नई दिल्ली/23 जून 2026: देश को दलहन और तिलहन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब सरकार ऐसी व्यवस्था तैयार कर रही है, जिसमें दलहन की खरीद व्यापारियों या बिचौलियों के जरिए नहीं बल्कि सीधे किसानों से की जाएगी। सरकार का मानना है कि यदि किसानों को उनकी उपज का उचित और लाभकारी मूल्य सीधे मिलेगा, तो वे दलहन और तिलहन की खेती बढ़ाने के लिए अधिक उत्साहित होंगे।
इसी लक्ष्य को आगे बढ़ाते हुए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को नाफेड के नए ई-ऑक्शन पोर्टल ‘नाफेक्स डॉट इन’ का शुभारंभ किया। इसके साथ ही ‘दृष्टि’, ईआरपी (Enterprise Resource Planning) और ‘नाफेड कल्याण’ जैसी कई नई डिजिटल पहलें भी शुरू की गईं, जिनका उद्देश्य खरीद, भंडारण, नीलामी और भुगतान प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना है।
किसानों से सीधे होगी दलहन खरीद, खत्म होगी बिचौलियों की भूमिका
अमित शाह ने कहा कि अगले दो वर्षों के भीतर ऐसी व्यवस्था विकसित कर दी जाएगी, जिसमें राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नाफेड) और राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ (एनसीसीएफ) सीधे किसानों से दलहन खरीदेंगे।
उन्होंने कहा कि खरीद प्रक्रिया में बिचौलियों की भूमिका कम होने से किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का पूरा लाभ मिलेगा। साथ ही भुगतान सीधे किसानों के बैंक खातों में पहुंचाया जाएगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और किसानों का भरोसा मजबूत होगा।
दलहन-तिलहन में आत्मनिर्भरता अभी भी बड़ी चुनौती
हालांकि पिछले कुछ वर्षों में देश में दलहन और तिलहन उत्पादन में वृद्धि हुई है, लेकिन आत्मनिर्भरता का लक्ष्य अभी पूरी तरह हासिल नहीं हो सका है। विशेषज्ञों के अनुसार इसका एक बड़ा कारण यह है कि खरीद प्रणाली का पूरा लाभ किसानों तक नहीं पहुंच पाता।
कई बार किसानों को उचित मूल्य नहीं मिलने के कारण वे दलहन और तिलहन की खेती से दूरी बनाने लगते हैं। यही वजह है कि भारत को आज भी हर साल लगभग 60 से 70 लाख टन दलहन और करीब 1.6 करोड़ टन खाद्य तेलों का आयात करना पड़ता है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म से खरीद और नीलामी प्रक्रिया होगी पारदर्शी
अब तक नाफेड अपनी खरीदी गई उपज की नीलामी के लिए निजी डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करता था। लेकिन नए ‘नाफेक्स डॉट इन’ पोर्टल के जरिए खरीद से लेकर नीलामी तक की पूरी प्रक्रिया एक ही मंच पर संचालित की जाएगी।
इससे खरीद-बिक्री का पूरा रिकॉर्ड एकीकृत प्रणाली में उपलब्ध रहेगा और निगरानी आसान होगी। सरकार का दावा है कि डिजिटल ट्रैकिंग से अनियमितताओं की संभावना कम होगी और किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जा सकेगा।
‘दृष्टि’ और ERP सिस्टम से बेहतर होगा स्टॉक प्रबंधन
सरकार द्वारा शुरू किए गए ‘दृष्टि’ और ईआरपी प्लेटफॉर्म खरीद, भंडारण और बिक्री से जुड़े सभी आंकड़ों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करेंगे। इससे स्टॉक प्रबंधन अधिक प्रभावी होगा और पूरी व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ेगी।
कृषि क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यदि खरीद और भुगतान प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो जाती है तो किसान दलहन और तिलहन की खेती का रकबा बढ़ाने के लिए अधिक प्रेरित होंगे। इससे उत्पादन बढ़ेगा, आयात पर निर्भरता घटेगी और देश की खाद्य सुरक्षा मजबूत होगी।
74 लाख किसानों से जुड़ा नाफेड, कारोबार बढ़ाने का लक्ष्य
अमित शाह ने नाफेड की आर्थिक प्रगति का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में नाफेड वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रहा था, जबकि वर्तमान में उसका कारोबार लगभग 30 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है और वह 74 लाख से अधिक किसानों से जुड़ा हुआ है।
सरकार ने अगले दो वर्षों में नाफेड का कारोबार बढ़ाकर 50 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
किसानों के बच्चों को मिलेगी छात्रवृत्ति
इस अवसर पर ‘नाफेड कल्याण’ पहल की भी घोषणा की गई। इसके तहत नाफेड अपने लाभ का एक हिस्सा किसानों के बच्चों की उच्च शिक्षा और करियर निर्माण के लिए छात्रवृत्ति योजनाओं पर खर्च करेगा।
सरकार का मानना है कि खरीद व्यवस्था में तकनीक, पारदर्शिता और किसानों की सीधी भागीदारी बढ़ाकर न केवल उनकी आय में सुधार किया जा सकता है, बल्कि देश को दलहन और तिलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य भी तेजी से हासिल किया जा सकता है।










