रामपुर/30 जून 2026: उत्तर प्रदेश में बुनियादी ढांचे को नई रफ्तार देने वाली गोरखपुर-शामली इकोनॉमिक कॉरिडोर परियोजना को प्रदेश की सबसे महत्वाकांक्षी सड़क परियोजनाओं में माना जा रहा है। करीब 700 किलोमीटर लंबे इस प्रस्तावित एक्सप्रेसवे के जरिए पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बीच तेज और निर्बाध संपर्क स्थापित होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को रामपुर में विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान इस परियोजना का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि इससे प्रदेश के व्यापार, उद्योग और क्षेत्रीय विकास को नई दिशा मिलेगी।
गोरखपुर-शामली इकोनॉमिक कॉरिडोर से जुड़ेगा पूर्वी और पश्चिमी यूपी
रामपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लगभग 690 करोड़ रुपये की 102 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इसी दौरान उन्होंने गोरखपुर-शामली इकोनॉमिक कॉरिडोर को उत्तर प्रदेश के विकास की दृष्टि से अहम परियोजना बताते हुए कहा कि यह कॉरिडोर प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों के बीच आर्थिक गतिविधियों को नई गति देगा।
मुख्यमंत्री के अनुसार, यह परियोजना केवल सड़क संपर्क तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि औद्योगिक निवेश, व्यापार और रोजगार के नए अवसर भी तैयार करेगी।
रामपुर समेत कई क्षेत्रों को मिलेगा सीधा लाभ
प्रस्तावित कॉरिडोर रामपुर जिले की रामपुर, स्वार, टांडा और बिलासपुर तहसीलों से होकर गुजरेगा। इसके निर्माण से स्थानीय लोगों के लिए आवागमन आसान होगा, जबकि कृषि, लघु उद्योग और व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
सरकार का मानना है कि बेहतर कनेक्टिविटी से इन क्षेत्रों में निवेश बढ़ेगा और परिवहन लागत घटने का लाभ उद्योगों और कारोबारियों को मिलेगा।
22 जिलों और 37 तहसीलों से होकर गुजरेगा एक्सप्रेसवे
करीब 700 किलोमीटर लंबा प्रस्तावित गोरखपुर-शामली इकोनॉमिक कॉरिडोर उत्तर प्रदेश का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे बनने की दिशा में तैयार किया जा रहा है। यह परियोजना 22 जिलों और 37 तहसीलों से होकर गुजरेगी।
वर्तमान में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे है, लेकिन इस नई परियोजना के पूरा होने के बाद यह रिकॉर्ड गोरखपुर-शामली इकोनॉमिक कॉरिडोर के नाम हो जाएगा।
हरियाणा, पंजाब और दिल्ली से मजबूत होगा संपर्क
इस कॉरिडोर का उद्देश्य उत्तर प्रदेश को हरियाणा, पंजाब और दिल्ली से अधिक तेज और निर्बाध सड़क संपर्क उपलब्ध कराना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मार्ग गोरखपुर की ओर पूर्वी भारत के संपर्क को मजबूत करेगा, जबकि शामली के जरिए पानीपत और राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क से बेहतर कनेक्टिविटी स्थापित होगी।
उन्होंने कहा कि इस तरह की आधारभूत परियोजनाएं प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति देने के साथ-साथ लॉजिस्टिक्स, औद्योगिक विकास और निवेश को भी नई मजबूती देंगी।
व्यापार और निवेश को मिलेगी नई रफ्तार
विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े आर्थिक कॉरिडोर केवल यात्रा का समय कम नहीं करते, बल्कि उनके आसपास औद्योगिक क्लस्टर, वेयरहाउस, लॉजिस्टिक्स पार्क और नए कारोबारी केंद्र भी विकसित होते हैं। ऐसे में गोरखपुर-शामली इकोनॉमिक कॉरिडोर के पूरा होने के बाद उत्तर प्रदेश के कई जिलों में निवेश और रोजगार के नए अवसर बनने की संभावना है।
सरकार का दावा है कि यह परियोजना राज्य के संतुलित क्षेत्रीय विकास और तेज आर्थिक वृद्धि की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।









