फर्रुखाबाद/गुरुवार, 3 सितंबर 2026: गंगा की बाढ़ से हर साल जूझने वाले फर्रुखाबाद के गांवों को अब स्थायी राहत दिलाने की दिशा में कदम उठाया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को जिले के बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण करने के बाद कहा कि गंगा की ड्रेजिंग कर नदी की गहराई बढ़ाई जाएगी। नदी से निकलने वाली सिल्ट का इस्तेमाल तटबंध बनाने में किया जाएगा, ताकि पानी के फैलाव को नियंत्रित किया जा सके और आसपास के गांवों तथा किसानों की फसलों को बाढ़ की मार से बचाया जा सके।
मुख्यमंत्री ने बाढ़ राहत शिविर में पहुंचकर प्रभावित लोगों से मुलाकात की और उन्हें भरोसा दिलाया कि आपदा की इस घड़ी में सरकार उनके साथ खड़ी है। इस दौरान 995 बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री वितरित की गई, जबकि बाढ़ में घर गंवा चुके 31 लोगों को जमीन के पट्टा अभिलेख और आवासीय योजना की धनराशि के प्रतीकात्मक चेक दिए गए।
गंगा ड्रेजिंग से बाढ़ का स्थायी समाधान तलाशने की तैयारी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गंगा के उथले होने के कारण पानी के फैलाव की समस्या बढ़ती है। नदी को चैनलाइज करने के लिए गंगा ड्रेजिंग कराई जाएगी। इससे नदी की गहराई बढ़ाने के साथ पानी के प्रवाह को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि ड्रेजिंग के दौरान निकलने वाली सिल्ट को तटबंध निर्माण में इस्तेमाल किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे नदी के आसपास बसे गांवों में बाढ़ के प्रभाव को कम करने और कृषि भूमि को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि इस काम के लिए यदि किसी किसान की जमीन ली जाती है तो उसे नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा। यानी सरकार की योजना केवल नदी की सफाई या गहराई बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे बाढ़ प्रबंधन की व्यापक व्यवस्था से जोड़कर देखा जा रहा है।
11:35 बजे शुरू हुआ हवाई सर्वेक्षण
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार सुबह करीब 11:35 बजे हेलीकॉप्टर से फर्रुखाबाद के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया। उन्होंने कायमगंज, शमसाबाद, अमृतपुर और सदर तहसील क्षेत्र के प्रभावित इलाकों का जायजा लिया।
इसके बाद करीब 12:06 बजे मुख्यमंत्री पुलिस लाइन के परेड ग्राउंड में बनाए गए बाढ़ राहत शिविर पहुंचे। यहां उन्होंने बाढ़ पीड़ितों के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुनीं और राहत कार्यों की स्थिति की जानकारी ली।
राहत सामग्री वितरण के दौरान 995 प्रभावित लोगों को सहायता किट दी गई। वहीं जिन 31 लोगों के घर बाढ़ की धार में बह गए, उन्हें जमीन के पट्टा अभिलेख और आवास योजना की धनराशि के प्रतीकात्मक चेक सौंपे गए।
15 दिन से चल रहे राहत कार्यों की CM ने ली जानकारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधि पिछले करीब 15 दिनों से बाढ़ राहत कार्यों में जुटे हैं। उन्होंने बताया कि बाढ़ की स्थिति को लेकर लखनऊ में जिले के भाजपा जिलाध्यक्ष और चारों विधायकों के साथ बैठक भी की गई थी।
राहत कार्यों की निगरानी और समीक्षा के लिए प्रभारी मंत्री को भेजे जाने का भी उल्लेख मुख्यमंत्री ने किया। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 24 घंटे संचालित होने वाला कंट्रोल रूम, बाढ़ चौकियां और राहत शिविर बनाए गए हैं। प्रभावित परिवारों के ठहरने और भोजन की व्यवस्था के साथ उन्हें राशन किट और अन्य जरूरी सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।
राहत सामग्री की किट में चावल, आटा, अरहर की दाल, तेल, मसाले, बाल्टी और बरसाती समेत करीब 50 तरह की आवश्यक वस्तुएं शामिल हैं। मुश्किल वक्त में ऐसी सामग्री प्रभावित परिवारों के लिए तत्काल जरूरत पूरी करने का साधन बनती है।
बाढ़ प्रभावित बच्चों की पढ़ाई भी जारी
बाढ़ का असर केवल घर और खेतों तक सीमित नहीं रहता। बच्चों की पढ़ाई भी इससे प्रभावित होती है। ऐसे में कायमगंज विधायक की ओर से बताया गया कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए शिक्षक शिविरों में और गांवों में जाकर कक्षाएं संचालित कर रहे हैं।
इस व्यवस्था का मकसद यह है कि लंबे समय तक बाढ़ की स्थिति रहने पर भी बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह बाधित न हो।
फसल नुकसान का सर्वे, किसानों को मिलेगा मुआवजा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाढ़ से खराब हुई फसलों का सर्वे कराने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि फसल क्षति का आकलन कराया जाएगा और पात्र किसानों को मुआवजे की धनराशि सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाएगी।
फर्रुखाबाद जैसे कृषि प्रधान क्षेत्र में बाढ़ का सबसे सीधा असर खेतों पर पड़ता है। नदी का पानी उतरने के बाद भी किसान के सामने फसल, बीज, अगली बुवाई और घरेलू खर्च का संकट खड़ा हो जाता है। ऐसे में क्षति का सही आकलन और समय पर मुआवजा किसानों के लिए महत्वपूर्ण होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नदी को चैनलाइज करने से आसपास के गांवों को बाढ़ से बचाने के साथ किसानों की फसल को भी सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।
जहरीले जीव-जंतुओं से बचाव के लिए दवाओं की व्यवस्था
बाढ़ के बाद गांवों और खेतों में जहरीले सांप तथा अन्य जीव-जंतुओं का खतरा बढ़ जाता है। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी चिकित्सालयों में एंटी-वेनम, एंटी-रेबीज और पर्याप्त दवाओं की व्यवस्था की गई है।
उन्होंने अधिकारियों को बाढ़ प्रभावित लोगों के स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहने के निर्देश दिए।
महिलाओं और युवाओं के लिए योजनाओं का भी किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने राहत कार्यों के साथ सरकार की विभिन्न योजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने बालिकाओं और महिलाओं के लिए संचालित रानी लक्ष्मीबाई योजना तथा लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति योजना की जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि एक बेटी के शिक्षित होने से दो परिवार सशक्त होते हैं। युवाओं के लिए रोजगार और नौकरी के अवसर उपलब्ध कराने की बात भी मुख्यमंत्री ने कही।
इस दौरान उन्होंने पूर्ववर्ती सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले ‘सैफई सिंडीकेट’ नौकरियों पर कब्जा कर लेता था और प्रदेश का युवा अवसर की तलाश में रह जाता था।
फर्रुखाबाद दौरे में मुख्यमंत्री का संदेश दो स्तरों पर रहा—एक तरफ तत्काल राहत के जरिए बाढ़ पीड़ित परिवारों को सहारा देने की कोशिश और दूसरी तरफ गंगा की ड्रेजिंग व चैनलाइजेशन के जरिए बार-बार आने वाली बाढ़ की समस्या का दीर्घकालिक समाधान तलाशने का दावा। अब इस योजना का असर जमीन पर कितना दिखाई देता है, यह उसके क्रियान्वयन और समयबद्ध तरीके से होने वाले काम पर निर्भर करेगा।










