नई दिल्ली/24 जुलाई 2026। किसानों तक रियायती उर्वरक पारदर्शी और समय पर पहुंचाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक नई पायलट परियोजना शुरू की है। यह पहल फिलहाल 20 राज्यों के 40 जिलों में चरणबद्ध तरीके से लागू की जा रही है। इस व्यवस्था के तहत किसान या उनके अधिकृत प्रतिनिधि मोबाइल ऐप के जरिए पहले से उर्वरक की आवश्यकता दर्ज कर सकेंगे और भूमि व फसल का विवरण उपलब्ध कराकर बुकिंग भी कर पाएंगे।
शुक्रवार को संसद में रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने लिखित उत्तर में बताया कि इस परियोजना का संचालन उर्वरक विभाग और कृषि एवं किसान कल्याण विभाग संयुक्त रूप से कर रहे हैं। इसका उद्देश्य पात्र किसानों तक सब्सिडी वाले उर्वरकों का अधिक व्यवस्थित और लक्षित वितरण सुनिश्चित करना है।
क्या है ‘उर्वरक बिक्री के लिए ढांचा’ परियोजना?
सरकार ने इस पायलट पहल को ‘उर्वरक बिक्री के लिए ढांचा’ (Framework for Fertilizer Sale) नाम दिया है। चयनित 20 राज्यों के 40 जिलों में किसानों को उनकी भूमि की जोत और बोई गई फसल के आधार पर रियायती उर्वरक उपलब्ध कराया जा रहा है।
इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी एकीकृत उर्वरक प्रबंधन प्रणाली (IFMS) के माध्यम से की जा रही है। राज्य सरकारों के अधिकारी IFMS डैशबोर्ड पर उर्वरक खरीद और वितरण से संबंधित रिपोर्ट रियल टाइम में देख सकते हैं, जिससे पारदर्शिता और निगरानी दोनों मजबूत होंगी।
मोबाइल ऐप से पहले ही कर सकेंगे उर्वरक की बुकिंग
नई व्यवस्था के तहत किसानों को उर्वरक खरीद के लिए लंबी प्रतीक्षा नहीं करनी होगी। किसान या उनका अधिकृत प्रतिनिधि मोबाइल ऐप पर पंजीकरण कर अपनी भूमि, फसल और आवश्यक उर्वरक की जानकारी पहले से दर्ज कर सकेगा।
इससे मांग का बेहतर आकलन होगा और आवश्यकता के अनुसार समय पर रियायती उर्वरक उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। सरकार का मानना है कि इससे वितरण व्यवस्था अधिक सुव्यवस्थित होगी और अनावश्यक खरीद पर भी नियंत्रण लगेगा।
डीबीटी प्रणाली से करोड़ों किसानों को मिल रहा लाभ
देशभर में उर्वरकों की बिक्री पहले से ही प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) प्रणाली के तहत की जा रही है। इस व्यवस्था में किसानों को आधार आधारित प्रमाणीकरण के बाद सब्सिडी वाले उर्वरक निर्धारित दरों पर उपलब्ध कराए जाते हैं।
सरकार के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान—
- 746.57 लाख मीट्रिक टन रियायती उर्वरकों की बिक्री हुई।
- देशभर के करीब 2.87 लाख सक्रिय खुदरा विक्रेताओं के माध्यम से वितरण किया गया।
- 8.4 करोड़ किसानों को इसका लाभ मिला।
- केंद्र सरकार ने 2.17 लाख करोड़ रुपये की उर्वरक सब्सिडी प्रदान की।
डीबीटी प्रणाली में सब्सिडी वाले उर्वरकों की बिक्री के लिए 100 प्रतिशत आधार प्रमाणीकरण अनिवार्य रखा गया है।
उर्वरक खरीद की तय की गई हैं सीमाएं
सरकार ने उर्वरकों का समान वितरण सुनिश्चित करने के लिए खरीद की अधिकतम सीमा भी निर्धारित की है।
- देश के अधिकांश राज्यों में एक खरीदार प्रति माह अधिकतम 50 बोरी उर्वरक खरीद सकता है।
- तेलंगाना में प्रति एकड़ यूरिया की दो बोरियों की सीमा लागू है।
- जम्मू-कश्मीर में एक किसान को प्रति सीजन 60 बोरी तक खरीदने की अनुमति है।
इन सीमाओं का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जरूरतमंद किसानों तक रियायती उर्वरक समय पर पहुंचे और जमाखोरी या अनियमित खरीद की संभावना कम हो।
पायलट परियोजना की सफलता पर होगा विस्तार
केंद्र सरकार का कहना है कि चयनित जिलों में पायलट परियोजना के अनुभव और परिणामों का मूल्यांकन किया जाएगा। यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो भविष्य में इसे देश के अन्य जिलों और राज्यों में भी चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा सकता है। इससे उर्वरक वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी, डिजिटल और किसान-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।













