नई दिल्ली, 23 फरवरी 2026। बैंकों द्वारा ग्राहकों को जबरन बीमा और अन्य वित्तीय उत्पाद बेचने की बढ़ती शिकायतों के बीच वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने सोमवार को कड़ा रुख अपनाया। बजट के बाद Reserve Bank of India (आरबीआई) के निदेशक मंडल के साथ बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने साफ शब्दों में कहा— “बैंक अपने मुख्य व्यवसाय (कोर बिजनेस) पर ध्यान दें और मिस-सेलिंग बंद करें।”
उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब सोशल मीडिया और उपभोक्ता मंचों पर ग्राहकों की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। कई लोगों का आरोप है कि बैंक अधिकारी सामान्य बैंकिंग सेवाओं से अधिक बीमा पॉलिसी और अन्य उत्पाद बेचने पर जोर दे रहे हैं।
मिस-सेलिंग पर वित्त मंत्री की दो टूक चेतावनी
वित्त मंत्री ने विशेष रूप से होम लोन के साथ अनावश्यक बीमा बेचने की प्रवृत्ति पर नाराज़गी जताई। उन्होंने कहा कि कई मामलों में संपत्ति पहले से गिरवी (mortgaged) होने और ग्राहक के पास पहले से बीमा होने के बावजूद अतिरिक्त पॉलिसी खरीदने का दबाव बनाया जाता है।
यह न केवल उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि बैंकिंग प्रणाली की विश्वसनीयता (credibility) पर भी सवाल खड़ा करता है।
सीतारमण ने यह भी याद दिलाया कि पहले आरबीआई और Insurance Regulatory and Development Authority of India (आईआरडीएआई) के बीच कुछ रेगुलेटरी गैप (नियामकीय अंतर) की शिकायतें आती थीं, जिससे ग्राहक असमंजस में पड़ जाते थे। हालांकि अब समन्वय बेहतर हुआ है, फिर भी जमीनी स्तर पर सुधार की जरूरत है।
आरबीआई के नए दिशानिर्देश: 1 जुलाई 2026 से लागू
गौरतलब है कि 11 फरवरी 2026 को आरबीआई ने मिस-सेलिंग रोकने के लिए सख्त दिशानिर्देश जारी किए हैं। इन नियमों के तहत:
- ग्राहकों को स्पष्ट और पारदर्शी जानकारी देना अनिवार्य होगा।
- बैंक अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
- गलत बिक्री पर दंडात्मक कार्रवाई संभव होगी।
ये नियम 1 जुलाई 2026 से लागू होंगे। वित्त मंत्री ने इन कदमों का स्वागत करते हुए कहा कि इससे बैंकों को स्पष्ट संदेश जाएगा कि वे गलत तरीके से उत्पाद नहीं बेच सकते।
बैठक में आरबीआई गवर्नर Sanjay Malhotra भी मौजूद थे।
सोने की बढ़ती कीमतों पर सरकार की नजर
पत्रकारों ने जब सोने की कीमतों में हालिया उछाल पर सवाल किया, तो वित्त मंत्री ने इसका कारण वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंकों द्वारा बढ़ी खरीद को बताया।
उन्होंने कहा कि पहले सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव मुख्यतः भारत और चीन जैसे बड़े उपभोक्ता देशों की मांग से प्रभावित होता था, लेकिन अब दुनिया के कई केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार को विविधीकृत (diversify) करने के लिए सोना और चांदी खरीद रहे हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में तेज वृद्धि देखी गई है।
सोना आयात: आरबीआई ने क्या कहा?
आरबीआई गवर्नर मल्होत्रा ने आंकड़ों के साथ स्थिति स्पष्ट की।
- अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच सोना आयात 50 अरब डॉलर रहा।
- यह पिछले वर्ष की समान अवधि से लगभग 1 अरब डॉलर अधिक है।
- जनवरी 2026 में आयात मात्रा और मूल्य दोनों में तेज वृद्धि दर्ज की गई है।
हालांकि उन्होंने कहा कि फिलहाल यह गंभीर चिंता का विषय नहीं है, क्योंकि भारतीय अर्थव्यवस्था आंतरिक और बाहरी दोनों मोर्चों पर स्थिर और मजबूत प्रदर्शन कर रही है।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि सरकार की नीतियां, व्यापारिक समझौते और विदेशी निवेश को आकर्षित करने के प्रयास चालू खाते की स्थिति को संतुलित रखने में मदद करेंगे।
निष्कर्ष: बैंकिंग सेक्टर के लिए स्पष्ट संदेश
इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि सरकार अब बैंकिंग क्षेत्र में अनुशासन (discipline) और जवाबदेही (accountability) को लेकर कोई नरमी नहीं बरतना चाहती।
मिस-सेलिंग जैसे मुद्दे केवल वित्तीय लेन-देन का सवाल नहीं हैं, बल्कि यह भरोसे (trust) की नींव से जुड़े हैं। और भरोसा एक बार टूट जाए, तो उसे वापस पाना आसान नहीं होता।
वित्त मंत्री का संदेश सीधा है—
बैंक बीमा एजेंसी नहीं हैं, उनका प्राथमिक दायित्व सुरक्षित और पारदर्शी बैंकिंग सेवाएं देना है।












