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मोहन भागवत से मुलाकात के बाद तेज हुई सियासी अटकलें, 2027 चुनाव की रणनीति पर मंथन के संकेत

On: February 19, 2026
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मोहन भागवत से मुलाकात के बाद तेज हुई सियासी अटकलें
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लखनऊ, 19 फरवरी 2026 (गुरुवार)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत के दो दिवसीय लखनऊ प्रवास ने प्रदेश की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मुलाकात के बाद गुरुवार सुबह दोनों उपमुख्यमंत्री—केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक—ने भी संघ प्रमुख से अलग-अलग भेंट की। इन सिलसिलेवार बैठकों को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है, और इसे सीधे तौर पर 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है।

निराला नगर स्थित संघ कार्यालय ‘सरस्वती कुंज’ में हुई यह मोहन भागवत से मुलाकात केवल औपचारिक शिष्टाचार भेंट नहीं मानी जा रही, बल्कि सरकार और संगठन के बीच जमीनी स्तर पर समन्वय को और मजबूत करने की कवायद के रूप में देखी जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, इन बैठकों में जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रभावी क्रियान्वयन से लेकर बूथ स्तर तक संगठन की सक्रियता बढ़ाने जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।

बुधवार शाम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी संघ प्रमुख से करीब 40 मिनट तक बातचीत की थी। इस दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति, औद्योगिक विकास की दिशा और प्रदेश में निवेश को आकर्षित करने के लिए बनाए जा रहे विशेष निवेश क्षेत्रों पर विचार-विमर्श होने की जानकारी सामने आई है। साथ ही, अवैध रोहिंग्या प्रवासियों के खिलाफ चल रही कार्रवाई और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े विषय भी बैठक के एजेंडे में शामिल रहे।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में चुनावी सफलता के लिए बूथ स्तर पर संगठन की सक्रियता निर्णायक भूमिका निभाती है। ऐसे में मोहन भागवत से मुलाकात के जरिए सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने की कोशिशें आगामी चुनावी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही हैं।

उधर, बुधवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित एक कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने सामाजिक समरसता पर जोर देते हुए कहा कि आधुनिक समाज में छुआछूत जैसी कुरीतियों के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए। उनके इस बयान को भी सामाजिक स्तर पर संवाद और समावेशिता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री और दोनों उपमुख्यमंत्रियों की अलग-अलग मुलाकातों ने यह साफ संकेत दे दिया है कि आने वाले समय में सरकार और संगठन के बीच तालमेल को और मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जाएगा, ताकि नीतियों का लाभ अंतिम पायदान तक पहुंचे और राजनीतिक स्तर पर भी मजबूत आधार तैयार किया जा सके।

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