नई दिल्ली/09 अगस्त 2026। भारतीय रेलवे की वित्तीय स्थिति को लेकर सरकार की ओर से अहम जानकारी सामने आई है। रेलवे ने पिछले पांच वित्तीय वर्षों में करीब 1.93 लाख करोड़ रुपये का कर्ज चुकाया है। इसमें लगभग 93 हजार करोड़ रुपये ब्याज और करीब एक लाख करोड़ रुपये मूलधन के रूप में भुगतान किए गए हैं। खास बात यह है कि रेलवे ने बाजार से नया कर्ज लेने पर अपनी निर्भरता भी कम की है।
रेलवे की वित्तीय स्थिति में यह बदलाव ऐसे समय आया है, जब देश में रेल नेटवर्क के विस्तार, नई ट्रेनों के संचालन और यात्रियों की सुविधाओं को बेहतर बनाने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेनों के साथ रेलवे स्टेशनों और बुनियादी ढांचे में भी बदलाव देखने को मिल रहा है।
भारतीय रेलवे ने पांच साल में चुकाया 1.93 लाख करोड़ का कर्ज
राज्यसभा में एक लिखित प्रश्न के जवाब में रेलवे की ओर से बताया गया कि पिछले पांच वित्तीय वर्षों के दौरान करीब 1.93 लाख करोड़ रुपये की देनदारियां चुकाई गईं। इसमें लगभग 93 हजार करोड़ रुपये ब्याज के तौर पर और करीब एक लाख करोड़ रुपये मूलधन के रूप में दिए गए।
यह कर्ज मुख्य रूप से इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन (IRFC) और वित्त मंत्रालय से लिया गया था। कोरोना महामारी के दौरान वित्त मंत्रालय ने रेलवे को करीब 79 हजार करोड़ रुपये का विशेष कर्ज भी उपलब्ध कराया था।
कर्ज का इतना बड़ा हिस्सा चुकाना रेलवे के वित्तीय प्रबंधन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि रेलवे अपनी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए केवल बाजार से मिलने वाले कर्ज पर निर्भर रहने के बजाय सरकारी सहायता और उपलब्ध संसाधनों का अधिक प्रभावी इस्तेमाल कर रहा है।
बजटीय सहायता बढ़ने से बदली रेलवे की तस्वीर
रेल मंत्रालय के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में बाजार से कर्ज लेने पर निर्भरता कम हुई है। इसके पीछे केंद्र सरकार की ओर से रेलवे को दी जा रही पर्याप्त बजटीय सहायता अहम भूमिका निभा रही है।
सरकारी सहायता का इस्तेमाल रेलवे के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और रोलिंग स्टॉक यानी ट्रेनों और अन्य रेल संसाधनों की खरीद में किया जा रहा है। बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के लिए भी सरकारी बजट पर अधिक जोर दिया गया है।
इस बदलाव का एक सीधा फायदा यह है कि रेलवे एक ओर अपनी पुरानी देनदारियां चुकाने में सक्षम हुआ है, तो दूसरी ओर विकास कार्यों के लिए भी धन उपलब्ध रहा है।
डिजिटलाइजेशन और यात्री सुविधाओं पर भी जोर
भारतीय रेलवे में वित्तीय बदलाव के साथ परिचालन और यात्री सेवाओं में भी कई स्तरों पर सुधार किए जा रहे हैं। रेलवे डिजिटल तकनीक को अपनाने के साथ यात्रियों के लिए बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है।
ट्रेनों में जरूरी सुविधाओं का विस्तार किया गया है। नए रूट और ट्रेन सेवाएं शुरू की जा रही हैं, वहीं रेलवे स्टेशनों के विकास पर भी काम हो रहा है। इन बदलावों का असर यात्री संख्या पर भी देखने को मिला है और यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।
कोरोना के झटके के बावजूद कर्ज चुकाने की स्थिति स्थिर
कोरोना महामारी ने रेलवे के संचालन और राजस्व को प्रभावित किया था। इसके बावजूद पिछले कुछ वर्षों में रेलवे की कर्ज चुकाने की स्थिति स्थिर बनी रही। बजटीय सहायता में वृद्धि ने रेलवे को एक साथ दो मोर्चों पर काम करने में मदद की—एक तरफ देनदारियों का भुगतान और दूसरी तरफ इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार।
इस बीच इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन की भूमिका भी व्यापक हुई है। अब यह संस्था रेलवे के अलावा उससे जुड़े अन्य क्षेत्रों को भी वित्तीय सहायता के रूप में कर्ज उपलब्ध करा रही है।
कुल मिलाकर, रेलवे की वित्तीय तस्वीर में आया यह बदलाव केवल कर्ज चुकाने तक सीमित नहीं है। सरकारी बजटीय सहायता, कम होती बाजार निर्भरता और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ता खर्च मिलकर रेलवे को विस्तार के साथ वित्तीय अनुशासन बनाए रखने की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं।












