नई दिल्ली (Mon, 11 May 2026)। राजधानी दिल्ली में आयोजित CII बिजनेस समिट 2026 के मंच से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के आर्थिक बदलाव, कानून व्यवस्था और औद्योगिक विकास को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों की नीतियों से बने “पाप के गड्ढों” को भरने में वर्षों लग गए, लेकिन अब समय उत्तर प्रदेश को बुलेट ट्रेन की रफ्तार से आगे बढ़ाने का है।
मुख्यमंत्री ने उद्योगपतियों, निवेशकों और कारोबारी जगत के प्रतिनिधियों के सामने उत्तर प्रदेश की बदलती तस्वीर पेश करते हुए कहा कि किसी भी राष्ट्र की आर्थिक ताकत उसकी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और उद्यमिता पर निर्भर करती है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो देश अपने उद्यमियों की उपेक्षा करता है, वह वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिक नहीं सकता।
‘शक्ति होगी तभी दुनिया गंभीरता से लेगी’
सीआइआइ की वार्षिक बिजनेस समिट में बोलते हुए योगी आदित्यनाथ ने ऐतिहासिक संदर्भों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 11 मई भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण दिन है। इसी दिन 75 वर्ष पहले सोमनाथ मंदिर की पुनर्प्रतिष्ठा हुई थी और इसी तारीख को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने पोखरण परमाणु परीक्षण के जरिए दुनिया को भारत की शक्ति का एहसास कराया था।
मुख्यमंत्री ने कहा, “जिसके पास शक्ति होगी वही करुणा और मैत्री का मार्ग भी प्रशस्त कर पाएगा। केवल हाथ फैलाने और गिड़गिड़ाने से दुनिया हमें गंभीरता से नहीं लेती।”
उनके इस बयान को आर्थिक आत्मनिर्भरता और मजबूत राष्ट्रीय नीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
‘कभी यूपी की पहचान दंगों और माफिया राज से होती थी’
अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री योगी ने उत्तर प्रदेश के पुराने दौर को भी याद किया। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब उत्तर प्रदेश अपनी पहचान के संकट से गुजर रहा था। प्रदेश का नाम सुनते ही लोग दूरी बनाने लगते थे। कानून व्यवस्था इतनी खराब थी कि हर साल 300 से ज्यादा दंगे होते थे और कारोबारी राज्य छोड़ने को मजबूर हो जाते थे।
उन्होंने कहा कि यूपी की पहचान दंगे, माफिया राज, गुंडा टैक्स और पलायन तक सीमित हो चुकी थी। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने कानून व्यवस्था पर सख्त कार्रवाई कर माहौल बदला है।
योगी आदित्यनाथ ने एक पुराना अनुभव साझा करते हुए कहा कि जब वह पहली बार सांसद बने थे और गोरखपुर के बंद पड़े खाद कारखाने को शुरू कराने के लिए केंद्र सरकार के एक मंत्री से मिले, तो उनसे पूछा गया था कि “यूपी से चुनाव जीतकर आए हैं, कितने लोगों का मर्डर हुआ था?” मुख्यमंत्री ने कहा कि यह उस समय उत्तर प्रदेश की राष्ट्रीय छवि थी।
‘मैं मठ चलाता था, वही अनुभव प्रदेश चलाने में काम आया’
मुख्यमंत्री ने अपने शुरुआती प्रशासनिक अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि 2017 में जब प्रधानमंत्री ने उन्हें उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी दी, तब उनके पास शासन चलाने का कोई बड़ा प्रशासनिक अनुभव नहीं था। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “मैं तो मठ चलाता था, लेकिन मठ प्रबंधन का अनुभव प्रदेश चलाने में बहुत काम आया।”
उन्होंने प्रयागराज का उदाहरण देते हुए कहा कि एक दौर ऐसा भी था जब एक माफिया ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के काफिले तक को रुकवा दिया था। योगी ने कहा कि आज वही उत्तर प्रदेश कानून व्यवस्था, एक्सप्रेसवे नेटवर्क और निवेश के लिए देशभर में नई पहचान बना रहा है।
निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार का फोकस
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने बड़े निवेश आकर्षित करने के लिए विशाल लैंड बैंक तैयार किया है। उद्योगों के लिए पारदर्शी नीतियां बनाई गई हैं और निवेशकों को तेज़ी से अनुमति देने की व्यवस्था विकसित की गई है।
उन्होंने कहा कि 2018 में शुरू की गई एक जिला एक उत्पाद (ODOP) योजना ने प्रदेश के स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने का काम किया है। साथ ही पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे और जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट जैसी परियोजनाएं उत्तर प्रदेश को नई आर्थिक ऊंचाई देने में अहम भूमिका निभाएंगी।
उद्योगपतियों ने की ‘योगी मॉडल’ की सराहना
समिट में शामिल उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भी उत्तर प्रदेश में हुए बदलावों की खुलकर सराहना की। सीआइआइ के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि बीते वर्षों में उत्तर प्रदेश ने भारत की आर्थिक प्रगति में अहम योगदान दिया है।
वहीं, सीआइआइ के अध्यक्ष राजीव मेमानी ने कहा कि अब देश और विदेश के निवेशकों का भरोसा उत्तर प्रदेश पर बढ़ा है। उन्होंने राज्य की कानून व्यवस्था, प्रशासनिक कार्यशैली और तेज़ इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को निवेश के लिए सकारात्मक संकेत बताया।









