लखनऊ (Wed, 13 May 2026)। वैश्विक स्तर पर बढ़ती ऊर्जा चुनौतियों और ईंधन संरक्षण की जरूरत के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को बड़ा संदेश दिया। लोक भवन में आयोजित विस्तारित मंत्रिमंडल की पहली बैठक में मुख्यमंत्री ने मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों से मितव्ययिता अपनाने, ईंधन बचाने और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने साफ कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में ईंधन संरक्षण केवल आर्थिक जरूरत नहीं, बल्कि राष्ट्रीय दायित्व बन चुका है।
मुख्यमंत्री ने मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों से सप्ताह में कम से कम एक दिन मेट्रो, बस, ई-रिक्शा, कारपूलिंग या साइकिल जैसे सार्वजनिक परिवहन साधनों का उपयोग करने का आग्रह किया। उनका मानना है कि जब सरकार के मंत्री स्वयं उदाहरण पेश करेंगे, तभी समाज में सकारात्मक संदेश जाएगा और आम लोग भी इससे प्रेरित होंगे।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने मंत्रियों से अपनी वाहन फ्लीट में 50 प्रतिशत तक कटौती करने की अपील भी की। साथ ही अगले छह महीनों तक अपरिहार्य परिस्थितियों को छोड़कर विदेश यात्राओं से बचने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार इसे संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग और प्रशासनिक अनुशासन की दिशा में अहम कदम मान रही है।
शासन में मितव्ययिता और ऊर्जा बचत पर जोर
बीते सप्ताह हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद आयोजित इस पहली विस्तारित बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली को अधिक जवाबदेह और संसाधन-संवेदनशील बनाने पर विशेष बल दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने की अपील का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार को इस दिशा में आदर्श प्रस्तुत करना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अंतरजनपदीय बैठकों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और विधानसभा-विधान परिषद की स्थायी समितियों की बैठकों को यथासंभव हाइब्रिड मोड में आयोजित किया जाए। उनका कहना था कि डिजिटल और वर्चुअल माध्यमों का अधिक उपयोग करके ईंधन और संसाधनों दोनों की बचत की जा सकती है।
एसी, लिफ्ट और बिजली उपयोग पर भी निर्देश
ऊर्जा संरक्षण को लेकर मुख्यमंत्री ने सचिवालय और निदेशालय स्तर पर एयर कंडीशनर और लिफ्ट के जरूरत आधारित उपयोग पर भी जोर दिया। उन्होंने एसी का तापमान 24 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच रखने और प्राकृतिक रोशनी के अधिकतम उपयोग को बढ़ावा देने के निर्देश दिए।
इसके अलावा 50 से अधिक कर्मचारियों वाले संस्थानों में सप्ताह में कम से कम दो दिन ‘वर्क फ्रॉम होम’ व्यवस्था लागू करने की बात कही गई। मुख्यमंत्री का मानना है कि इससे ट्रैफिक दबाव कम होगा और ईंधन की बचत भी होगी।
इलेक्ट्रिक वाहन और सौर ऊर्जा को मिलेगा बढ़ावा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश को ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण संतुलन दोनों मोर्चों पर आगे बढ़ना होगा। उन्होंने सौर ऊर्जा के व्यापक उपयोग और जनजागरूकता अभियानों को स्कूलों, कॉलेजों और रिहायशी कॉलोनियों तक पहुंचाने के निर्देश दिए।
इसके साथ ही इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए नई नीति तैयार करने की जरूरत पर भी बल दिया गया। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि भविष्य की परिवहन व्यवस्था स्वच्छ, टिकाऊ और ऊर्जा-कुशल होनी चाहिए।
‘वोकल फॉर लोकल’ और घरेलू आयोजनों पर जोर
बैठक में मुख्यमंत्री ने सामाजिक आयोजनों में भी सादगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने कहा कि शादी-विवाह और अन्य समारोहों के लिए घरेलू स्थलों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए ताकि अनावश्यक खर्च कम हो और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिले।
‘वोकल फॉर लोकल’ का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने मंत्रियों से कहा कि उपहार स्वरूप उन्हीं वस्तुओं का उपयोग करें जिनका निर्माण उत्तर प्रदेश में होता है। उन्होंने ‘एक जिला-एक उत्पाद’ योजना के तहत तैयार स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देने की अपील की।
मुख्यमंत्री ने एलपीजी की जगह पीएनजी कनेक्शन को बढ़ावा देने, खाद्य तेल की खपत कम करने, प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने और वर्षा जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया। साथ ही उन्होंने सोने के अनावश्यक आयात को हतोत्साहित करने की अपील की।
बैठक के अंत में मुख्यमंत्री ने नए मंत्रियों को अनुभवी मंत्रियों से सीखने और बेहतर कार्यशैली विकसित करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि संसाधनों का जिम्मेदारी से उपयोग करते हुए जनता के लिए बेहतर उदाहरण पेश करना भी है।








