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एक तरफ पुतिन, दूसरी तरफ चिनफिंग और बीच में पीएम मोदी… BRICS समिट के दूसरे दिन सामने आई फैमिली फोटो

On: September 13, 2026
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BRICS समिट के दूसरे दिन सामने आई फैमिली फोटो
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नई दिल्ली/13 सितंबर 2026: नई दिल्ली में आयोजित BRICS समिट 2026 के दूसरे दिन दुनिया की नजरें एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत समूह के प्रमुख नेताओं पर टिक गईं। शिखर सम्मेलन के दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक साथ नजर आए। इसके बाद सामने आई नेताओं की ‘फैमिली फोटो’ ने भी खासा ध्यान खींचा।

तस्वीर में प्रधानमंत्री मोदी बीच में दिखाई दिए, जबकि उनके आसपास रूस, चीन और अन्य सदस्य देशों के नेता मौजूद रहे। कूटनीतिक लिहाज से यह तस्वीर इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में कई मुद्दों पर प्रमुख देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं।

BRICS समिट 2026 में मध्य पूर्व की स्थिति पर बनी सहमति

BRICS समिट 2026 के दौरान भारत, रूस, चीन और ईरान समेत 11 सदस्य देशों ने शनिवार को नई दिल्ली में संयुक्त बयान जारी किया। इसमें मध्य पूर्व यानी पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर चिंता जताते हुए शांति और संयम की अपील की गई।

संयुक्त बयान में सदस्य देशों ने कहा कि पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ रहा तनाव गंभीर चिंता का विषय है। नेताओं ने सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने और ऐसी किसी भी कार्रवाई से बचने का आह्वान किया, जिससे हालात और अधिक बिगड़ सकते हैं।

यह सहमति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहले ब्रिक्स के भीतर पश्चिम एशिया के संकट को लेकर एक राय बनाना आसान नहीं रहा था।

शी चिनफिंग ने युद्ध को लेकर क्या कहा?

नई दिल्ली में आयोजित बैठक में चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने भी मध्य पूर्व की स्थिति पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में जारी युद्ध अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साझा हितों के अनुरूप नहीं है।

चीन के रुख को रूस, ईरान, भारत और अन्य सदस्य देशों की मौजूदगी के बीच सामने आना ब्रिक्स के भीतर पश्चिम एशिया के मुद्दे की बढ़ती अहमियत को दर्शाता है। बैठक में शांति और तनाव कम करने की जरूरत पर जोर दिया गया।

भारत की कूटनीति के सामने बड़ी चुनौती थी

नई दिल्ली घोषणापत्र को सर्वसम्मति से स्वीकार कराना भारत के लिए कूटनीतिक रूप से एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है। दरअसल, मई में नई दिल्ली में हुई ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में साझा बयान पर सहमति नहीं बन सकी थी।

पश्चिम एशिया में संघर्ष को लेकर ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के बीच अलग-अलग चिंताएं और प्राथमिकताएं थीं। ऐसे माहौल में सभी सदस्य देशों को एक साझा भाषा पर लाना मेजबान भारत के लिए आसान काम नहीं था।

शनिवार को नेताओं की सहमति के बाद तस्वीर बदली और संयुक्त बयान सामने आया। यही वजह है कि सम्मेलन के दूसरे दिन की कूटनीतिक गतिविधियों को भारत की सक्रिय भूमिका के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।

पीएम मोदी ने की नई दिल्ली घोषणापत्र 2026 अपनाने की घोषणा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन में नई दिल्ली घोषणापत्र 2026 को सर्वसम्मति से अपनाए जाने की घोषणा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी सदस्य देश ने दस्तावेज पर आपत्ति नहीं जताई।

घोषणापत्र में वैश्विक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी सदस्य देशों ने अपना रुख दर्ज कराया। आतंकवाद के सभी रूपों और गतिविधियों की कड़ी निंदा की गई। इसमें सीमा-पार आतंकवादी गतिविधियां, आतंकवाद के लिए धन जुटाने वाले नेटवर्क और आतंकवादियों के सुरक्षित ठिकानों का मुद्दा भी शामिल है।

दस्तावेज में सदस्य देशों ने आतंकवाद से निपटने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए आतंकवादियों की सीमा-पार आवाजाही, आतंकवाद की फंडिंग और सुरक्षित ठिकानों के खिलाफ कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया।

ब्रिक्स की फैमिली फोटो भले ही कुछ सेकंड के कैमरा फ्रेम का हिस्सा हो, लेकिन उसके पीछे की कूटनीति कहीं ज्यादा लंबी कहानी कहती है। एक ही मंच पर भारत, रूस और चीन जैसे प्रभावशाली देशों के नेताओं की मौजूदगी और पश्चिम एशिया जैसे संवेदनशील मुद्दे पर साझा बयान इस सम्मेलन के महत्व को रेखांकित करता है।

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