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इस्राइल-ईरान युद्ध: पीएम मोदी ने बुलाई CCS बैठक, आज रात लौटेंगे दिल्ली

On: March 1, 2026
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इस्राइल-ईरान युद्ध- पीएम मोदी ने बुलाई CCS बैठक
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नई दिल्ली, 1 मार्च 2026। पश्चिम एशिया में तेज़ी से बदलते घटनाक्रम के बीच भारत ने भी कूटनीतिक (Diplomatic) और सुरक्षा (Security) स्तर पर सक्रियता बढ़ा दी है। इस्राइल-ईरान युद्ध के हालातों को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज रात राजधानी लौटने के बाद कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की अहम बैठक की अध्यक्षता करेंगे। सरकारी सूत्रों के अनुसार वह अपने दो दिवसीय दौरे से करीब रात 9:30 बजे दिल्ली पहुंचेंगे और उसके तुरंत बाद उच्च स्तरीय समीक्षा होगी।

यह बैठक केवल औपचारिकता नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे भारत की रणनीतिक तैयारी (Strategic Preparedness) की दिशा तय करने वाली अहम कवायद के रूप में देखा जा रहा है।

इस्राइल-ईरान युद्ध के बीच क्यों अहम है CCS बैठक?

सूत्रों के मुताबिक, बैठक में ईरान पर अमेरिका और इस्राइल की सैन्य कार्रवाई के बाद बने हालात, क्षेत्रीय अस्थिरता (Regional Instability) और भारत के सामरिक हितों (Strategic Interests) पर विस्तार से चर्चा होगी।

Narendra Modi की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, रक्षा, गृह और विदेश मंत्रालय से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।

भारत के लिए यह संकट इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि पश्चिम एशिया ऊर्जा आपूर्ति (Energy Supply), समुद्री व्यापार मार्ग (Sea Lanes) और प्रवासी भारतीयों की मौजूदगी के लिहाज से बेहद अहम है। यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो इसका असर कच्चे तेल की कीमतों, रुपये की स्थिरता और घरेलू अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर विशेष फोकस

बैठक में सबसे अहम मुद्दा पश्चिम एशिया में मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा रहेगा। खासकर United Arab Emirates और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में भारतीय काम करते हैं।

सरकार संभावित निकासी योजना (Evacuation Plan), दूतावासों की एडवाइजरी और हवाई सेवाओं पर पड़ने वाले प्रभाव की समीक्षा कर सकती है। पिछले अनुभव—जैसे यमन और यूक्रेन संकट—को ध्यान में रखते हुए चरणबद्ध निकासी (Phased Evacuation) की तैयारी भी चर्चा का हिस्सा हो सकती है।

सरकारी सूत्रों का कहना है कि “भारतीयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।” यही कारण है कि हालात पर 24×7 निगरानी रखी जा रही है।

कूटनीतिक संपर्क: संयम की अपील

भारत ने आधिकारिक बयान जारी कर सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट कहा है कि संवाद (Dialogue) और कूटनीति (Diplomacy) ही समाधान का रास्ता है।

विदेश मंत्री S. Jaishankar ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची और इस्राइल के विदेश मंत्री गिडोन सार से फोन पर बातचीत की। भारत ने दोनों पक्षों से तनाव कम करने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील दोहराई है।

भारत का रुख संतुलित (Balanced Approach) माना जा रहा है—एक तरफ इस्राइल के साथ रणनीतिक साझेदारी, तो दूसरी ओर ईरान के साथ ऐतिहासिक और ऊर्जा संबंध।

भारत के लिए क्यों निर्णायक है यह संकट?

इस्राइल-ईरान युद्ध केवल क्षेत्रीय टकराव नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक समीकरणों को प्रभावित करने वाली घटना बन सकता है। पश्चिम एशिया से भारत अपने तेल आयात का बड़ा हिस्सा प्राप्त करता है। यदि समुद्री मार्ग बाधित होते हैं या तेल उत्पादन प्रभावित होता है, तो महंगाई और व्यापार संतुलन पर सीधा असर पड़ सकता है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि CCS बैठक से भारत की तत्काल और मध्यम अवधि की रणनीति स्पष्ट हो सकती है—चाहे वह ऊर्जा आपूर्ति की वैकल्पिक व्यवस्था हो, नागरिकों की निकासी हो या कूटनीतिक मध्यस्थता की भूमिका।

फिलहाल निगाहें आज रात होने वाली बैठक पर टिकी हैं। दिल्ली की सियासी और रणनीतिक हलचल इस बात का संकेत दे रही है कि भारत इस संकट को केवल दूर से देख नहीं रहा, बल्कि हर स्तर पर तैयारी कर रहा है।

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