नई दिल्ली, 2 मार्च 2026। भारत और कनाडा के रिश्तों में बीते कुछ समय से जो ठहराव महसूस किया जा रहा था, वह अब टूटता नजर आ रहा है। भारत-कनाडा संबंधों में नई एनर्जी की बात खुद प्रधानमंत्री Narendra Modi ने उस वक्त कही, जब उन्होंने कनाडा के प्रधानमंत्री Mark Carney का औपचारिक स्वागत किया।
चार दिवसीय भारत दौरे पर आए कार्नी के साथ साझा प्रेस वक्तव्य में पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच संवाद और भरोसे का एक नया अध्याय शुरू हुआ है। उन्होंने टिप्पणी की कि दुनिया में बहुत कम ऐसे नेता हैं जिनके अनुभव में दो देशों की केंद्रीय बैंकिंग का नेतृत्व शामिल रहा हो—इशारा साफ तौर पर कार्नी की ओर था। यह टिप्पणी सिर्फ शिष्टाचार नहीं थी, बल्कि आर्थिक सहयोग की दिशा में संकेत भी थी।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “हमारी पहली मुलाकात के बाद से हमारे रिश्तों में एक नई ऊर्जा आई है। आपसी भरोसा बढ़ा है और सकारात्मकता का वातावरण बना है।”
2030 तक 50 बिलियन डॉलर व्यापार का लक्ष्य
दोनों नेताओं की वार्ता का सबसे अहम निष्कर्ष रहा—व्यापार बढ़ाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत और कनाडा ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है।
उन्होंने कहा, “आर्थिक सहयोग की पूरी क्षमता का इस्तेमाल करना हमारी प्राथमिकता है। हमने जल्द से जल्द व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (Comprehensive Economic Partnership Agreement) को अंतिम रूप देने का निर्णय लिया है।”
विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह समझौता तय समय में लागू हो जाता है, तो दोनों देशों के बीच निवेश, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और रोजगार के नए अवसर खुल सकते हैं। कनाडा के पास प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता है, जबकि भारत विशाल बाजार और तकनीकी दक्षता के साथ उभरती वैश्विक अर्थव्यवस्था है—दोनों की जरूरतें एक-दूसरे को पूरक करती हैं।
किन-किन क्षेत्रों में हुए समझौते?
भारत और कनाडा ने सोमवार को कई अहम समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए। इन समझौतों में प्रमुख रूप से—
- टेक्नोलॉजी और इनोवेशन में सहयोग
- रिन्यूएबल एनर्जी को बढ़ावा
- क्रिटिकल मिनरल्स की आपूर्ति
- यूरेनियम सप्लाई पर सहयोग
ऊर्जा सुरक्षा और हरित विकास के लिहाज से ये समझौते खास महत्व रखते हैं। खासकर क्रिटिकल मिनरल्स और यूरेनियम सप्लाई पर सहयोग, भारत की ऊर्जा जरूरतों और न्यूक्लियर सेक्टर की दीर्घकालिक योजनाओं के लिए रणनीतिक कदम माना जा रहा है।
मार्क कार्नी ने जताया भरोसा
प्रधानमंत्री कार्नी ने अपने संबोधन में कहा कि पिछले एक वर्ष में दोनों देशों की सरकारों के बीच जितना जुड़ाव हुआ है, वह बीते दो दशकों में शायद ही देखने को मिला हो।
उन्होंने कहा, “हमने सिर्फ संबंधों को पुनर्जीवित नहीं किया है, बल्कि नई उम्मीद, स्पष्ट फोकस और दूरदृष्टि के साथ एक मजबूत साझेदारी को आगे बढ़ाया है। यह दो आत्मविश्वासी देशों के बीच ऐसी साझेदारी है जो भविष्य का रास्ता खुद तय कर रही है।”
कार्नी का यह बयान संकेत देता है कि कनाडा भी भारत को इंडो-पैसिफिक रणनीति और वैश्विक आपूर्ति शृंखला के पुनर्गठन में अहम साझेदार के रूप में देख रहा है।
कूटनीतिक संकेत और आगे की राह
भारत-कनाडा संबंधों में नई एनर्जी सिर्फ शब्दों तक सीमित नहीं दिखती। जिस तरह से व्यापार, ऊर्जा और टेक्नोलॉजी पर ठोस घोषणाएं हुई हैं, उससे यह साफ है कि दोनों देश रिश्तों को व्यावहारिक धरातल पर मजबूत करना चाहते हैं।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में इन समझौतों की प्रगति ही असली कसौटी होगी। कूटनीति में मुस्कान और बयान महत्वपूर्ण होते हैं, लेकिन टिकाऊ रिश्ते ठोस परिणामों पर खड़े होते हैं।
फिलहाल, इतना तय है कि 2 मार्च 2026 की यह मुलाकात भारत-कनाडा संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत के तौर पर दर्ज की जाएगी।












