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राजस्व सेवाओं में बड़ा बदलाव, EWS प्रमाणपत्र बनवाना हुआ आसान; जमीन बंटवारे का काम भी अब ऑनलाइन

On: September 11, 2026
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राजस्व सेवाओं में बड़ा बदलाव, EWS प्रमाणपत्र बनवाना हुआ आसान
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लखनऊ/11 सितंबर 2026: लखनऊ में उत्तर प्रदेश की राजस्व सेवाओं को अधिक पारदर्शी और डिजिटल बनाने की दिशा में तीन नई सुविधाओं की शुरुआत की गई है। अब EWS प्रमाणपत्र के लिए आवेदन से लेकर भूमि अभिलेखों में जानकारी देखने और जमीन के बंटवारे से जुड़े मामलों की प्रक्रिया तक को ऑनलाइन किया जा सकेगा। इसके लिए EWS पोर्टल, सरलीकृत खतौनी और भूमि विभाजन से संबंधित नया पोर्टल शुरू किया गया है।

राजस्व परिषद की अध्यक्ष अर्चना अग्रवाल ने शुक्रवार को आंबेडकर सभागार में इन डिजिटल सुविधाओं का शुभारंभ किया। सरकार का जोर ऐसी व्यवस्था तैयार करने पर है, जिसमें नागरिकों को छोटी-छोटी राजस्व सेवाओं के लिए बार-बार तहसील के चक्कर न लगाने पड़ें और आवेदन की स्थिति भी घर बैठे पता चल सके।

EWS प्रमाणपत्र के लिए कम होंगे तहसील के चक्कर

आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के नागरिकों के लिए EWS प्रमाणपत्र बनवाने की प्रक्रिया को ऑनलाइन किया गया है। नए पोर्टल के माध्यम से नागरिक आवेदन कर सकेंगे और आवेदन संबंधित लेखपाल तथा तहसीलदार स्तर पर डिजिटल तरीके से भेजा और निस्तारित किया जा सकेगा।

सबसे अहम बात यह है कि आवेदक अपने आवेदन की स्थिति भी ऑनलाइन देख सकेंगे। आवेदन किस स्तर पर लंबित है और उसकी प्रक्रिया कहां तक पहुंची है, इसकी जानकारी डिजिटल माध्यम से उपलब्ध होगी।

इस बदलाव से कागजी प्रक्रिया कम होने की उम्मीद है। साथ ही, आवेदनों की डिजिटल निगरानी होने से अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और निर्धारित समय में मामलों का निस्तारण करने में भी मदद मिलेगी।

सरलीकृत खतौनी में छह दशमलव तक दिखेगा जमीन का क्षेत्रफल

भूमि रिकॉर्ड को आम नागरिक के लिए अधिक स्पष्ट बनाने के उद्देश्य से सरलीकृत खतौनी की सुविधा शुरू की गई है। इसमें जमीन का क्षेत्रफल छह दशमलव स्थानों तक प्रदर्शित किया जाएगा। इससे भूमि के वास्तविक क्षेत्रफल को पहले की तुलना में अधिक सटीक तरीके से समझने में मदद मिलेगी।

भूमि संबंधी पुराने रिकॉर्ड को लेकर भी सुविधा बढ़ाई गई है। अभिलेखागार से जुड़े पुराने आदेश और पुराने बंधक आदेशों की जानकारी को व्यवस्थित रूप से उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। जमीन के स्वामित्व या पुराने रिकॉर्ड से संबंधित जानकारी तलाशने वाले लोगों के लिए यह बदलाव उपयोगी साबित हो सकता है।

भूमि विवादों में पुराने दस्तावेज कई बार अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में रिकॉर्ड तक व्यवस्थित डिजिटल पहुंच प्रक्रिया को न केवल आसान बनाएगी, बल्कि दस्तावेजों की उपलब्धता को लेकर होने वाली दिक्कतों को भी कम कर सकती है।

जमीन का बंटवारा भी अब ऑनलाइन होगा

राजस्व संहिता की धारा 116 के तहत सह-खातेदार अपनी भूमि के विभाजन के लिए वाद कर सकता है। अब इस प्रक्रिया को भी ऑनलाइन करने के लिए नया पोर्टल शुरू किया गया है।

नागरिक जमीन के विभाजन के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। इसके बाद नोटिस और उद्घोषणा से जुड़ी प्रक्रिया भी डिजिटल माध्यम से संचालित और मॉनिटर की जा सकेगी।

संबंधित लेखपाल की रिपोर्ट भी पोर्टल पर उपलब्ध होगी। इसके साथ जमीन की वास्तविक स्थिति देखने के लिए मानचित्र की सुविधा दी गई है। इससे राजस्व न्यायालय में चल रही प्रक्रिया और मौके पर भूमि की स्थिति के बीच बेहतर तालमेल बनाने में मदद मिलेगी।

भूमि विभाजन जैसे मामलों में रिकॉर्ड और मौके की स्थिति के बीच अंतर कई बार विवाद का कारण बनता है। डिजिटल मानचित्र और रिपोर्ट की उपलब्धता से इस अंतर को कम करने की कोशिश की गई है।

तकनीक के साथ संवेदनशीलता पर भी जोर

राजस्व परिषद की अध्यक्ष अर्चना अग्रवाल ने कहा कि राजस्व प्रशासन का सीधा संबंध आम नागरिक और उसके भूमि संबंधी अधिकारों से है। इसलिए तकनीक का इस्तेमाल केवल प्रक्रियाओं को ऑनलाइन करने तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसका वास्तविक उद्देश्य नागरिकों की समस्याओं का सरल, पारदर्शी और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना होना चाहिए।

उन्होंने युवा अधिकारियों से संवेदनशीलता और निष्पक्षता के साथ काम करने तथा जनसेवा की भावना को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। साथ ही राजस्व प्रशासन में उपलब्ध तकनीकी संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने पर जोर दिया।

पीसीएस प्रशिक्षु अधिकारियों को दी गई राजस्व प्रशासन की जानकारी

कार्यक्रम के दौरान पीसीएस प्रशिक्षु अधिकारियों के साथ संवाद भी किया गया। उन्हें राजस्व परिषद की कार्यप्रणाली के साथ क्षेत्रीय स्तर पर राजस्व प्रशासन की भूमिका के बारे में जानकारी दी गई।

इस अवसर पर रोवर तकनीक के माध्यम से आधुनिक और सटीक भूमि मापन की प्रक्रिया का प्रदर्शन भी किया गया। प्रशिक्षु अधिकारियों ने राजस्व प्रशासन में तकनीक के इस्तेमाल और क्षेत्र स्तर पर आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों को लेकर अधिकारियों के साथ चर्चा की।

उत्तर प्रदेश में राजस्व सेवाओं के इन तीनों क्षेत्रों—EWS प्रमाणपत्र, खतौनी और भूमि विभाजन—को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की पहल का सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ने की उम्मीद है। खासकर भूमि संबंधी कामकाज में ऑनलाइन निगरानी और रिकॉर्ड की बेहतर उपलब्धता से पारदर्शिता बढ़ सकती है और लोगों की तहसील पर निर्भरता कम हो सकती है।

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