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UPSSSC भर्ती में फर्जी प्रमाणपत्रों पर सख्ती, डिजिलॉकर से होगा शैक्षणिक दस्तावेजों का सत्यापन

On: July 17, 2026
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UPSSSC भर्ती में फर्जी प्रमाणपत्रों पर सख्ती
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लखनऊ/17 जुलाई 2026: उत्तर प्रदेश में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) अब भर्ती प्रक्रिया में डिजिलॉकर सत्यापन प्रणाली लागू करने की तैयारी कर रहा है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य फर्जी, छेड़छाड़ किए गए या संशोधित शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के जरिए नौकरी हासिल करने की कोशिशों पर प्रभावी रोक लगाना है।

आयोग की योजना है कि अभ्यर्थियों द्वारा अपलोड किए गए शैक्षणिक दस्तावेजों का मिलान सीधे डिजिलॉकर में उपलब्ध आधिकारिक डिजिटल रिकॉर्ड से किया जाए। यदि दोनों रिकॉर्ड में कोई अंतर या संदेहजनक जानकारी मिलती है, तो संबंधित आवेदन निरस्त किया जा सकता है या अभ्यर्थी को मूल दस्तावेजों के सत्यापन के लिए बुलाया जाएगा।

लेखपाल भर्ती से हो सकती है नई व्यवस्था की शुरुआत

सूत्रों के अनुसार आयोग इस व्यवस्था की शुरुआत लेखपाल भर्ती से कर सकता है। लेखपाल भर्ती परीक्षा पहले ही आयोजित की जा चुकी है और उसकी उत्तर कुंजी भी जारी हो चुकी है। अंतिम परिणाम घोषित होने के बाद सफल अभ्यर्थियों के शैक्षणिक प्रमाणपत्र पहली बार डिजिलॉकर सत्यापन के माध्यम से जांचे जाने की संभावना है।

इसके बाद आयोग की अन्य सभी भर्तियों में भी इसी प्रक्रिया को लागू करने की तैयारी की जा रही है।

अभी कैसे होती है दस्तावेजों की जांच?

वर्तमान व्यवस्था में अभ्यर्थी आवेदन करते समय अपने शैक्षणिक प्रमाणपत्र आयोग की वेबसाइट पर अपलोड करते हैं। इसके बाद आवेदन में दर्ज विवरण के आधार पर संबंधित बोर्ड या विश्वविद्यालय से दस्तावेजों का सत्यापन कराया जाता है।

नई प्रणाली में इस प्रक्रिया के साथ डिजिलॉकर को भी जोड़ा जाएगा, जिससे दस्तावेजों की प्रामाणिकता की एक अतिरिक्त और अधिक विश्वसनीय जांच संभव होगी।

क्यों अहम है डिजिलॉकर सत्यापन?

डिजिलॉकर में उपलब्ध दस्तावेज सीधे संबंधित बोर्ड, विश्वविद्यालय या शैक्षणिक संस्थानों के डिजिटल रिकॉर्ड से जुड़े होते हैं। यही वजह है कि इनकी विश्वसनीयता पारंपरिक स्कैन या अपलोड किए गए दस्तावेजों की तुलना में अधिक मानी जाती है।

आयोग का मानना है कि डिजिटल सत्यापन लागू होने से भर्ती प्रक्रिया न केवल तेज होगी, बल्कि उसमें पारदर्शिता भी बढ़ेगी। इससे चयन प्रक्रिया में विवाद कम होंगे और केवल वास्तविक एवं पात्र अभ्यर्थियों का चयन सुनिश्चित किया जा सकेगा।

अभ्यर्थियों और आयोग दोनों को मिलेगा लाभ

नई व्यवस्था लागू होने के बाद आयोग को बार-बार दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन कराने की आवश्यकता कम पड़ेगी। इससे चयन प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी की जा सकेगी।

वहीं अभ्यर्थियों को भी हर चरण में मूल प्रमाणपत्र लेकर उपस्थित होने की जरूरत कम होगी, जिससे उनकी प्रक्रिया अधिक सरल और सुविधाजनक बनेगी।

क्या है डिजिलॉकर?

डिजिलॉकर भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की डिजिटल दस्तावेज़ सेवा है। यह एक सुरक्षित क्लाउड आधारित प्लेटफॉर्म है, जहां सरकारी और शैक्षणिक दस्तावेजों को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखा, साझा किया और सत्यापित किया जा सकता है।

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत डिजिलॉकर में उपलब्ध दस्तावेज कागजी प्रमाणपत्रों के समान वैध माने जाते हैं। इस प्लेटफॉर्म पर सीबीएसई, आईसीएसई, यूपी बोर्ड सहित कई विश्वविद्यालयों के वर्ष 2016-17 और उसके बाद के प्रमाणपत्र उपलब्ध हैं। सीबीएसई के कुछ वर्ष 2001 के बाद के रिकॉर्ड भी यहां देखे जा सकते हैं।

अभ्यर्थी आधार या मोबाइल नंबर के माध्यम से ओटीपी आधारित लॉगिन कर अपने बोर्ड, रोल नंबर और परीक्षा वर्ष की जानकारी दर्ज करके प्रमाणपत्र देख सकते हैं तथा उन्हें पीडीएफ स्वरूप में डाउनलोड भी कर सकते हैं।

नई डिजिलॉकर सत्यापन व्यवस्था लागू होने के बाद उत्तर प्रदेश की भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वसनीयता को नई मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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