अयोध्या, 09 नवंबर 2025 (रविवार): रामनगरी अयोध्या में श्रीराम मंदिर के ऐतिहासिक ध्वजारोहण समारोह की तैयारियाँ अब अंतिम चरण में हैं। 25 नवंबर को होने वाले इस भव्य कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल होने की संभावना है। इसके मद्देनज़र रविवार को रक्षा मंत्रालय की विशेषज्ञ टीम ने पूरा स्थल घूमकर सुरक्षा और तकनीकी व्यवस्थाओं का गहराई से निरीक्षण किया। कार्यक्रम स्थल की समीक्षा के दौरान हर उस पहलू पर विशेष ध्यान दिया गया जो प्रधानमंत्री की मौजूदगी में सुरक्षा, तकनीक और व्यवस्था से जुड़ा हो।
📍 तैयारी में कोई कमी नहीं – मंत्रणा और निरीक्षण जारी
रक्षा मंत्रालय से पहुंचे विशेषज्ञों ने श्रीराम जन्मभूमि परिसर में मंच, सुरक्षा घेरा, बिजली आपूर्ति और स्वचालित ध्वजारोहण प्रणाली सहित कई तकनीकी बिंदुओं पर जानकारी इकट्ठा की। “स्वचालित ध्वजारोहण” (Automatic Flag Hoisting) प्रणाली विशेष फोकस में रही क्योंकि 191 फीट ऊंचे शिखर पर ध्वज फहराया जाना है, जहाँ हर छोटी-बड़ी तकनीकी त्रुटि भी जोखिम पैदा कर सकती है।
इस बीच, श्रीराम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र भी स्थल पर मौजूद रहे और अधिकारियों व ट्रस्ट सदस्यों के साथ समीक्षा बैठक की। उन्होंने निर्देश दिया कि यह कार्यक्रम श्रद्धा और आधुनिक तकनीक का अनूठा संगम होगा, इसलिए समस्त व्यवस्थाएँ पूरी तरह त्रुटिरहित होनी चाहिए।
🏛 मंदिर परिसर का निरीक्षण, बड़े अधिकारियों की मौजूदगी
निरीक्षण में चंपत राय, महासचिव, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट, एसपी बलरामाचारी दुबे, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र, निर्माण प्रभारी गोपाल राव और मंदिर आर्किटेक्ट आशीष सोमपुरा सहित कई शीर्ष अधिकारी उपस्थित रहे। उन्होंने पीएम मोदी के प्रवेश मार्ग की भी समीक्षा की और सुनिश्चित किया कि सुरक्षा व्यवस्था के हर स्तर पर कोई कमी न रहे।
सूत्रों के मुताबिक—
“अगले एक सप्ताह में सारे तकनीकी परीक्षण पूरे कर लिए जाएंगे। उसके बाद ध्वजारोहण समारोह के रिहर्सल शुरू होंगे।”
🎨 राम कथा के म्यूरल – अंतिम सज्जा की ओर
राम मंदिर परिसर में बने विशाल परकोटा (प्राचीर) में लगे रामकथा के म्यूरल भी चर्चा का विषय रहे। लगभग 800 मीटर लंबे इस परकोटे में कुल 87 म्यूरल लगाए जाने हैं, जिनमें से 70 से अधिक लग चुके हैं। ये म्यूरल राम जन्म से लेकर राम राज्याभिषेक तक की भावपूर्ण झलक प्रस्तुत करते हैं। वंशीपहाड़पुर के लाल पत्थरों पर उकेरी ये कहानियाँ भक्तों को रामायण के युग में ले जाने का अहसास कराएंगी।







