नई दिल्ली/26 अक्टूबर 2026: शेयर बाजार में निवेश करने वाले लोगों और विदेशी निवेशकों के लिए लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स से जुड़ी खबर अहम हो सकती है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार इक्विटी पर लगने वाले LTCG टैक्स के ढांचे की समीक्षा कर रही है। आने वाले हफ्तों में इस पर फैसला संभव बताया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, सरकार इस बात पर विचार कर रही है कि भारत में इक्विटी निवेश पर लगने वाले टैक्स को वैश्विक बाजारों में लागू व्यवस्थाओं के अनुरूप किस तरह बेहतर बनाया जा सकता है। इसका उद्देश्य भारतीय शेयर बाजार को घरेलू और विदेशी निवेशकों के लिए अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना हो सकता है। हालांकि, टैक्स में कटौती या किसी नई दर की आधिकारिक घोषणा अभी मानकर नहीं चलना चाहिए।
LTCG टैक्स में क्या बदलाव हो सकता है?
मनीकंट्रोल की 26 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार घरेलू और विदेशी निवेशकों के लिए इक्विटी पर लगने वाले LTCG टैक्स के मौजूदा ढांचे की समीक्षा कर रही है। इस संबंध में उद्योग जगत, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI), केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT), बैंकों और अन्य संबंधित पक्षों से विचार-विमर्श किए जाने की जानकारी भी रिपोर्ट में दी गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में लागू पूंजीगत लाभ कर की दरों से भारतीय व्यवस्था की तुलना कर रही है। इसका उद्देश्य यह समझना है कि मौजूदा टैक्स व्यवस्था विदेशी निवेशकों के फैसलों और भारतीय इक्विटी की प्रतिस्पर्धात्मकता को किस तरह प्रभावित करती है।
हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार टैक्स दर घटाने, गणना के तरीके में बदलाव करने या किसी दूसरे विकल्प को अपनाने पर अंतिम फैसला करेगी।
फिलहाल कितना लगता है LTCG टैक्स?
आयकर विभाग की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, पात्र सूचीबद्ध इक्विटी शेयरों, इक्विटी-आधारित म्यूचुअल फंड की यूनिट और संबंधित बिजनेस ट्रस्ट यूनिट पर लागू नियमों के तहत सालाना कुल 1.25 लाख रुपये से अधिक के दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ पर 12.5 प्रतिशत टैक्स लगता है। यह व्यवस्था 23 जुलाई 2024 से किए गए संबंधित हस्तांतरणों पर लागू है और इसमें इंडेक्सेशन का लाभ नहीं मिलता।
| विवरण | मौजूदा व्यवस्था |
|---|---|
| LTCG टैक्स दर | 12.5% |
| सूचीबद्ध इक्विटी पर सालाना सीमा | ₹1.25 लाख |
| सीमा से अधिक पात्र लाभ पर टैक्स | 12.5% |
| इंडेक्सेशन का लाभ | उपलब्ध नहीं |
यह व्यवस्था संबंधित कानूनी शर्तों और प्रतिभूति लेनदेन कर (STT) जैसी लागू आवश्यकताओं के अधीन है। सभी प्रकार के शेयरों और पूंजीगत परिसंपत्तियों पर एक जैसे नियम लागू नहीं होते।
विदेशी निवेशकों के लिए डॉलर में मुनाफे की गणना पर विचार
इस रिपोर्ट का एक महत्वपूर्ण पहलू विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के पूंजीगत लाभ की गणना से जुड़ा है। सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि सरकार इस विकल्प पर विचार कर रही है कि विदेशी निवेशकों के लाभ की गणना रुपये के बजाय डॉलर के आधार पर की जाए। फिलहाल, पूंजीगत लाभ की गणना रुपये में होती है।
इसे समझने के लिए एक उदाहरण लें। मान लीजिए कि किसी विदेशी निवेशक ने डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर 90 होने पर भारतीय शेयरों में निवेश किया और बाद में दर 100 रुपये प्रति डॉलर होने पर निवेश बेच दिया। ऐसी स्थिति में रुपये में दिखने वाला मुनाफा और डॉलर में निवेशक को मिलने वाला वास्तविक रिटर्न अलग हो सकता है।
विदेशी निवेशकों के लिए मुद्रा विनिमय में बदलाव महत्वपूर्ण होता है। इसलिए डॉलर आधारित गणना का प्रस्ताव उनके वास्तविक रिटर्न को टैक्स के आकलन में ध्यान में रखने से जुड़ा है। लेकिन यह अभी विचाराधीन प्रस्ताव है, लागू नियम नहीं।
भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों की निकासी बनी चिंता
LTCG टैक्स की समीक्षा के पीछे विदेशी निवेश के प्रवाह को लेकर चिंता भी एक अहम संदर्भ है। मनीकंट्रोल की रिपोर्ट में सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड (CDSL) के आंकड़ों के हवाले से बताया गया है कि 2026 में अब तक भारतीय इक्विटी से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की कुल निकासी 3.1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। इसके मुकाबले पूरे 2025 में यह आंकड़ा 1.7 लाख करोड़ रुपये था।
विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी से बाजार में निवेश प्रवाह, शेयरों की मांग और रुपये पर दबाव जैसे मुद्दे चर्चा में आते हैं। हालांकि, विदेशी निवेश के फैसले केवल टैक्स पर निर्भर नहीं करते। बाजार का मूल्यांकन, कंपनियों की कमाई, वैश्विक ब्याज दरें, मुद्रा विनिमय और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
कब हो सकता है LTCG टैक्स पर फैसला?
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सरकार आने वाले हफ्तों में और अगले बजट से पहले LTCG टैक्स के पुनर्गठन पर फैसला ले सकती है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि 13 अक्टूबर को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने LTCG टैक्स हटाने के प्रस्ताव पर विचार जानने की सरकार की इच्छा का उल्लेख किया था।
फिलहाल, सरकार की ओर से नई टैक्स दर या किसी अंतिम बदलाव की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इसलिए निवेशकों को किसी संभावित राहत के आधार पर निवेश या शेयर बेचने का निर्णय लेने से पहले आधिकारिक अधिसूचना का इंतजार करना चाहिए।
निष्कर्ष: LTCG टैक्स के पुनर्गठन पर संभावित फैसला घरेलू निवेशकों और विदेशी फंडों, दोनों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। लेकिन टैक्स दर में बदलाव, डॉलर आधारित गणना या किसी अन्य राहत को अभी प्रस्ताव और विचार-विमर्श के स्तर पर ही समझना चाहिए।












