नई दिल्ली/27 सितंबर 2026: मानसून की विदाई का दौर शुरू हो चुका है, लेकिन मौसम ने अचानक करवट ले ली है। बंगाल की खाड़ी से जुड़े मौसम तंत्र और उत्तर भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से कई राज्यों में बारिश का दौर तेज हुआ है। उत्तर प्रदेश में पिछले 24 घंटे के दौरान सामान्य से करीब 19 गुना अधिक बारिश दर्ज की गई, जबकि उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने भारी से बहुत भारी बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है।
दूसरी ओर महाराष्ट्र में तस्वीर बिल्कुल अलग है। राज्य सरकार ने कम बारिश और लंबे शुष्क दौर के चलते 358 में से 265 तालुकाओं में सूखे की स्थिति घोषित की है। ये तालुका 32 जिलों में फैले हैं और राज्य के करीब 74 फीसदी तालुकाओं को कवर करते हैं।
मौसम का यूटर्न: यूपी में सामान्य से 19 गुना ज्यादा बारिश
उत्तर प्रदेश में पिछले 24 घंटे के दौरान बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। ताजा सरकारी आंकड़ों के मुताबिक राज्य में बारिश से जुड़ी घटनाओं में 10 लोगों की मौत और 17 लोग घायल हुए हैं। कई जगह पेड़ गिरने, मकान क्षतिग्रस्त होने, जलभराव और बिजली आपूर्ति बाधित होने की घटनाएं सामने आई हैं।
लखनऊ में 21 घंटे में 125.8 मिमी बारिश दर्ज की गई। वहीं बांदा में 227.6 मिमी, फतेहगढ़ में 224 मिमी, नानपारा में 217 मिमी, हरदोई में 214 मिमी, कायमगंज में 210 मिमी, हमीरपुर में 210 मिमी और कन्नौज में 204 मिमी बारिश दर्ज हुई।
इतनी तेज बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव और कुछ क्षेत्रों में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
यूपी और उत्तराखंड में भारी बारिश का अलर्ट
IMD के 27 सितंबर के पूर्वानुमान के अनुसार उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है। मौसम विभाग ने उत्तर भारत में सक्रिय मौसम प्रणालियों के प्रभाव को देखते हुए सतर्कता बरतने की सलाह दी है।
उत्तर प्रदेश में बारिश के पीछे उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश और उससे सटे उत्तरी छत्तीसगढ़ के ऊपर बना डिप्रेशन भी एक प्रमुख कारण है। इसके प्रभाव से पहले मध्य भारत और फिर उत्तर भारत के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ी हैं।
बंगाल की खाड़ी के सिस्टम और पश्चिमी विक्षोभ का असर
मौसम में इस बदलाव के पीछे एक साथ सक्रिय मौसम प्रणालियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। बंगाल की खाड़ी से विकसित हुआ सिस्टम उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ा, जबकि पश्चिमी विक्षोभ भी उत्तर भारत में सक्रिय रहा। दोनों के बीच बनी परिस्थितियों ने वातावरण में नमी बढ़ाई और बारिश की गतिविधि तेज हुई।
यही वजह है कि मानसून की वापसी शुरू होने के बावजूद कुछ इलाकों में बारिश का जोर कम होने के बजाय बढ़ गया है। मौसम का यह बदलाव खास तौर पर उत्तर प्रदेश और आसपास के राज्यों में दिखाई दे रहा है।
ओडिशा में भारी बारिश का दौर अब कमजोर
ओडिशा में पिछले दिनों हुई तेज बारिश के बाद रविवार से भारी बारिश की गतिविधि में कमी आने का अनुमान है। IMD के अनुसार 27 सितंबर से 2 अक्टूबर तक राज्य में भारी बारिश की संभावना नहीं है, हालांकि कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक जारी रह सकती है।
पिछले 24 घंटों में मयूरभंज, नबरंगपुर, बालासोर, ढेंकनाल, खुर्दा, क्योंझर, गंजाम, सुंदरगढ़ और कटक में भारी से बहुत भारी बारिश दर्ज की गई। मयूरभंज के नवाना में 130 मिमी बारिश रिकॉर्ड हुई।
महाराष्ट्र में 265 तालुकाओं में सूखे की घोषणा
जब उत्तर और पूर्वी भारत के कई हिस्से बारिश से परेशान हैं, वहीं महाराष्ट्र के बड़े हिस्से में पानी की कमी की स्थिति बनी हुई है। राज्य सरकार ने 358 में से 265 तालुकाओं में सूखे की स्थिति घोषित की है।
ये तालुका 32 जिलों में फैले हैं और राज्य के लगभग 74 फीसदी तालुकाओं के बराबर हैं। सरकार ने सूखा प्रबंधन नियमों के तहत निर्धारित मानकों के आधार पर यह फैसला लिया है।
राज्य के आंकड़ों के मुताबिक 1 जून से 18 सितंबर के बीच महाराष्ट्र में 755.9 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य बारिश 932.3 मिमी होती है। इस हिसाब से बारिश में करीब 18.8 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
बारिश कहीं राहत तो कहीं आफत
इस बार मौसम की तस्वीर एक जैसी नहीं है। एक तरफ उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में अचानक हुई तेज बारिश ने जलभराव, बाढ़ और नुकसान की चिंता बढ़ा दी है, तो दूसरी ओर महाराष्ट्र के बड़े हिस्से में बारिश की कमी के कारण सूखे की स्थिति पैदा हो गई है।
मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान से संकेत मिलता है कि मानसून की वापसी के बावजूद सितंबर के अंतिम दिनों में बारिश पूरी तरह थमने वाली नहीं है। ऐसे में किसानों, प्रशासन और आम लोगों के लिए स्थानीय मौसम चेतावनियों पर नजर रखना जरूरी होगा।













