लखनऊ|20 जुलाई 2026: लखनऊ में भूजल संरक्षण पर संगोष्ठी के माध्यम से जल संरक्षण और नदी पुनरुद्धार को लेकर एक व्यापक विमर्श देखने को मिला। उत्तर प्रदेश राज्य स्वच्छ गंगा मिशन की ओर से आयोजित इस एक दिवसीय कार्यक्रम में जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने जल संरक्षण को केवल सरकारी अभियान नहीं, बल्कि जनभागीदारी से जुड़ा जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया। संगोष्ठी में नीति-निर्माताओं, विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, प्रशासनिक अधिकारियों और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने जल संकट से निपटने के व्यावहारिक उपायों पर विस्तार से चर्चा की।
कार्यक्रम का आयोजन “भूजल संरक्षण एवं नदी पुनरुद्धार” विषय पर किया गया, जिसका उद्देश्य भूजल पुनर्भरण, नदियों के संरक्षण, जल संसाधनों के सतत प्रबंधन तथा समाज की सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा देना था। जल विशेषज्ञों ने माना कि बदलते जलवायु परिदृश्य में जल संरक्षण अब विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बन चुका है।
कार्यक्रम का शुभारंभ उत्तर प्रदेश के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुराग श्रीवास्तव, उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) के प्रबंध निदेशक डॉ. राजशेखर सिंह, भूगर्भ जल विभाग के विशेष सचिव एवं निदेशक राजेश प्रजापति तथा जल संरक्षण विशेषज्ञ एवं पूर्व आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर विनोद तारे ने दीप प्रज्ज्वलन एवं जल कलश पूजन के साथ किया। इस अवसर पर गंगा अवतरण पर आधारित सांस्कृतिक नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की गई। राज्य स्वच्छ गंगा मिशन की गतिविधियों पर आधारित पुस्तक का विमोचन भी हुआ, जबकि “गंगा ज्ञान चक्र” पहल का परिचय और प्रस्तुतीकरण भी किया गया।
अपने संबोधन में जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि जल संरक्षण को प्रत्येक नागरिक का दायित्व बनाना होगा। उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद सभी प्रतिभागियों से अपने-अपने क्षेत्रों में जल संरक्षण का संदेश पहुंचाने और इसे जन-जन तक ले जाने का संकल्प लेने की अपील की।
नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुराग श्रीवास्तव ने सभी प्रतिभागियों से जल एंबेसडर की भूमिका निभाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यदि समाज का हर व्यक्ति जल संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी निभाए, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखा जा सकता है।
उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) के प्रबंध निदेशक डॉ. राजशेखर सिंह ने विशेष रूप से उपस्थित छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए वर्तमान जल उपलब्धता, भूजल की स्थिति और संरक्षण के वैज्ञानिक उपायों पर प्रकाश डाला। उन्होंने युवाओं को जल संरक्षण अभियान से सक्रिय रूप से जुड़ने का संदेश दिया।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को “भागीरथ सम्मान” से सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों ने जल स्रोतों के संरक्षण में प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी को समय की आवश्यकता बताया।
दोपहर में आयोजित तकनीकी सत्र में देश के विभिन्न हिस्सों से आए विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। मुंबई से भूषण गुप्ता, जीआईजेड (GIZ) की डॉ. आडुरी कैटना हर्नांडेज, नोएडा से प्रो. विनोद तारे, आईआईटी (बीएचयू) वाराणसी के प्रभात सिंह, डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ के वेंकटेश वट्टा तथा उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के इंजीनियर-इन-चीफ अशोक कुमार सिंह ने भूजल संरक्षण, नदी पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन, तकनीकी नवाचार और सामुदायिक सहभागिता से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए।
विशेषज्ञों ने अपने संबोधन में लगातार गिरते भूजल स्तर पर चिंता जताई और कहा कि वर्षा जल संचयन, प्राकृतिक जल स्रोतों का पुनर्जीवन तथा वैज्ञानिक जल प्रबंधन को प्राथमिकता देना समय की मांग है। उनका मत था कि जल संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं से संभव नहीं होगा, बल्कि समाज के हर वर्ग की भागीदारी इसके लिए अनिवार्य है।
समापन सत्र में संगोष्ठी के दौरान प्राप्त सुझावों और संस्तुतियों पर विस्तार से चर्चा की गई। इन सुझावों को भविष्य की कार्ययोजना में शामिल करने पर सहमति बनी। धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
“स्वच्छ गंगा–सुरक्षित भविष्य” के संकल्प के साथ आयोजित यह संगोष्ठी जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और नदी पुनरुद्धार के क्षेत्र में जनजागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार, समाज और शैक्षणिक संस्थान मिलकर निरंतर प्रयास करें, तो जल संकट से प्रभावी ढंग से निपटा जा सकता है।









