नई दिल्ली/13 सितंबर 2026: 18वें BRICS सम्मेलन 2026 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का तीन दिनों का कार्यक्रम बेहद व्यस्त रहा। शिखर सम्मेलन के इतर उन्होंने अलग-अलग देशों के राष्ट्राध्यक्षों और सरकार प्रमुखों के साथ 15 द्विपक्षीय बैठकें कीं। इन मुलाकातों में रूस, चीन और ईरान से लेकर अफ्रीका, दक्षिण-पूर्व एशिया, खाड़ी क्षेत्र और मध्य एशिया तक के देशों के साथ संबंधों पर चर्चा हुई।
इन बैठकों के अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के प्रमुखों और अन्य देशों के नेताओं के साथ भी अलग-अलग बातचीत की। बातचीत का दायरा भी व्यापक रहा। द्विपक्षीय रिश्तों के साथ व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी, ऊर्जा, रक्षा, सप्लाई चेन, क्रिटिकल मिनरल्स और विभिन्न क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दे चर्चा के केंद्र में रहे।
भारत के लिए यह कूटनीतिक गतिविधि इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता भारत के पास थी। ऐसे समय में जब सदस्य देशों की रणनीतिक प्राथमिकताएं कई मुद्दों पर अलग-अलग हैं, नई दिल्ली ने सामूहिक मंच के साथ-साथ द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूत करने का भी अवसर साधा।
BRICS सम्मेलन 2026 के पहले दिन पुतिन, पेजेशकियन और UN महासचिव से मुलाकात
11 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ अलग-अलग बैठकें कीं। रूस के राष्ट्रपति के साथ बातचीत में दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा की गई।
चर्चा में रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, बुनियादी ढांचा, तकनीक, क्रिटिकल मिनरल्स और नागरिक परमाणु ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल रहे। इसके साथ रूस-यूक्रेन संघर्ष, पश्चिम एशिया की स्थिति और समुद्री व्यापार पर पड़ रहे असर पर भी विचार-विमर्श हुआ। भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा भी बातचीत का हिस्सा रहा।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ बैठक में भारत-ईरान संबंधों के अलावा ब्रिक्स सहयोग और पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए बातचीत तथा कूटनीति को आगे बढ़ाने के भारत के रुख को दोहराया।
इसी दिन प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से भी मुलाकात की। इससे उनकी ब्रिक्स से जुड़ी द्विपक्षीय कूटनीति के साथ बहुपक्षीय स्तर पर भी सक्रियता सामने आई।
दूसरे दिन शी चिनफिंग के साथ बैठक रही सबसे अहम
12 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग समेत कई नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं। इनमें इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम और संयुक्त अरब अमीरात के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान शामिल रहे। वियतनाम के नेतृत्व के साथ भी बातचीत हुई।
हालांकि, इस दिन सबसे अधिक ध्यान प्रधानमंत्री मोदी और शी चिनफिंग की बैठक पर रहा। दोनों नेताओं ने भारत-चीन संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। सीमा से जुड़े मुद्दे, सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता, आर्थिक एवं व्यापारिक संबंध, सप्लाई चेन और दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क जैसे विषय बैठक में उठे।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान इस बात पर जोर दिया कि मतभेदों को विवाद में बदलने की स्थिति नहीं आनी चाहिए। उन्होंने आपसी सम्मान, संवेदनशीलता और साझा हितों को द्विपक्षीय रिश्तों का मार्गदर्शक बनाने की जरूरत बताई।
मलेशिया और UAE के साथ भी अहम बातचीत
मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ बातचीत में व्यापार और निवेश के साथ रक्षा, सेमीकंडक्टर, बुनियादी ढांचे, डिजिटल अर्थव्यवस्था, ऊर्जा और फिनटेक जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा हुई।
इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली के साथ बैठक में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने और अफ्रीका के साथ भारत की साझेदारी को आगे बढ़ाने पर जोर रहा।
वहीं, UAE के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-UAE रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा की। रक्षा, तकनीक, ऊर्जा, क्रिटिकल मिनरल्स और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में सहयोग चर्चा के प्रमुख विषय रहे।
तीसरे दिन अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया पर रहा जोर
13 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी ने दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा, कजाखस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट तोकायेव, फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड आर. मार्कोस जूनियर, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सीसी और बुरुंडी के राष्ट्रपति एवरिस्टे नदायिशिमिये के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं।
इसके अलावा युगांडा और नाइजीरिया के नेतृत्व के साथ भी उनकी बैठकें हुईं। इन मुलाकातों में भारत ने अफ्रीका, मध्य एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ अपने संबंधों को और मजबूत करने पर ध्यान दिया।
दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा के साथ बातचीत का महत्व ब्रिक्स के संदर्भ में भी खास रहा। दक्षिण अफ्रीका समूह के शुरुआती सदस्यों में शामिल है और ग्लोबल साउथ से जुड़े मुद्दों पर भारत का महत्वपूर्ण साझेदार माना जाता है।
मिस्र और बुरुंडी के साथ हुई बैठकों ने अफ्रीकी देशों के साथ भारत के बढ़ते जुड़ाव को आगे बढ़ाया। वहीं कजाखस्तान के साथ बातचीत ने मध्य एशिया में भारत की कूटनीतिक पहुंच को मजबूत करने का अवसर दिया।
फिलीपींस और मलेशिया के साथ बातचीत के जरिए दक्षिण-पूर्व एशिया भी प्रधानमंत्री के कूटनीतिक एजेंडे में प्रमुखता से दिखाई दिया।
फॉर्मल एजेंडे से आगे बढ़कर हुईं कई अनौपचारिक मुलाकातें
प्रधानमंत्री मोदी की 15 औपचारिक द्विपक्षीय बैठकों के अलावा दूसरे देशों के नेताओं और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ कई छोटी और अनौपचारिक बातचीत भी हुईं। इससे संकेत मिलता है कि भारत ने अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता को केवल बहुपक्षीय बैठकों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसका इस्तेमाल अलग-अलग देशों के साथ संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए भी किया।
एक ओर ब्रिक्स के विस्तारित समूह के बीच सामूहिक मुद्दों पर चर्चा हुई, तो दूसरी ओर द्विपक्षीय बैठकों ने प्रधानमंत्री मोदी को अलग-अलग देशों की विशिष्ट प्राथमिकताओं पर सीधे बातचीत का अवसर दिया।
यह कूटनीतिक सक्रियता ऐसे समय में हुई जब दुनिया कई मोर्चों पर अस्थिरता का सामना कर रही है। पश्चिम एशिया और यूक्रेन के संघर्षों का असर ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार और वैश्विक सप्लाई चेन तक दिखाई दे रहा है।
ऐसे माहौल में BRICS सम्मेलन 2026 के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की 15 द्विपक्षीय बैठकें महज मुलाकातों की संख्या नहीं हैं। इनके जरिए भारत ने अपनी रणनीतिक साझेदारियों, आर्थिक हितों और वैश्विक कूटनीतिक प्राथमिकताओं को एक ही मंच के समानांतर आगे बढ़ाने की कोशिश की। यही इस तीन दिवसीय शिखर सम्मेलन की कूटनीतिक तस्वीर का एक अहम पहलू रहा।













