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लखपति दीदी योजना: 3.5 करोड़ महिलाएं बनीं लखपति दीदी, शिवराज सिंह चौहान ने सुनी समस्याएं; 6 करोड़ का है लक्ष्य

On: September 3, 2026
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लखपति दीदी योजना, शिवराज सिंह चौहान ने सुनी समस्याएं
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नई दिल्ली/3 सितंबर 2026: महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में केंद्र सरकार की लखपति दीदी योजना को लेकर सरकार ने एक बार फिर अपने बड़े लक्ष्य को दोहराया है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को मुंबई में स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जुड़ी महिलाओं से बातचीत की और उनकी व्यावहारिक समस्याओं को समझने की कोशिश की।

चौहान ने ‘लखपति दीदियों’ के साथ वृक्षारोपण अभियान में भी हिस्सा लिया। उन्होंने बताया कि अब तक करीब 3.5 करोड़ महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं, जबकि सरकार ने देश में 6 करोड़ लखपति दीदियां बनाने का लक्ष्य रखा है। बैठक में खास तौर पर बैंक लोन लेने में आ रही अड़चनों, दस्तावेजों और बैंकिंग प्रक्रियाओं से जुड़ी शिकायतों पर चर्चा हुई।

लखपति दीदी योजना के तहत 3.5 करोड़ महिलाओं ने हासिल किया मुकाम

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में छह करोड़ लखपति दीदियां बनाने का संकल्प लिया है। उनके मुताबिक, इस दिशा में अब तक लगभग 3.5 करोड़ महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं।

मुंबई में कार्यक्रम के दौरान महिलाओं के साथ पेड़ लगाने के बाद चौहान ने कहा कि सरकार छह करोड़ के लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।

लखपति दीदी पहल का व्यापक उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को ऐसे स्थायी आजीविका साधनों से जोड़ना है, जिससे उनकी वार्षिक घरेलू आय को एक लाख रुपये या उससे अधिक के स्तर तक पहुंचाने में मदद मिले। गांवों और छोटे कस्बों में यह पहल महिलाओं के आर्थिक फैसलों में उनकी भूमिका बढ़ाने का जरिया भी बन रही है।

बैंक लोन में देरी और औपचारिकताओं की महिलाओं ने बताई समस्या

कार्यक्रम का एक अहम हिस्सा महिलाओं की समस्याएं सुनना रहा। चौहान ने माना कि कई बार बैंकिंग प्रक्रिया में ज्यादा औपचारिकताओं और लोन मिलने में देरी के कारण स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को अपना कारोबार शुरू करने या उसका विस्तार करने में परेशानी आती है।

उन्होंने बताया कि बैंकरों के साथ बैठक से पहले महिलाओं के साथ बातचीत इसलिए रखी गई, ताकि उनकी वास्तविक दिक्कतों को सीधे समझा जा सके।

महिलाओं ने बताया कि कारोबार शुरू करने के लिए पूंजी की जरूरत होती है, लेकिन बैंक ऋण की प्रक्रिया लंबी होने पर उनके सामने व्यावहारिक संकट खड़ा हो जाता है। सरकार अब ऐसी बाधाओं को कम करने पर जोर दे रही है।

चार बार व्यक्तिगत लोन मिला, फिर भी दूसरी महिलाओं को क्यों नहीं?

बातचीत के दौरान असम, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और उत्तराखंड की 100 से ज्यादा लखपति दीदियां वर्चुअल माध्यम से जुड़ीं। इस दौरान सीएसपी सेंटर चलाने वाली एक महिला ने अपनी समस्या साझा की।

उन्होंने बताया कि उन्हें चार बार व्यक्तिगत लोन मिल चुका है, लेकिन दूसरी महिलाओं को इसी तरह का लाभ नहीं मिल पाया। कुछ बैंक शाखाओं की ओर से एक से अधिक आवेदन लेने से भी इनकार किए जाने की शिकायत सामने आई।

इस पर शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बैंक से पूछा जाएगा कि वे एक से अधिक आवेदन क्यों नहीं ले रहे हैं। इस प्रतिक्रिया से संकेत मिलता है कि सरकार केवल योजनाओं के आंकड़ों पर नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर उनके क्रियान्वयन में आ रही अड़चनों पर भी ध्यान देना चाहती है।

पति का खराब CIBIL स्कोर बना महिलाओं के लिए परेशानी

महाराष्ट्र के एक स्वयं सहायता समूह की महिला ने बैंक लोन से जुड़ी एक दूसरी महत्वपूर्ण समस्या सामने रखी। उन्होंने बताया कि आदिवासी समुदाय की कई महिलाओं के पास बैंकिंग के लिए जरूरी डिजिटल दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। इसके अलावा कुछ मामलों में पति का CIBIL स्कोर खराब होने के कारण महिलाओं को ऋण हासिल करने में कठिनाई हो रही है।

यह समस्या इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि स्वयं सहायता समूहों के जरिए आर्थिक गतिविधियों में शामिल महिलाओं की अपनी आय और वित्तीय पहचान बढ़ रही है। ऐसे में किसी दूसरे व्यक्ति की क्रेडिट हिस्ट्री का असर महिला के ऋण आवेदन पर पड़ना उनके लिए बाधा बन सकता है।

चौहान ने इस मुद्दे को बैंक अधिकारियों के सामने उठाने का भरोसा दिया।

जल्द शुरू होगी हेल्पलाइन

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि ‘दीदियों’ को अपना काम शुरू करने में जिन भी रुकावटों का सामना करना पड़ रहा है, उन्हें दूर किया जाए। इसके लिए उन्होंने जल्द हेल्पलाइन शुरू करने की बात कही।

सरकार की नजर में यह पहल केवल महिलाओं को ऋण उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को कारोबार, बैंकिंग और बाजार से जोड़ना भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में शिकायतों के लिए एक समर्पित व्यवस्था बनने से योजनाओं के लाभ तक पहुंचने में आने वाली छोटी लेकिन महत्वपूर्ण अड़चनें कम हो सकती हैं।

6 करोड़ लखपति दीदियां बनाने के लक्ष्य पर सरकार का जोर

सरकार ने 6 करोड़ लखपति दीदियां बनाने का लक्ष्य तय किया है। अब तक करीब 3.5 करोड़ महिलाओं के इस श्रेणी में पहुंचने का दावा सरकार की ओर से किया गया है। इसके बाद अगली चुनौती शेष महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने और उन्हें टिकाऊ आय के अवसर उपलब्ध कराने की है।

मुंबई में हुई बातचीत से यह भी स्पष्ट हुआ कि लक्ष्य हासिल करने के लिए केवल योजना की घोषणा पर्याप्त नहीं होगी। बैंकिंग सुविधाओं तक आसान पहुंच, दस्तावेजों की उपलब्धता, ऋण प्रक्रिया में तेजी और स्थानीय स्तर पर मार्गदर्शन जैसे पहलुओं को भी मजबूत करना होगा। यही वे कड़ियां हैं, जो किसी सरकारी योजना के आंकड़े को जमीन पर वास्तविक आर्थिक बदलाव में बदलती हैं।

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