नई दिल्ली (16 मार्च 2026)। संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में सोमवार का दिन कुछ मायनों में अलग रहा। कई दिनों से विपक्षी विरोध और नारेबाजी के कारण बाधित हो रही लोकसभा की कार्यवाही में इस बार प्रश्नकाल बिना किसी रुकावट के पूरा हुआ। हालांकि, संसद के उच्च सदन राज्यसभा में माहौल उतना शांत नहीं रहा और पश्चिम एशिया संकट तथा एलपीजी कीमतों के मुद्दे पर विपक्षी दलों ने जोरदार हंगामा किया।
पिछले कुछ दिनों से संसद में लगातार गतिरोध का माहौल बना हुआ था, जिससे विधायी कार्य प्रभावित हो रहे थे। ऐसे में सोमवार को लोकसभा में शांतिपूर्ण तरीके से चला प्रश्नकाल संसदीय कार्यवाही के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कई दिनों बाद लोकसभा में सुचारू रूप से चला प्रश्नकाल
सोमवार सुबह जब लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई तो कुछ विपक्षी सांसदों ने तुरंत अपनी चिंताओं को उठाने की मांग की। वे पश्चिम एशिया की स्थिति और घरेलू मुद्दों पर सरकार से जवाब चाहते थे।
इस पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदस्यों से संयम बरतने की अपील करते हुए कहा कि वे अपनी बात प्रश्नकाल समाप्त होने के बाद रख सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष को दोपहर 12 बजे के बाद अपने मुद्दे उठाने का पूरा अवसर दिया जाएगा।
अध्यक्ष की इस अपील का असर दिखाई दिया और सदन में व्यवस्थित तरीके से प्रश्नकाल पूरा किया गया। संसद के जानकारों के मुताबिक बजट सत्र के दूसरे चरण में यह पहला मौका है जब बिना किसी बाधा के प्रश्नकाल संचालित हुआ।
पिछले सप्ताह विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शन के कारण सुबह 11 बजे से दोपहर 12 बजे तक चलने वाला प्रश्नकाल कई बार स्थगित करना पड़ा था, जिससे सदन की कार्यवाही प्रभावित हुई थी।
राज्यसभा में पश्चिम एशिया और एलपीजी मुद्दे पर हंगामा
जहां लोकसभा में कार्यवाही अपेक्षाकृत शांत रही, वहीं राज्यसभा में विपक्षी दलों ने पश्चिम एशिया संकट और एलपीजी की बढ़ती कीमतों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की।
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी शुरू कर दी और सरकार से तत्काल चर्चा की मांग की। कई सदस्यों ने इन मुद्दों पर स्थगन प्रस्ताव लाने की भी कोशिश की।
हंगामे के कारण राज्यसभा की कार्यवाही बार-बार बाधित होती रही और सदन में सामान्य कामकाज प्रभावित हुआ। विपक्ष का कहना है कि आम लोगों से जुड़े मुद्दों पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए, जबकि सत्ता पक्ष ने विपक्ष पर संसद की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया।
स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ प्रस्ताव पहले ही हो चुका है खारिज
इस पूरे घटनाक्रम के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के लिए विपक्ष द्वारा लाया गया प्रस्ताव भी हाल ही में चर्चा में रहा था। दो दिनों तक चली बहस के बाद 10 मार्च को यह प्रस्ताव सदन में गिर गया।
विपक्ष ने आरोप लगाया था कि अध्यक्ष सदन के संचालन में सत्ता पक्ष के प्रति पक्षपात कर रहे हैं और विपक्ष की चिंताओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा। हालांकि बहस के बाद सदन ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।
सांसदों के आचरण को लेकर स्पीकर ने जताई चिंता
संसद की कार्यवाही में लगातार हो रहे हंगामे को देखते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने रविवार को सभी राजनीतिक दलों के नेताओं को पत्र लिखकर चिंता जताई थी।
अपने पत्र में उन्होंने कहा कि भारतीय संसद की परंपरा हमेशा से गरिमापूर्ण बहस और संवाद की रही है। लेकिन हाल के समय में कुछ सदस्यों द्वारा सदन के भीतर और बाहर बैनर, तख्तियां और पोस्टर दिखाने जैसी गतिविधियों से संसद की गरिमा प्रभावित हो रही है।
उन्होंने सभी दलों के नेताओं से आग्रह किया कि वे अपने सांसदों के बीच अनुशासन बनाए रखने और उच्च नैतिक आचरण सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी निभाएं, ताकि संसद की प्रतिष्ठा और लोकतांत्रिक परंपराएं सुरक्षित रह सकें।












