लखनऊ | 19 फरवरी 2026 (गुरुवार): उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने प्रस्तावित जापान दौरे के दौरान दुनिया की सबसे उन्नत परिवहन तकनीकों में शुमार जापान मैग्लेव ट्रेन में करीब 100 किलोमीटर की परीक्षण यात्रा करेंगे। यह यात्रा महज एक औपचारिक दौरा नहीं मानी जा रही, बल्कि प्रदेश के भविष्य के स्मार्ट ट्रांसपोर्ट मॉडल (Smart Transport Model) को समझने की दिशा में एक रणनीतिक कदम के रूप में देखी जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार, मुख्यमंत्री इस हाईस्पीड मैग्नेटिक लेविटेशन (Magnetic Levitation) ट्रेन में 50 किलोमीटर आगे और 50 किलोमीटर वापसी की टेस्ट राइड करेंगे। खास बात यह है कि जापान मैग्लेव ट्रेन पारंपरिक रेल प्रणाली से बिल्कुल अलग तकनीक पर आधारित है, जिसमें ट्रेन पटरी को छुए बिना चुंबकीय बल के सहारे हवा में तैरते हुए चलती है।
जापान मैग्लेव ट्रेन की 600 KM/H रफ्तार से यूपी की ट्रांसपोर्ट प्लानिंग को मिल सकता है विजन
तकनीकी विशेषज्ञों के मुताबिक, जापान मैग्लेव ट्रेन में ट्रेन और ट्रैक के बीच किसी प्रकार का भौतिक संपर्क नहीं होता, जिससे घर्षण (Friction) लगभग समाप्त हो जाता है। यही वजह है कि यह ट्रेन 600 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक की गति प्राप्त करने में सक्षम है। जापान सरकार टोक्यो से नागोया के बीच मैग्लेव कॉरिडोर को वर्ष 2027 तक शुरू करने की दिशा में तेजी से कार्य कर रही है, जिससे दोनों शहरों के बीच यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह अनुभव उत्तर प्रदेश में दीर्घकालिक परिवहन नीति निर्माण के लिए महत्वपूर्ण इनपुट प्रदान कर सकता है। प्रदेश में पहले से ही एक्सप्रेसवे नेटवर्क, मेट्रो परियोजनाओं और क्षेत्रीय रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल पर काम जारी है। ऐसे में जापान मैग्लेव ट्रेन जैसी भविष्यवादी तकनीक का प्रत्यक्ष अध्ययन प्रदेश में स्मार्ट मोबिलिटी और सतत (Sustainable) परिवहन व्यवस्था के विकास में सहायक हो सकता है।
भारत-जापान सहयोग से हाईस्पीड रेल सेक्टर में खुल सकते हैं नए अवसर
जापानी इंजीनियरों द्वारा विकसित इस प्रणाली में सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट (Superconducting Magnets) और उन्नत गाइडवे टेक्नोलॉजी का उपयोग किया गया है, जो उच्च गति के साथ-साथ बेहतर स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित करती है। फिलहाल ट्रायल चरण में संचालित जापान मैग्लेव ट्रेन को भविष्य के परिवहन की दिशा तय करने वाली तकनीक के रूप में देखा जा रहा है।
मुख्यमंत्री की यह प्रस्तावित टेस्ट राइड भारत-जापान तकनीकी सहयोग के व्यापक परिप्रेक्ष्य में भी अहम मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्ट मोबिलिटी, हाईस्पीड रेल और पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक परिवहन के क्षेत्र में सहयोग से उत्तर प्रदेश समेत देश के ट्रांसपोर्ट नेटवर्क को नई दिशा मिल सकती है।











