14 जून 2026/नई दिल्ली: अगर आपने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल किया है, तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान होने वाली ITR Scrutiny 2026 के लिए नई गाइडलाइन जारी कर दी है। इन निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि किन परिस्थितियों में आयकर विभाग किसी करदाता के रिटर्न की अनिवार्य रूप से गहन जांच करेगा।
हालांकि इस बार जारी दिशा-निर्देशों में कोई बड़ा नीतिगत बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन विभाग ने उन मामलों की सूची दोबारा स्पष्ट कर दी है जिनमें रिटर्न स्वतः जांच के दायरे में आ सकते हैं।
क्या होती है ITR Scrutiny?
आयकर विभाग द्वारा की जाने वाली स्क्रूटनी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि करदाता ने अपने रिटर्न में जो आय, खर्च, कटौतियां और टैक्स संबंधी जानकारी दी है, वह सही और प्रमाणित है या नहीं।
कर विशेषज्ञों के अनुसार, स्क्रूटनी मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है। पहली अनिवार्य या कम्पलसरी स्क्रूटनी और दूसरी जोखिम आधारित जांच। कम्पलसरी स्क्रूटनी में विभाग कुछ तय मानकों के आधार पर मामलों का चयन करता है और उनकी विस्तृत समीक्षा करता है।
किन टैक्सपेयर्स पर लागू होगी ITR Scrutiny 2026?
सीबीडीटी की नई गाइडलाइन के अनुसार कुछ विशेष परिस्थितियों में करदाताओं के रिटर्न की अनिवार्य जांच की जाएगी।
सर्वे की कार्रवाई वाले मामले
यदि किसी करदाता के यहां आयकर अधिनियम की धारा 133A के तहत सर्वे किया गया है, विशेष रूप से 1 अप्रैल 2024 के बाद, तो उसका मामला स्क्रूटनी के लिए चुना जा सकता है। विभाग ऐसे मामलों में वित्तीय लेनदेन और आय के स्रोतों की विस्तृत जांच करता है।
छापेमारी और जब्ती की कार्रवाई
जिन मामलों में 1 अप्रैल 2024 के बाद आयकर विभाग ने तलाशी या जब्ती की कार्रवाई की है, वे स्वतः अनिवार्य जांच के दायरे में आएंगे। ऐसे मामलों को विभाग उच्च प्राथमिकता के साथ देखता है।
धारा 148 के तहत जारी नोटिस
यदि किसी करदाता को पुनर्मूल्यांकन के लिए आयकर अधिनियम की धारा 148 के तहत नोटिस मिला है, तो उसका रिटर्न भी विस्तृत जांच के लिए चुना जा सकता है। यह नियम उन मामलों पर भी लागू होगा जिनमें जांच 31 मार्च 2027 तक पूरी की जानी है।
ट्रस्ट और संस्थानों पर भी रहेगी नजर
नई गाइडलाइन में धार्मिक, सामाजिक और शैक्षणिक ट्रस्टों को भी शामिल किया गया है। जिन संस्थानों की कर छूट समाप्त कर दी गई है या उन्हें छूट देने से इनकार किया गया है, लेकिन फिर भी उन्होंने आईटीआर-7 में कर छूट का दावा किया है, उनके मामलों की अनिवार्य जांच होगी।
पिछली बड़ी टैक्स विसंगतियां भी बन सकती हैं वजह
यदि पिछले वर्षों के असेसमेंट के दौरान आयकर अधिकारियों ने किसी करदाता की आय में बड़ा संशोधन किया था और वही मुद्दा वर्तमान वर्ष में भी मौजूद है, तो उसका मामला भी स्क्रूटनी में जा सकता है।
नई व्यवस्था के तहत दिल्ली, मुंबई, कोलकाता सहित आठ बड़े शहरों में यह सीमा 50 लाख रुपये निर्धारित की गई है। अन्य शहरों के लिए यह सीमा 20 लाख रुपये रखी गई है। निर्धारित सीमा से अधिक विवादित राशि होने पर विभाग विस्तृत जांच कर सकता है।
टैक्स चोरी की पुख्ता सूचना मिलने पर होगी कार्रवाई
यदि किसी सरकारी एजेंसी, नियामक संस्था या अन्य जांच एजेंसी से किसी करदाता के खिलाफ टैक्स चोरी से संबंधित विश्वसनीय जानकारी प्राप्त होती है, तो आयकर विभाग उस मामले को सीधे गहन जांच के लिए चुन सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में केवल रिटर्न ही नहीं, बल्कि संबंधित दस्तावेजों, बैंकिंग लेनदेन और वित्तीय रिकॉर्ड की भी समीक्षा की जा सकती है।
अगले साल भी बना रह सकता है स्क्रूटनी का जोखिम
कर विशेषज्ञ मिहिर तन्ना के अनुसार, यदि असेसमेंट के दौरान अधिकारी करदाता द्वारा घोषित आय को स्वीकार नहीं करता और उसमें उल्लेखनीय वृद्धि कर देता है, तो अगले वर्षों में भी उस करदाता के रिटर्न पर विभाग की नजर बनी रह सकती है।
दिलचस्प बात यह है कि पहले आठ प्रमुख महानगरों के लिए यह सीमा 25 लाख रुपये थी, जिसे अब बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दिया गया है। इससे कुछ मामलों में राहत जरूर मिलेगी, लेकिन बड़े वित्तीय विवाद वाले करदाताओं को अभी भी अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होगी।
ITR दाखिल करते समय क्या रखें ध्यान?
ITR Scrutiny 2026 के मद्देनजर करदाताओं को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि रिटर्न में दी गई सभी जानकारी सही, प्रमाणित और दस्तावेजों से समर्थित हो। आय, निवेश, बैंक लेनदेन, टीडीएस और कटौतियों से जुड़ी जानकारी में किसी भी प्रकार की गलती भविष्य में जांच का कारण बन सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर और सटीक जानकारी के साथ रिटर्न दाखिल करने से अनावश्यक नोटिस और स्क्रूटनी की संभावना काफी हद तक कम की जा सकती है।













