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ITR Filing 2026: AIS और TIS के चक्कर में फंसे टैक्सपेयर्स! रिटर्न जमा करने के बाद दोबारा क्यों भरना पड़ रहा है फॉर्म?

On: June 22, 2026
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ITR Filing 2026, AIS और TIS के चक्कर में फंसे टैक्सपेयर्स!
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नई दिल्ली, 22 जून 2026। ITR Filing 2026 के दौरान इस बार एक दिलचस्प और महत्वपूर्ण ट्रेंड सामने आया है। बड़ी संख्या में टैक्सपेयर्स पहली बार इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने के बाद उसे दोबारा संशोधित यानी Revised Return के रूप में जमा कर रहे हैं। इसके पीछे केवल मानवीय भूल ही नहीं, बल्कि आयकर विभाग की नई डिजिटल निगरानी व्यवस्था, AIS और TIS जैसे उन्नत डेटा सिस्टम भी बड़ी वजह बनकर उभरे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि आयकर व्यवस्था अब पहले की तुलना में कहीं अधिक डेटा-आधारित और पारदर्शी हो चुकी है। ऐसे में रिटर्न भरते समय हुई छोटी सी गलती भी बाद में सामने आ जाती है, जिसके कारण टैक्सपेयर्स को संशोधित रिटर्न दाखिल करना पड़ रहा है।

AIS और TIS ने बढ़ाई टैक्सपेयर्स की परेशानी या जागरूकता?

आयकर विभाग का AIS (Annual Information Statement) और TIS (Taxpayer Information Summary) सिस्टम अब टैक्सपेयर्स की लगभग हर वित्तीय गतिविधि का रिकॉर्ड दिखाता है। बैंक ब्याज, शेयर बाजार निवेश, म्यूचुअल फंड ट्रांजैक्शन, टीडीएस, संपत्ति खरीद-बिक्री और अन्य आय स्रोतों की जानकारी इन रिपोर्टों में दर्ज होती है।

यही वजह है कि ITR दाखिल करने के बाद जब कई लोग AIS और Form 26AS का मिलान करते हैं तो उन्हें आय या लेनदेन से जुड़ी कुछ छूटी हुई जानकारियां दिखाई देती हैं। इसके बाद उन्हें Revised Return दाखिल करना पड़ता है।

क्यों बढ़ रहे हैं Revised Return के मामले?

कर विशेषज्ञों के अनुसार इस साल संशोधित रिटर्न की संख्या बढ़ने के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं।

  • पहली बार ITR भरने के दौरान आय का कोई स्रोत छूट जाना
  • टैक्स बचत से जुड़े डिडक्शन बाद में याद आना
  • AIS, Form 26AS और बैंक रिकॉर्ड में अंतर दिखाई देना
  • नए ITR फॉर्म में अधिक विस्तृत जानकारी भरने की आवश्यकता
  • निवेश और पूंजीगत लाभ (Capital Gains) की गलत रिपोर्टिंग

विशेषज्ञ बताते हैं कि अब टैक्सपेयर्स नोटिस आने का इंतजार करने के बजाय स्वयं अपनी गलती सुधारना ज्यादा सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं।

Budget 2026 के बाद मिला बड़ा मौका

इस बार Revised Return दाखिल करने का ट्रेंड बढ़ने की एक बड़ी वजह सरकार द्वारा दी गई अतिरिक्त समयसीमा भी है।

पहले करदाता केवल 31 दिसंबर तक संशोधित रिटर्न दाखिल कर सकते थे, लेकिन Budget 2026 में यह समयसीमा बढ़ाकर 31 मार्च कर दी गई है। इससे करदाताओं को अपने दस्तावेजों की दोबारा जांच करने और किसी भी त्रुटि को सुधारने के लिए अतिरिक्त समय मिल गया है।

कर सलाहकारों का कहना है कि बढ़ी हुई समयसीमा ने लोगों को जल्दबाजी में रिटर्न भरने के बजाय सही जानकारी के साथ संशोधन करने का अवसर दिया है।

ITR Filing 2026 की महत्वपूर्ण डेडलाइन

आकलन वर्ष 2026-27 के लिए आयकर विभाग ने विभिन्न श्रेणियों के करदाताओं के लिए अलग-अलग अंतिम तिथियां निर्धारित की हैं।

प्रमुख डेडलाइन

  • 31 जुलाई 2026 – वेतनभोगी और नॉन-ऑडिट करदाता (ITR-1, ITR-2)
  • 31 अगस्त 2026 – व्यवसाय और पेशेवर वर्ग (ITR-3, ITR-4, नॉन-ऑडिट)
  • 31 अक्टूबर 2026 – ऑडिट वाले मामले
  • 31 दिसंबर 2026 – Belated Return दाखिल करने की अंतिम तिथि
  • 31 मार्च 2027 – Revised Return दाखिल करने की अंतिम तिथि

छोटी गलती भी बन सकती है नोटिस की वजह

कर विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल डेटा ट्रैकिंग के इस दौर में आय, टीडीएस, बैंक ब्याज या निवेश से जुड़ी जानकारी छिपाना लगभग असंभव हो गया है। यदि ITR में दी गई जानकारी AIS या विभाग के रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती तो करदाता को नोटिस मिल सकता है।

इसी कारण अब लोग रिटर्न भरने के बाद भी AIS, TIS और Form 26AS की दोबारा जांच कर रहे हैं और जरूरत पड़ने पर Revised Return दाखिल कर रहे हैं।

क्या सीख मिलती है टैक्सपेयर्स को?

ITR Filing 2026 ने यह साफ कर दिया है कि अब आयकर रिटर्न केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं रह गई है। डिजिटल निगरानी, डेटा मिलान और पारदर्शी सिस्टम के चलते सटीक जानकारी देना पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि संशोधित रिटर्न की बढ़ती संख्या किसी समस्या का संकेत नहीं, बल्कि करदाताओं की बढ़ती जागरूकता और जिम्मेदारी को दर्शाती है। सही समय पर गलती सुधारना भविष्य में होने वाली कर संबंधी परेशानियों से बचने का सबसे बेहतर तरीका माना जा रहा है।

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