लखनऊ/16 जुलाई 2026: राजधानी लखनऊ में आने वाले वर्षों में सड़क नेटवर्क की तस्वीर पूरी तरह बदलने वाली है। तेजी से बढ़ते ट्रैफिक और शहर के विस्तार को देखते हुए लखनऊ मेगा इंटरचेंज परियोजना के तहत पांच आधुनिक इंटरचेंज बनाए जाएंगे। करीब 680 करोड़ रुपये की लागत वाली इस योजना का उद्देश्य एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय राजमार्गों को इस तरह जोड़ना है कि वाहनों को बार-बार रुकना न पड़े और लंबी दूरी का सफर पहले से कहीं अधिक तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक बन सके।
लखनऊ, 16 जुलाई 2026। उत्तर प्रदेश स्टेट कैपिटल रीजन (SCR) योजना के अंतर्गत प्रस्तावित इस महत्वाकांक्षी परियोजना को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर विकसित करेंगे। परियोजना का प्रारंभिक प्रस्ताव शासन के समक्ष प्रस्तुत किया जा चुका है।
क्यों जरूरी पड़े नए इंटरचेंज?
वर्तमान में कई एक्सप्रेसवे और हाईवे ऐसे बिंदुओं पर मिलते हैं, जहां वाहनों को क्रॉसिंग के कारण रुकना पड़ता है। यही वजह है कि पीक आवर्स में लंबा ट्रैफिक जाम लगना आम बात हो गई है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद वाहन बिना किसी सिग्नल या बाधा के एक हाईवे से दूसरे हाईवे या एक्सप्रेसवे पर सीधे प्रवेश कर सकेंगे। इससे न केवल यात्रा का समय कम होगा, बल्कि ट्रैफिक का दबाव भी संतुलित रहेगा।
विशेष रूप से लखनऊ, कानपुर, सीतापुर और बाराबंकी की ओर आने-जाने वाले लाखों यात्रियों को इसका सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
ईंधन की बचत के साथ सड़क सुरक्षा भी होगी बेहतर
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार ब्रेक और एक्सीलेटर लगाने की जरूरत कम होने से पेट्रोल और डीजल की खपत में भी कमी आएगी। वहीं, हाईवे पर बनने वाले क्रॉसिंग पॉइंट घटने से सड़क दुर्घटनाओं का जोखिम भी पहले की तुलना में कम होगा।
योजना से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि ये इंटरचेंज केवल यातायात सुधार तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि भविष्य में लखनऊ को एक बड़े लॉजिस्टिक और ट्रांसपोर्ट हब के रूप में विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
इन स्थानों पर बनेंगे पांच आधुनिक इंटरचेंज
योजना के तहत अलग-अलग ट्रैफिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पांच प्रकार के इंटरचेंज प्रस्तावित किए गए हैं।
- क्लोवरलीफ इंटरचेंज – गंगा एक्सप्रेसवे और लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के जंक्शन पर, जहां चारों दिशाओं से निर्बाध आवागमन संभव होगा।
- ट्रम्पेट इंटरचेंज – एनएच-27 और एनएच-727एच के बीच कनेक्टिविटी के लिए।
- ट्रम्पेट इंटरचेंज – एनएच-30 और स्टेट हाईवे-38 के जंक्शन पर।
- डायमंड इंटरचेंज – आउटर रिंग रोड और एनएच-731 के बीच।
- पार्शियल क्लोवरलीफ इंटरचेंज – आउटर रिंग रोड, एनएच-30 और सीतापुर मार्ग को जोड़ने के लिए।
इन इलाकों में विकसित होंगे प्रमुख जंक्शन
प्रस्ताव के अनुसार इंटरचेंज और जंक्शन निम्न स्थानों के आसपास विकसित किए जाएंगे—
- सराय कटियान
- अमेठी/सलेमपुर रोड
- भैंसामऊ
- बाराबंकी सिविल लाइन
- सवाईया तिराहा
इन स्थानों का चयन भविष्य के ट्रैफिक दबाव, क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और औद्योगिक विकास की संभावनाओं को ध्यान में रखकर किया गया है।
दो चरणों में पूरा होगा पूरा प्रोजेक्ट
परियोजना को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना है ताकि निर्माण कार्य के दौरान आम लोगों को कम से कम परेशानी हो। अधिकारियों के अनुसार पहले चरण में सबसे अधिक ट्रैफिक वाले जंक्शनों पर काम शुरू किया जाएगा, जबकि दूसरे चरण में शेष इंटरचेंज विकसित किए जाएंगे।
लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि स्टेट कैपिटल रीजन योजना के तहत पांच प्रमुख जंक्शन विकसित करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है और इसका प्रेजेंटेशन शासन के समक्ष प्रस्तुत किया जा चुका है। आवश्यक स्वीकृतियां मिलने के बाद परियोजना पर आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
शहरी विकास विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह परियोजना तय समय पर पूरी होती है तो आने वाले वर्षों में लखनऊ का सड़क नेटवर्क न केवल अधिक आधुनिक बनेगा, बल्कि राजधानी की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।









