लखनऊ, 25 अगस्त 2026। उत्तर प्रदेश के दो दिवसीय दौरे के दूसरे दिन मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने मंगलवार को लखनऊ और आसपास के जिलों के करीब 500 बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) से संवाद किया। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में हुए इस कार्यक्रम में उन्होंने मतदाता सूची की शुद्धता और पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने पर खास जोर दिया।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि मतदाता सूची को सही और भरोसेमंद बनाए रखने की पहली जिम्मेदारी बूथ स्तर पर काम करने वाले अधिकारियों की है। उन्होंने BLO से कहा कि वे जमीनी स्तर पर सटीक जानकारी उपलब्ध कराएं, ताकि एक भी पात्र मतदाता का नाम सूची से न छूटे और डुप्लीकेट प्रविष्टियों की पहचान कर उन्हें हटाया जा सके।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार बोले- भ्रामक सूचनाओं से न घबराएं
ज्ञानेश कुमार ने SIR के दौरान BLO की ओर से किए गए काम की सराहना की। उन्होंने कहा कि उनके प्रयासों से मतदाता सूची को अधिक शुद्ध बनाने में मदद मिली है। उन्होंने BLO को भरोसा दिलाया कि भ्रामक सूचनाओं से उन्हें परेशान होने की जरूरत नहीं है और निर्वाचन आयोग उनके साथ मजबूती से खड़ा है।
उन्होंने कहा कि BLO जिम्मेदारी के साथ अपना काम करते रहें और जमीनी स्तर पर आने वाली समस्याओं तथा अपने उपयोगी सुझाव आयोग तक पहुंचाते रहें।
युवा और महिलाओं के नाम मतदाता सूची में जोड़ने पर जोर
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने पात्र युवाओं और महिलाओं को मतदाता सूची से जोड़ने पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने कहा कि विवाह के बाद दूसरी जगह रहने लगी महिला भी यदि पात्र है तो उसका नाम मतदाता सूची में होना चाहिए।
उन्होंने BLO से अपील की कि ऐसे पात्र लोगों की पहचान कर उनका नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए पहल करें। चुनाव आयोग के अनुसार पात्र भारतीय नागरिकों के लिए मतदाता के रूप में पंजीकरण की व्यवस्था निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत की जाती है।
डुप्लीकेट नाम हटाने में तकनीक की मदद लेने पर जोर
मतदाता सूची में एक ही व्यक्ति के नाम की एक से अधिक जगह मौजूदगी को लेकर भी बैठक में चर्चा हुई। ज्ञानेश कुमार ने कहा कि तकनीक की मदद से डुप्लीकेट नामों की पहचान करने और उन्हें हटाने की प्रक्रिया को बेहतर किया जा सकता है।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तकनीक तभी प्रभावी होगी, जब BLO की ओर से शुरुआत में उपलब्ध कराया गया डाटा सही और सटीक हो। यानी जमीनी सत्यापन और तकनीकी व्यवस्था को एक-दूसरे का पूरक बनाने पर जोर दिया गया।
निर्वाचन आयोग के ERO-NET जैसे डिजिटल सिस्टम का उद्देश्य मतदाता पंजीकरण, स्थानांतरण और नाम हटाने से जुड़ी प्रक्रियाओं को व्यवस्थित करना भी है।
ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की समस्या का मुद्दा उठा
BLO के साथ बातचीत में ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या भी सामने आई। अधिकारियों ने बताया कि कई जगह नेटवर्क कमजोर होने के कारण ऑनलाइन काम करने में परेशानी आती है।
BLO की ओर से मांग की गई कि जहां इंटरनेट उपलब्ध नहीं है, वहां ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन काम की सुविधा भी दी जानी चाहिए। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने इस सुझाव पर विचार करने का आश्वासन दिया।
दुर्घटना की स्थिति में बीमा लाभ की मांग
संवाद के दौरान संविदा कर्मियों के BLO के रूप में काम करने के दौरान दुर्घटना होने की स्थिति में बीमा लाभ देने का मुद्दा भी उठाया गया। BLO की ओर से इस संबंध में व्यवस्था की मांग की गई।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने इस सुझाव पर विचार करने की बात कही। इससे साफ है कि आयोग अब केवल मतदाता सूची की गुणवत्ता ही नहीं, बल्कि बूथ स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों की व्यावहारिक समस्याओं पर भी फीडबैक लेने पर जोर दे रहा है।
जनप्रतिनिधित्व कानून के प्रति लोगों को जागरूक करने पर जोर
ज्ञानेश कुमार ने लोगों को जनप्रतिनिधित्व कानून की व्यवस्थाओं के बारे में जागरूक करने की जरूरत भी बताई। उन्होंने कहा कि मतदाताओं को यह समझना जरूरी है कि एक व्यक्ति का नाम दो अलग-अलग स्थानों की मतदाता सूची में नहीं होना चाहिए।
आयोग का मौजूदा डिजिटल ढांचा भी मतदाता पंजीकरण, नाम में सुधार, स्थान परिवर्तन और अन्य सेवाओं को व्यवस्थित करने की दिशा में काम करता है।
बोले- BLO सही डाटा दें, आयोग तकनीक उपलब्ध कराएगा
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि BLO आयोग को सही डाटा और उपयोगी सुझाव उपलब्ध कराएं। आयोग की ओर से जरूरी तकनीकी साधन और व्यवस्था उपलब्ध कराने पर काम किया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि BLO की ओर से दिए गए अच्छे सुझावों को परिष्कृत करके भविष्य की योजनाओं में शामिल किया जा सकता है। इस तरह बूथ स्तर पर काम करने वालों का अनुभव चुनावी व्यवस्था को बेहतर बनाने में उपयोग किया जा सकता है।
AI के इस्तेमाल में जल्दबाजी नहीं करेगा चुनाव आयोग
निर्वाचन प्रक्रिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के इस्तेमाल को लेकर भी मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने सावधानी बरतने की बात कही। उन्होंने कहा कि आयोग इस मामले में जल्दबाजी नहीं करना चाहता।
उनके मुताबिक, चुनाव तकनीक के अधीन नहीं हो सकता। AI और दूसरी तकनीकें निर्वाचन प्रक्रिया को मजबूत करने का माध्यम हो सकती हैं, लेकिन उन्हें चुनावी व्यवस्था का विकल्प नहीं बनाया जा सकता।
मतदाता सूची की शुद्धता पर फोकस
लखनऊ में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और करीब 500 BLO के बीच हुई बातचीत का सबसे बड़ा संदेश यही रहा कि मतदाता सूची में शुद्धता और समावेश दोनों साथ-साथ जरूरी हैं। एक ओर डुप्लीकेट नामों की पहचान कर सूची को साफ करना है, तो दूसरी ओर किसी पात्र नागरिक का नाम गलती से छूटने नहीं देना है।
आयोग के सामने चुनौती बड़ी है, लेकिन BLO से सीधे फीडबैक लेने से जमीनी स्तर की समस्याओं को समझने का रास्ता खुलता है। खासकर ग्रामीण इलाकों में नेटवर्क, महिलाओं के नाम जोड़ने और तकनीक के इस्तेमाल जैसे मुद्दे आने वाले समय में मतदाता सूची सुधार की प्रक्रिया के लिए अहम रहेंगे।









