लखनऊ/17 जुलाई 2026: राजधानी लखनऊ में बिजली विभाग द्वारा 3.67 लाख उपभोक्ताओं का बिजली लोड बढ़ाए जाने के बाद नई बहस शुरू हो गई है। विभाग का कहना है कि जिन उपभोक्ताओं की बिजली खपत उनके स्वीकृत भार से अधिक पाई गई, उनका लोड विद्युत नियामक आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार बढ़ाया गया है। वहीं उपभोक्ताओं का सवाल है कि यदि विभाग बिना आवेदन के लोड बढ़ा सकता है, तो खपत कम होने पर उसे स्वतः घटाने की व्यवस्था क्यों नहीं है।
इस मुद्दे को लेकर कई उपभोक्ताओं ने विभाग की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं और इसे उपभोक्ताओं के लिए असुविधाजनक बताया है।
किन उपभोक्ताओं का बढ़ाया गया बिजली लोड?
बिजली विभाग के अनुसार जिन उपभोक्ताओं की एक वर्ष के दौरान कम से कम तीन बार बिजली खपत उनके स्वीकृत भार से अधिक दर्ज हुई, उनका बिजली लोड बढ़ा दिया गया। विभाग का तर्क है कि यदि किसी क्षेत्र में बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं की खपत लगातार बढ़ रही है, तो उस इलाके के ट्रांसफॉर्मर पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
इसी आधार पर संबंधित क्षेत्रों में ट्रांसफॉर्मर की क्षमता बढ़ाने की योजना भी तैयार की जाएगी, ताकि भविष्य में बिजली आपूर्ति प्रभावित न हो।
उपभोक्ताओं ने उठाए प्रक्रिया पर सवाल
उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि विभाग को उनकी बिजली खपत की पूरी जानकारी पहले से उपलब्ध रहती है, तो कम खपत होने पर लोड स्वतः कम क्यों नहीं किया जाता।
उपभोक्ता राघवेन्द्र ने ई-मेल के माध्यम से अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि विभाग बिना सहमति के लोड बढ़ा देता है, लेकिन जब उपभोक्ता का उपयोग कम हो जाता है, तब लोड घटाने के लिए अलग से आवेदन मांगता है।
उन्होंने यह भी कहा कि लोड बढ़ने पर जुर्माना या अन्य शुल्क देना पड़ता है, लेकिन जब खपत कम हो जाए तो प्रक्रिया को भी उतना ही सरल बनाया जाना चाहिए।
विभाग ने क्या दी सफाई?
मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के निदेशक (वाणिज्य) रजत जुनेजा ने कहा कि उपभोक्ता जितनी बिजली का उपयोग करेगा, उसी के अनुसार उसकी खपत दर्ज होगी और उसी आधार पर बिल बनाया जाएगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी उपभोक्ता की बिजली खपत लंबे समय तक कम रहती है और वह स्वीकृत भार घटवाना चाहता है, तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन करने पर उसका आकलन किया जाएगा। जांच के बाद आवश्यकता होने पर बिजली लोड कम भी किया जा सकता है।
ट्रांसफॉर्मर क्षमता बढ़ाने का भी आधार बनेगी खपत
बिजली विभाग का कहना है कि उपभोक्ताओं की वास्तविक बिजली खपत का आंकड़ा केवल बिलिंग तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसी के आधार पर किसी क्षेत्र के ट्रांसफॉर्मर और वितरण व्यवस्था की क्षमता का भी आकलन किया जाता है।
यदि किसी इलाके में लगातार अधिक बिजली उपयोग दर्ज होता है, तो वहां ट्रांसफॉर्मर अपग्रेड करने और बिजली आपूर्ति व्यवस्था मजबूत करने का निर्णय लिया जाता है, ताकि ओवरलोडिंग और बार-बार बिजली बाधित होने जैसी समस्याओं से बचा जा सके।
क्या करना होगा उपभोक्ताओं को?
यदि किसी उपभोक्ता को लगता है कि उसका बिजली लोड वास्तविक आवश्यकता से अधिक है और अब उसकी बिजली खपत पहले की तुलना में कम हो गई है, तो उसे विभाग के निर्धारित नियमों के अनुसार आवेदन करना होगा। विभाग आवेदन मिलने के बाद खपत का आकलन करेगा और नियमों के अनुरूप स्वीकृत भार में संशोधन किया जाएगा।
हालांकि, उपभोक्ताओं की मांग है कि जिस तरह विभाग खपत बढ़ने पर स्वतः लोड बढ़ा देता है, उसी प्रकार कम खपत होने पर भी बिना अतिरिक्त औपचारिकता के स्वीकृत भार घटाने की व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।










