मनिर्भर रक्षा प्रणाली विकसित करना समय की आवश्यकता है। उनके अनुसार इन्हीं सिद्धांतों के आधार पर भारतीय सेना भविष्य की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने में सक्षम होगी।
गौरतलब है कि सेना प्रमुख बनने के बाद यह उनका दूसरा प्रमुख फील्ड दौरा है। इससे पहले उन्होंने जम्मू-कश्मीर के पुंछ, राजौरी और सुंदरबनी सेक्टर में अग्रिम चौकियों का निरीक्षण कर पश्चिमी मोर्चे की सुरक्षा तैयारियों का भी आकलन किया था।












