लखनऊ (सोमवार, 07 सितंबर 2026)। उत्तर प्रदेश और बिहार के बीच सफर करने वाले यात्रियों के लिए राहत की खबर है। दोनों राज्यों के बीच यूपी-बिहार बस सेवा के विस्तार को लेकर सहमति बनी है। अंतरराज्यीय बस परिवहन को मजबूत करने के लिए 25 बस रूटों का विस्तार किया जाएगा। इसके साथ ही नए मार्गों पर बस सेवाएं शुरू करने को लेकर भी दोनों प्रदेशों ने मंजूरी दी है।
सोमवार को उत्तर प्रदेश और बिहार के परिवहन मंत्रियों तथा वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में अंतरराज्यीय परिवहन व्यवस्था से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक में यात्रियों को बेहतर और सुगम परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने के साथ खास तौर पर दोनों राज्यों के सीमावर्ती क्षेत्रों के बीच संपर्क मजबूत करने पर जोर दिया गया।
यूपी-बिहार बस सेवा के 25 रूटों का होगा विस्तार
बैठक में बिहार की ओर से उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जनपदों के लिए बस सेवाएं संचालित करने का अनुरोध रखा गया। दोनों पक्षों ने इस प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए 25 बस रूटों के विस्तार पर सहमति जताई। नए मार्गों पर सेवाओं के संचालन से दोनों राज्यों के बीच आने-जाने वाले यात्रियों को परिवहन के अतिरिक्त विकल्प मिलेंगे।
बैठक में बिहार के परिवहन मंत्री दामोदर रावत और उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह मौजूद रहे। इनके अलावा उत्तर प्रदेश की अपर मुख्य सचिव परिवहन अर्चना अग्रवाल और परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन ने भी बैठक में हिस्सा लिया। रोडवेज के प्रबंध निदेशक पीएन सिंह तथा बिहार राज्य पथ परिवहन निगम के प्रशासक अतुल कुमार वर्मा भी चर्चा में शामिल रहे।
2016 के अंतरराज्यीय परिवहन करार पर हुई चर्चा
अधिकारियों ने वर्ष 2016 से प्रभावी अंतरराज्यीय परिवहन करार की भी समीक्षा की। यह करार बीते मई में आगे बढ़ाया गया था। बैठक में मौजूदा व्यवस्था के साथ-साथ नए रूटों को शामिल करने और बसों के संचालन को अधिक व्यवस्थित बनाने के विकल्पों पर विचार किया गया।
दोनों राज्यों के बीच बस संचालन में किराए को लेकर एकरूपता लाने पर भी सहमति बनी है। इससे अलग-अलग राज्यों में एक ही मार्ग पर यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए किराए की व्यवस्था को अधिक स्पष्ट और व्यवस्थित किया जा सकेगा।
नए राजमार्गों को देखते हुए मार्गों का होगा परीक्षण
बैठक में यह भी सामने आया कि पिछले कुछ वर्षों में दोनों राज्यों में कई नए राजमार्गों का निर्माण हुआ है। ऐसे में पुराने मार्गों के साथ नए संभावित रूटों की उपयोगिता का परीक्षण किया जाएगा। इसके बाद समतुल्य किलोमीटर के आधार पर दोनों प्रदेशों के बीच समझौता किया जाएगा।
सीमावर्ती जिलों के लिए यह फैसला खास महत्व रखता है। इन इलाकों में रोजगार, व्यापार, शिक्षा और रोजमर्रा के कामकाज के सिलसिले में लोग अक्सर दूसरे राज्य की यात्रा करते हैं। नियमित बस कनेक्टिविटी बढ़ने से ऐसे यात्रियों के लिए आवागमन अपेक्षाकृत आसान हो सकेगा।
बिहार में यूपी रोडवेज बसों के संचालन में नहीं होगी परेशानी
बैठक में बिहार में उत्तर प्रदेश रोडवेज की बसों के संचालन को लेकर भी चर्चा हुई। बिहार की ओर से आश्वासन दिया गया कि यूपी रोडवेज की बस सेवाओं के संचालन में किसी तरह की असुविधा नहीं होने दी जाएगी।
दोनों राज्यों की कोशिश है कि अंतरराज्यीय परिवहन व्यवस्था केवल कुछ प्रमुख शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि सीमावर्ती और अपेक्षाकृत छोटे जिलों के बीच भी बेहतर संपर्क स्थापित हो। 25 रूटों के विस्तार और नए मार्गों पर सेवाओं की शुरुआत से इस दिशा में आगे बढ़ने की उम्मीद है।










