नई दिल्ली/9 अगस्त 2026। देश के स्वतंत्रता संग्राम के निर्णायक अध्यायों में शामिल भारत छोड़ो आंदोलन की 84वीं वर्षगांठ पर रविवार को राष्ट्र ने उन वीरों को याद किया, जिन्होंने अंग्रेजी शासन के खिलाफ निर्णायक संघर्ष में अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आंदोलन में शामिल राष्ट्रनायकों और अमर सेनानियों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनका साहस और संकल्प हर भारतीय को हमेशा प्रेरित करता रहेगा।
प्रधानमंत्री के साथ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने भी अगस्त क्रांति के नायकों के त्याग, संघर्ष और बलिदान को याद किया। नेताओं ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत आज भी देश के लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्रसेवा की भावना को मजबूत करने की प्रेरणा देती है।
भारत छोड़ो आंदोलन की वर्षगांठ पर पीएम मोदी ने किया नमन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने वाले सभी लोगों को याद किया। उन्होंने कहा कि आंदोलन में शामिल लोगों का साहस प्रत्येक भारतीय के लिए हमेशा प्रेरणास्रोत बना रहेगा।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में महात्मा गांधी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘भारत छोड़ो’ का आह्वान स्वतंत्रता संग्राम में नई ऊर्जा लेकर आया था। इस आंदोलन ने औपनिवेशिक शासन से मुक्ति पाने के भारतीयों के दृढ़ और अटूट संकल्प को भी सामने रखा।
गांधी जी के ‘करो या मरो’ के नारे ने जगाया था जोश
भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत अगस्त 1942 में महात्मा गांधी के नेतृत्व में हुई थी। इसे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के सबसे व्यापक जनआंदोलनों में गिना जाता है। गांधी जी के ‘करो या मरो’ के आह्वान ने देशभर में स्वतंत्रता की भावना को और तेज कर दिया था।
आंदोलन के दौरान हजारों लोगों ने गिरफ्तारियां दीं और अनेक स्वतंत्रता सेनानियों ने ब्रिटिश शासन की कठोर कार्रवाई का सामना किया। कई ज्ञात-अज्ञात सेनानियों का बलिदान इस संघर्ष की कहानी का अभिन्न हिस्सा बना।
ओम बिरला ने सेनानियों के त्याग को किया याद
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी भारत छोड़ो आंदोलन की वर्षगांठ पर राष्ट्रनायकों और अमर सेनानियों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि इन सेनानियों ने स्वतंत्र भारत के सपने को साकार करने के लिए अपना सब कुछ समर्पित कर दिया।
बिरला ने महात्मा गांधी के ‘करो या मरो’ के आह्वान को याद करते हुए कहा कि उस समय यह करोड़ों भारतीयों के लिए साहस और संकल्प की आवाज बन गया था।
उन्होंने कहा कि आंदोलन में अनेक ज्ञात-अज्ञात स्वतंत्रता सेनानियों ने जेल की यातनाएं सहीं, संघर्ष किया और देश के लिए अपने प्राण तक न्योछावर कर दिए। उनका संघर्ष केवल राजनीतिक आजादी तक सीमित नहीं था, बल्कि वे ऐसे भारत का सपना देख रहे थे जिसकी नींव सत्य, अहिंसा, लोकतंत्र, समानता और राष्ट्रभक्ति जैसे मूल्यों पर हो।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि स्वतंत्रता के अमृतकाल में इन महान सेनानियों का स्मरण देश को यह संकल्प लेने की प्रेरणा देता है कि राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक आदर्शों को लगातार मजबूत किया जाए।
जेपी नड्डा बोले- स्वतंत्रता संग्राम का निर्णायक अध्याय था अगस्त क्रांति
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने भी अगस्त क्रांति के नायकों को नमन किया। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के नेतृत्व में अगस्त 1942 में शुरू हुआ भारत छोड़ो आंदोलन देश के स्वतंत्रता संग्राम का निर्णायक अध्याय बना।
नड्डा के अनुसार, अगस्त क्रांति ने पूरे देश में नई चेतना का संचार किया और बड़ी संख्या में भारतीयों को स्वतंत्रता के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने की प्रेरणा दी।
उन्होंने आंदोलन के उन गुमनाम योद्धाओं को भी याद किया, जिनके साहस, त्याग और बलिदान ने इस इतिहास को समृद्ध किया। नड्डा ने कहा कि इन सेनानियों की गाथाएं आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा और देशभक्ति के लिए प्रेरित करती रहेंगी।
स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत आज भी प्रासंगिक
भारत छोड़ो आंदोलन की 84वीं वर्षगांठ पर आए इन संदेशों में एक बात समान रही—स्वतंत्रता केवल इतिहास का अध्याय नहीं, बल्कि जिम्मेदारी का भी नाम है। 1942 में उठी आवाज ने ब्रिटिश शासन के सामने भारतीयों के दृढ़ संकल्प को स्पष्ट किया था।
आज जब देश उस दौर के नायकों को याद कर रहा है, तो उनके संघर्ष से जुड़े मूल्य—राष्ट्रहित, लोकतंत्र, समानता और देश के प्रति जिम्मेदारी—फिर चर्चा के केंद्र में हैं। यही वह विरासत है, जिसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने की जरूरत लगातार महसूस की जाती रही है।












