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आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन को मिलेगी नई ताकत, राजनाथ सिंह ने YIL की मेगा परियोजना का किया भूमि पूजन

On: June 19, 2026
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राजनाथ सिंह ने YIL की मेगा परियोजना का किया भूमि पूजन
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19 जून 2026|नागपुर: को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को नागपुर के अंबाझरी स्थित आयुध कारखाने में यंत्र इंडिया लिमिटेड (YIL) की 10,000 टन क्षमता वाली एल्युमीनियम एक्सट्रूजन प्रेस परियोजना का भूमि पूजन किया। यह परियोजना रक्षा उपकरणों और सैन्य प्रणालियों में इस्तेमाल होने वाले महत्वपूर्ण एल्युमीनियम पुर्जों के घरेलू निर्माण को बढ़ावा देगी और आयात पर निर्भरता कम करने में मददगार साबित होगी।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य के बावजूद पारंपरिक युद्ध और सैन्य साधनों का महत्व समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1947 में जैसे पारंपरिक युद्ध की प्रासंगिकता थी, उसी प्रकार वर्ष 2047 में भी इसकी भूमिका बनी रहेगी।

आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन समय की जरूरत

राजनाथ सिंह ने कहा कि किसी भी युद्ध या वैश्विक संकट के दौरान सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है। ऐसे हालात में वही देश मजबूती से खड़ा रह सकता है जो अपनी रक्षा जरूरतों को स्वयं पूरा करने में सक्षम हो।

उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन केवल आर्थिक आवश्यकता नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा रणनीतिक विषय है। भारत लगातार इस दिशा में आगे बढ़ रहा है और रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर रहा है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि मजबूत सैन्य औद्योगिक आधार भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए अनिवार्य है। आधुनिक युद्ध तकनीकों के विकसित होने के बावजूद सैन्य क्षमता और पारंपरिक हथियार प्रणालियां आने वाले दशकों में भी महत्वपूर्ण बनी रहेंगी।

YIL परियोजना से घटेगी आयात पर निर्भरता

यंत्र इंडिया लिमिटेड की नई एल्युमीनियम एक्सट्रूजन प्रेस परियोजना रक्षा क्षेत्र के लिए उच्च गुणवत्ता वाले एल्युमीनियम उत्पादों का निर्माण करेगी। वर्तमान में ऐसे कई महत्वपूर्ण पुर्जों के लिए विदेशी आपूर्ति पर निर्भरता रहती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना के शुरू होने से देश में रक्षा विनिर्माण श्रृंखला मजबूत होगी, लागत में कमी आएगी और स्वदेशी उत्पादन को नई गति मिलेगी। इससे रक्षा क्षेत्र में तकनीकी क्षमता और उत्पादन दक्षता दोनों बढ़ेंगी।

कॉरपोरेटाइजेशन के बाद बढ़ी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता

राजनाथ सिंह ने वर्ष 2021 में ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों के कॉरपोरेटाइजेशन का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य नई रक्षा कंपनियों को अधिक स्वायत्तता प्रदान करना था ताकि वे नवाचार, अनुसंधान, तकनीकी विकास और निर्यात के क्षेत्र में आगे बढ़ सकें।

उन्होंने कहा कि कॉरपोरेट संरचना अपनाने के बाद रक्षा क्षेत्र की सार्वजनिक इकाइयों को नई ऊर्जा मिली है। यंत्र इंडिया लिमिटेड भी उसी परिवर्तन का सकारात्मक उदाहरण बनकर उभरी है और लगातार अपनी उत्पादन क्षमता का विस्तार कर रही है।

रक्षा उत्पादन और निर्यात में रिकॉर्ड वृद्धि

रक्षा मंत्री ने देश के रक्षा क्षेत्र में हुई प्रगति के आंकड़े भी साझा किए। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में भारत का कुल रक्षा उत्पादन लगभग 46,000 करोड़ रुपये था, जो वित्तीय वर्ष 2025-26 में बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।

वहीं रक्षा निर्यात के क्षेत्र में भी भारत ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 2014 में जहां रक्षा निर्यात करीब 1,000 करोड़ रुपये था, वहीं अब यह बढ़कर लगभग 40,000 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि यह बदलाव दर्शाता है कि भारत अब केवल रक्षा उपकरणों का उपभोक्ता नहीं, बल्कि वैश्विक रक्षा बाजार में एक उभरता हुआ निर्माता और निर्यातक भी बन रहा है।

आत्मनिर्भर भारत अभियान को मिलेगा बल

नागपुर में शुरू की गई यह नई परियोजना आत्मनिर्भर भारत अभियान और मेक इन इंडिया पहल को और मजबूती देगी। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार स्वदेशी उत्पादन क्षमता बढ़ने से भारत की रणनीतिक स्वतंत्रता मजबूत होगी और राष्ट्रीय सुरक्षा को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।

रक्षा मंत्री ने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में भारत रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में दुनिया के प्रमुख देशों में अपनी मजबूत पहचान स्थापित करेगा।

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