बिजनेस डेस्क/25 अक्टूबर 2026: प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए हायर पेंशन से जुड़ा एक अहम कानूनी फैसला सामने आया है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी योग्य कर्मचारी की हायर पेंशन की अर्जी केवल इस आधार पर खारिज नहीं की जा सकती कि कंपनी के प्रोविडेंट फंड (PF) ट्रस्ट के नियमों में योगदान की सीमा तय है या ज्यादा पेंशन के लिए जॉइंट ऑप्शन का स्पष्ट प्रावधान नहीं है। अदालत ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) को संबंधित कर्मचारियों के आवेदन आठ सप्ताह के भीतर प्रोसेस कर मंजूर करने का निर्देश दिया है।
19 अक्टूबर 2026 को जस्टिस संदीप वी. मरने ने यह फैसला सुनाया। इससे उन कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनके हायर पेंशन के दावे कंपनी के PF ट्रस्ट के आंतरिक नियमों का हवाला देकर खारिज कर दिए गए थे। हालांकि, इस फैसले का अर्थ यह नहीं है कि हर EPFO सदस्य को अपने आप ज्यादा पेंशन मिलने लगेगी।
Higher Pension पर बॉम्बे हाईकोर्ट का क्या है फैसला?
यह मामला 40 से अधिक कर्मचारियों की याचिकाओं से जुड़ा था। इनमें Abbott India, Tata Communications, Raymond Steel और BEST Undertaking जैसे प्रतिष्ठानों के कर्मचारी शामिल थे।
कर्मचारियों ने EPFO के उन आदेशों को चुनौती दी थी, जिनमें ज्यादा वेतन के आधार पर पेंशन पाने के उनके जॉइंट ऑप्शन आवेदन अस्वीकार कर दिए गए थे। विवाद का मुख्य मुद्दा यह था कि क्या छूट प्राप्त प्रतिष्ठान के PF ट्रस्ट के आंतरिक नियम कर्मचारी को कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के तहत हायर पेंशन का विकल्प चुनने से रोक सकते हैं।
अदालत ने संबंधित EPFO आदेशों को रद्द करते हुए आवेदनों को आठ सप्ताह के भीतर प्रोसेस कर मंजूर करने का निर्देश दिया। यह राहत मामले में याचिकाकर्ता कर्मचारियों के लिए है; इसे सभी कर्मचारियों के आवेदनों की स्वतः मंजूरी नहीं माना जाना चाहिए।
PF ट्रस्ट के नियमों का हवाला देकर क्यों खारिज हुए थे आवेदन?
कुछ प्रतिष्ठान EPFO से छूट प्राप्त होने के कारण अपना PF ट्रस्ट संचालित करते हैं। ऐसे ट्रस्ट के नियमों में कर्मचारियों और नियोक्ताओं के योगदान की सीमा निर्धारित हो सकती है।
कुछ मामलों में EPFO ने इन्हीं आंतरिक नियमों का हवाला देते हुए हायर पेंशन के लिए दिए गए जॉइंट ऑप्शन आवेदन खारिज कर दिए थे। दस्तावेजों की कमी और वेतन के विभिन्न हिस्सों पर किए गए योगदान की जांच जैसे मुद्दे भी सामने आए।
कर्मचारियों का तर्क था कि कंपनी के PF ट्रस्ट के नियमों के आधार पर EPS के तहत उपलब्ध वैधानिक विकल्प को समाप्त नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने इस कानूनी सवाल पर कर्मचारियों को राहत दी और स्पष्ट किया कि केवल ट्रस्ट के नियमों में सीमा होने या जॉइंट ऑप्शन का स्पष्ट प्रावधान न होने के कारण आवेदन अस्वीकार करना उचित नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी किया गया उल्लेख
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के EPFO बनाम सुनील कुमार बी. फैसले पर भी विचार किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने 2022 में EPS-95 के 2014 के संशोधनों को बरकरार रखा था और हायर पेंशन के विकल्प से संबंधित पात्रता एवं शर्तों पर विचार किया था।
बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले में यह भी महत्वपूर्ण है कि पुराने दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में संबंधित तथ्यों की जांच के वैकल्पिक तरीकों पर विचार किया जा सकता है। जहां आवश्यक हो, कर्मचारियों को अपना पक्ष रखने का अवसर भी दिया जाना चाहिए।
इसका व्यावहारिक अर्थ यह है कि दस्तावेजों की कमी या ट्रस्ट के आंतरिक नियमों को हर मामले में स्वतः अस्वीकृति का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। हालांकि, वास्तविक पात्रता और योगदान से जुड़े तथ्यों की जांच फिर भी जरूरी रहेगी।
EPF और EPS में क्या है अंतर?
हायर पेंशन को समझने के लिए EPF और EPS के बीच अंतर जानना जरूरी है।
- EPF (Employees’ Provident Fund): यह कर्मचारी की सेवानिवृत्ति के लिए बचत की व्यवस्था है, जिसमें कर्मचारी और नियोक्ता नियमानुसार योगदान करते हैं।
- EPS (Employees’ Pension Scheme): यह पात्र सदस्यों के लिए पेंशन संबंधी योजना है। नियोक्ता के योगदान का निर्धारित हिस्सा इसके अंतर्गत जाता है।
- जॉइंट ऑप्शन: पात्र कर्मचारी और नियोक्ता की ओर से दिया जाने वाला विकल्प, जिसके तहत लागू शर्तें पूरी होने पर वास्तविक या अधिक वेतन के आधार पर पेंशन के दावे पर विचार किया जा सकता है।
हायर पेंशन का वास्तविक लाभ संबंधित कर्मचारी की पात्रता, पेंशन योग्य सेवा, वेतन और लागू नियमों पर निर्भर करता है।
EPFO की वेतन सीमा ₹15,000 से बढ़कर ₹25,000 हुई
PF से जुड़ी एक अन्य महत्वपूर्ण जानकारी भी कर्मचारियों को समझनी चाहिए। केंद्र सरकार ने सितंबर 2026 में EPFO के अनिवार्य कवरेज के लिए निर्धारित वेतन सीमा ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह कर दी। यह बदलाव 17 सितंबर 2026 से प्रभावी हुआ।
इस बदलाव से निर्धारित शर्तें पूरी करने वाले अधिक कर्मचारियों को EPF और संबंधित सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के दायरे में लाने का रास्ता खुला है। सरकार के अनुसार, इससे 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
लेकिन यहां एक अंतर समझना जरूरी है। EPFO की अनिवार्य सदस्यता के लिए वेतन सीमा बढ़ना और पहले से सदस्य कर्मचारियों को हायर पेंशन मिलना दो अलग-अलग विषय हैं। ₹25,000 की नई सीमा से प्रत्येक कर्मचारी को अपने आप हायर पेंशन का अधिकार नहीं मिल जाता। हायर पेंशन के लिए संबंधित योजना की पात्रता और अन्य शर्तें लागू रहेंगी।
प्राइवेट कर्मचारियों पर क्या होगा फैसले का असर?
बॉम्बे हाईकोर्ट के इस फैसले से उन कर्मचारियों को राहत मिल सकती है, जिनके हायर पेंशन के आवेदन केवल कंपनी के PF ट्रस्ट के नियमों का हवाला देकर खारिज किए गए थे।
इससे EPFO के लिए ऐसे मामलों पर विचार करते समय वैधानिक योजना और ट्रस्ट के आंतरिक नियमों के बीच अंतर को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण होगा। कर्मचारियों के लिए भी अपने पुराने वेतन रिकॉर्ड, PF योगदान के दस्तावेज और पेंशन संबंधी आवेदन सुरक्षित रखना उपयोगी रहेगा।
ध्यान दें: यह फैसला संबंधित याचिकाकर्ताओं के मामलों में दिया गया है। हायर पेंशन पाने के लिए प्रत्येक कर्मचारी को लागू पात्रता और योगदान संबंधी शर्तें पूरी करनी होंगी। व्यक्तिगत मामले में आवेदन की स्थिति जानने के लिए EPFO के संबंधित कार्यालय या योग्य कानूनी सलाहकार से संपर्क करना उचित रहेगा।













