नई दिल्ली/गुरुवार, 3 सितंबर 2026: भू-राजनीतिक चुनौतियों और वैश्विक बाजार में बदलते समीकरणों के बीच भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग ने घरेलू बाजार में मजबूत प्रदर्शन किया है। वित्त वर्ष 2025-26 में यात्री वाहनों, दोपहिया, तिपहिया और वाणिज्यिक वाहनों—सभी प्रमुख श्रेणियों ने रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की। इसी पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑटो उद्योग से घरेलू मजबूती को वैश्विक विस्तार में बदलने का आह्वान किया है।
सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) के 66वें वार्षिक सम्मेलन में भेजे अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय ऑटो उद्योग को मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) से पैदा हुए अवसरों का पूरा लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने नवाचार, तकनीकी क्षमता और उन्नत विनिर्माण के जरिए भारत की वैश्विक उपस्थिति को और मजबूत करने पर जोर दिया।
ऑटो सेक्टर को वैश्विक बाजार में बढ़ानी होगी मौजूदगी
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत का मोबिलिटी सेक्टर ऊर्जा दक्षता, ऊर्जा के विविध स्रोतों, नई तकनीक और उन्नत विनिर्माण के कारण बड़े बदलाव से गुजर रहा है। ऐसे दौर में ऑटो उद्योग की जिम्मेदारी केवल देश की बढ़ती मांग पूरी करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे वैश्विक बाजार में अपनी जगह और मजबूत करनी होगी।
पिछले एक दशक में भारत दुनिया की प्रमुख तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रहा है। आर्थिक गतिविधियों के विस्तार के साथ वाहनों की मांग भी बढ़ी है। राजमार्गों और अन्य बुनियादी ढांचे के विस्तार ने देश के भीतर लोगों और माल की आवाजाही को आसान बनाया है। इसका सीधा फायदा लॉजिस्टिक्स और विनिर्माण क्षेत्र को मिल रहा है।
बेहतर कनेक्टिविटी से परिवहन लागत घटती है और उत्पादन अधिक प्रतिस्पर्धी बनता है। ऐसे में ऑटो उद्योग के लिए घरेलू बाजार की मजबूती को निर्यात क्षमता में बदलना अगला स्वाभाविक कदम माना जा रहा है।
रिकॉर्ड बिक्री ने बढ़ाया भरोसा
SIAM के अध्यक्ष और टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के एमडी एवं सीईओ शैलेश चंद्रा ने सम्मेलन में भारतीय ऑटो उद्योग के आर्थिक महत्व को रेखांकित किया। उनके मुताबिक, ऑटोमोटिव सेक्टर का भारतीय अर्थव्यवस्था में योगदान 22.75 लाख करोड़ रुपये से अधिक है और यह देश के जीएसटी संग्रह में करीब 15 प्रतिशत योगदान देता है। उद्योग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से तीन करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार भी देता है।
वित्त वर्ष 2025-26 में यात्री वाहन बिक्री 46.43 लाख यूनिट के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 7.9 प्रतिशत अधिक है। इस श्रेणी का निर्यात भी 9.05 लाख यूनिट के सर्वाधिक स्तर पर रहा और इसमें 17.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई।
दोपहिया वाहनों की घरेलू बिक्री भी 2.17 करोड़ यूनिट के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची, जबकि तिपहिया और वाणिज्यिक वाहन खंडों ने भी वित्त वर्ष में अब तक की सर्वाधिक बिक्री दर्ज की। SIAM के अनुसार, वर्ष के दूसरे हिस्से में मांग में तेज सुधार ने पूरे उद्योग के प्रदर्शन को मजबूती दी।
इन आंकड़ों से एक बात साफ होती है—भारतीय ऑटो बाजार अब केवल आकार के लिहाज से महत्वपूर्ण नहीं है। घरेलू मांग, निर्यात, इलेक्ट्रिक वाहनों और नई तकनीकों का बढ़ता इस्तेमाल इसे वैश्विक ऑटोमोबाइल आपूर्ति श्रृंखला में और महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की दिशा में ले जा रहा है।
FTA से निर्यात को मिल सकता है नया बाजार
प्रधानमंत्री का FTA पर जोर ऐसे समय आया है जब भारतीय ऑटो उद्योग के सामने घरेलू बाजार के साथ-साथ वैश्विक विस्तार का अवसर भी मौजूद है। मुक्त व्यापार समझौते भारतीय कंपनियों को कई विदेशी बाजारों में अधिक अनुकूल व्यापारिक परिस्थितियां दे सकते हैं।
SIAM ने भी भारत को वैश्विक ऑटोमोटिव हब के रूप में विकसित करने, आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया है। उद्योग के लिए चुनौती अब सिर्फ अधिक वाहन बनाना नहीं, बल्कि ऐसे वाहन और तकनीक विकसित करना है जो गुणवत्ता, लागत और सुरक्षा के मामले में दुनिया के प्रमुख बाजारों में टिक सकें।
अक्टूबर 2027 से Bharat NCAP 2.0 की तैयारी
सम्मेलन के एक अन्य सत्र में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने वाहन सुरक्षा को लेकर भी बड़ा ऐलान किया। उन्होंने बताया कि सरकार अक्टूबर 2027 से Bharat NCAP 2.0 लागू करने की तैयारी कर रही है।
Bharat NCAP का मौजूदा चरण अक्टूबर 2023 से लागू है और इसके तहत वाहनों की क्रैश सुरक्षा का आकलन कर उन्हें एक से पांच स्टार तक रेटिंग दी जाती है। सड़क परिवहन मंत्रालय के दस्तावेज के मुताबिक, मौजूदा चरण 30 सितंबर 2027 तक प्रभावी है और इसके बाद दूसरे चरण की व्यवस्था लागू किए जाने की तैयारी है।
गडकरी के मुताबिक, Bharat NCAP 2.0 में सुरक्षा के दायरे को व्यापक किया जाएगा। इसमें केवल दुर्घटना के दौरान वाहन और यात्रियों की सुरक्षा तक सीमित रहने के बजाय दुर्घटना से बचाव, पैदल यात्रियों की सुरक्षा और दुर्घटना के बाद बचाव जैसे पहलुओं पर भी ध्यान दिया जाएगा। भारतीय स्टार्टअप्स द्वारा विकसित नई तकनीकों को भी इस व्यवस्था में इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई है।
ड्राइविंग व्यवहार पर भी नजर
सड़क सुरक्षा को लेकर सरकार ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन पंजीकरण प्रमाणपत्र में ग्रेडेड प्वाइंट सिस्टम लाने की दिशा में काम कर रही है। प्रस्तावित व्यवस्था में यातायात नियमों के उल्लंघन पर अंक काटे जाएंगे। एक तय सीमा पार होने पर लाइसेंस निलंबित या रद्द किया जा सकता है।
इसके उलट जिम्मेदार और सुरक्षित ड्राइविंग करने वालों को बीमा कंपनियों की ओर से प्रोत्साहन दिए जाने की व्यवस्था पर भी विचार किया जा रहा है। गडकरी ने कहा कि भारत में हर साल करीब पांच लाख सड़क दुर्घटनाएं होती हैं और इनमें लगभग 1.80 लाख लोगों की मौत होती है। उन्होंने 18 से 36 वर्ष आयु वर्ग के लोगों के बड़ी संख्या में दुर्घटनाओं का शिकार होने पर चिंता जताई और कहा कि इन आंकड़ों को हर हाल में कम करना होगा।
भारतीय ऑटो उद्योग के लिए यह सम्मेलन इसलिए भी अहम रहा कि चर्चा का दायरा बिक्री और उत्पादन से आगे बढ़कर निर्यात, तकनीक, सुरक्षा, टिकाऊ मोबिलिटी और वैश्विक प्रतिस्पर्धा तक पहुंचा। घरेलू बाजार ने उद्योग को मजबूत आधार दे दिया है; अब सरकार और उद्योग के सामने उस आधार को वैश्विक नेतृत्व में बदलने की चुनौती है।












