नई दिल्ली/16 जुलाई 2026: एसिड अटैक पीड़ितों के इलाज से जुड़ी मुश्किलों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और रेल मंत्रालय से एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर जवाब मांगा है। अदालत ने सुझाव दिया है कि इलाज के लिए लगातार यात्रा करने वाले एसिड अटैक पीड़ितों को एसी श्रेणी के रेल टिकटों में रियायत देने की संभावना पर गंभीरता से विचार किया जाए। कोर्ट का मानना है कि यह केवल यात्रा सुविधा का मामला नहीं, बल्कि पीड़ितों के सम्मानजनक और सुलभ इलाज से जुड़ा मानवीय मुद्दा भी है।
नई दिल्ली, 16 जुलाई 2026। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अर्चना पाठक दवे से कहा कि वे इस विषय पर रेल मंत्रालय से आवश्यक निर्देश लेकर अदालत को अवगत कराएं।
याचिका में क्या मांग की गई है?
यह याचिका ‘अतिजीवन सोसायटी’ की ओर से दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि एसिड अटैक पीड़ितों को वर्षों तक कई चरणों में सर्जरी और उपचार कराना पड़ता है। इसके लिए उन्हें बार-बार दिल्ली, चेन्नई, हैदराबाद जैसे शहरों के सुपर-स्पेशियलिटी अस्पतालों तक लंबी दूरी की यात्रा करनी पड़ती है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि ऑपरेशन के बाद त्वचा अत्यधिक संवेदनशील हो जाती है। तेज गर्मी, संक्रमण और असहनीय खुजली से बचाव के लिए अधिकांश मरीजों को एसी कोच में यात्रा करना चिकित्सकीय रूप से अधिक उपयुक्त होता है। हालांकि लगातार इलाज और सर्जरी के भारी खर्च के बीच महंगे एसी रेल टिकट खरीदना कई पीड़ितों के लिए आर्थिक रूप से संभव नहीं रह जाता।
इलाज के दौरान कई साल तक करनी पड़ती है यात्रा
याचिका में यह भी बताया गया कि गंभीर रूप से झुलसे पीड़ितों का इलाज एक-दो महीने में पूरा नहीं होता। कई मामलों में चार से पांच वर्षों तक अलग-अलग चरणों में प्लास्टिक सर्जरी और पुनर्वास की प्रक्रिया चलती है। ऐसे में मरीजों और उनके परिवारों पर यात्रा का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।
इसके अलावा जिन पीड़ितों को जबरन एसिड पिलाया गया है, उन्हें रेलवे में रियायती टिकट के लिए आवश्यक मेडिकल प्रमाणपत्र हासिल करने में भी कई व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
कैंसर और थैलेसीमिया मरीजों जैसी सुविधा देने का सुझाव
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि वर्तमान में रेलवे दिव्यांग व्यक्तियों की 21 श्रेणियों को किराये में रियायत प्रदान करता है।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि केंद्र सरकार यह विचार करे कि क्या एसिड अटैक पीड़ितों को भी कैंसर और थैलेसीमिया के मरीजों की तरह विशेष श्रेणी में शामिल किया जा सकता है, ताकि उन्हें इलाज के लिए एसी रेल टिकटों में रियायत का लाभ मिल सके।
अदालत ने इस संबंध में रेल मंत्रालय की विस्तृत राय प्रस्तुत करने को कहा है।
मानवीय पहलू पर कोर्ट का विशेष जोर
सुनवाई के दौरान अदालत ने संकेत दिया कि यह मामला केवल किराये में छूट देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन लोगों की सहायता से जुड़ा है जो गंभीर शारीरिक, मानसिक और आर्थिक चुनौतियों के बीच लंबे समय तक इलाज कराने को मजबूर होते हैं।
यदि इस दिशा में सकारात्मक निर्णय लिया जाता है, तो देशभर में हजारों एसिड अटैक पीड़ितों को इलाज के लिए यात्रा करना अधिक सुलभ और किफायती हो सकता है।
अब इस मामले में सभी की नजरें केंद्र सरकार और रेल मंत्रालय के जवाब पर टिकी हैं। अदालत में अगली सुनवाई के दौरान सरकार का रुख साफ होने के बाद इस प्रस्ताव पर आगे की प्रक्रिया तय होगी।












