काठमांडू/26 अगस्त 2026: नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में बुधवार को आई भीषण फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी। भोटेकोशी नदी में अचानक आई बाढ़ ने रसुवा, धाडिंग और नुवाकोट समेत कई इलाकों में घरों, सड़कों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान पहुंचाया है। नेपाल में अब तक 95 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि करीब 500 लोग लापता बताए जा रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या में विदेशी यात्री और भारतीय नागरिक शामिल हैं।
इस आपदा का असर नेपाल तक सीमित नहीं है। बाढ़ के संभावित डाउनस्ट्रीम प्रभाव को देखते हुए भारत के उत्तर प्रदेश और बिहार के सीमावर्ती इलाकों में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। हालांकि, उत्तर प्रदेश में शुरुआती आकलन के मुताबिक राज्य के लिए बड़े खतरे की आशंका फिलहाल कम बताई गई है।
Nepal Flash Flood: कैसे मची इतनी बड़ी तबाही?
बाढ़ बुधवार सुबह करीब 9 बजे भोटेकोशी नदी में अचानक पानी बढ़ने के बाद आई। शुरुआती जांच में इसे सामान्य बारिश से जोड़कर नहीं देखा जा रहा है। नेपाल के अधिकारियों के मुताबिक रसुवा में बाढ़ के समय स्थानीय बारिश बेहद कम थी। प्रारंभिक सैटेलाइट विश्लेषण में नेपाल-तिब्बत सीमा के पास चट्टान खिसकने और नदी में अचानक भारी मात्रा में मलबा आने की बात सामने आई है।
कुछ रिपोर्टों में भूकंप के बाद ग्लेशियर या चट्टानी हिस्से के खिसकने से अचानक पानी का बहाव बढ़ने की आशंका जताई गई है। यानी पहाड़ों में हुई एक घटना का असर कुछ ही समय में नदी के रास्ते नीचे बसे इलाकों तक पहुंच गया।
बाढ़ का पानी इतनी तेजी से आया कि कई जगह लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। घर, सड़कें और पुल पानी और मलबे की चपेट में आ गए।
105 भारतीयों समेत सैकड़ों लोग लापता
नेपाल पर्यटन बोर्ड की शुरुआती सूची के अनुसार बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में 384 यात्री लापता बताए गए हैं। इनमें 291 विदेशी और 93 नेपाली नागरिक शामिल हैं। लापता विदेशी यात्रियों में कम से कम 105 भारतीय नागरिक और 37 एनआरआई बताए गए हैं।
लापता लोगों में अमेरिका, ब्रिटेन, मलेशिया, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और नीदरलैंड्स के नागरिक भी शामिल हैं। इनमें कई लोग तिब्बत स्थित कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जा रहे थे। यही वजह है कि भारत के लिए यह आपदा मानवीय चिंता के साथ-साथ अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण बन गई है।
नेपाल के अधिकारियों के मुताबिक सुरक्षाकर्मियों समेत कई लोग भी संपर्क से बाहर हैं। बचाव कार्य जारी है, लेकिन तबाह हो चुके सड़क संपर्क और खराब मौसम के कारण राहत दलों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
नेपाल में सड़क-पुल और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट तबाह
फ्लैश फ्लड ने नेपाल के बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। कई पुल बह गए और सड़क संपर्क टूट गया। कम से कम चार स्थायी पुलों और कुछ अस्थायी पुलों को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
जलविद्युत परियोजनाएं भी बाढ़ की चपेट में आई हैं। रिपोर्टों के अनुसार कम से कम एक दर्जन हाइड्रोपावर परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा है। सीमा क्षेत्र में संचार और परिवहन व्यवस्था प्रभावित होने से राहत एवं बचाव अभियान और चुनौतीपूर्ण हो गया है।
14 हेलीकॉप्टर राहत अभियान में लगाए गए
नेपाल सरकार ने राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है। प्रभावित क्षेत्रों में हेलीकॉप्टरों की मदद से लोगों को निकालने और जरूरी सामग्री पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, कुछ स्थानों पर हेलीपैड और सड़कें क्षतिग्रस्त होने से राहत दलों की आवाजाही प्रभावित हुई है।
नेपाल में बचाव अभियान के साथ-साथ नदी किनारे बसे लोगों को भी सतर्क किया गया है। अधिकारियों की चिंता इस बात को लेकर भी है कि ऊपर की ओर बने अवरोध के टूटने पर नदी का बहाव फिर अचानक बढ़ सकता है।
भारतीय दूतावास ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर
नेपाल में फंसे या लापता भारतीय नागरिकों की जानकारी के लिए काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं।
भारतीय दूतावास हेल्पलाइन:
+977 985 131 6807
+977 970 910 7500
दूतावास नेपाल सरकार और स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में है तथा प्रभावित भारतीय नागरिकों की सुरक्षित निकासी और सहायता के लिए समन्वय किया जा रहा है।
यूपी-बिहार में क्यों बढ़ाई गई सतर्कता?
नेपाल में आई बाढ़ का पानी नदी तंत्र के जरिए भारत की ओर भी असर डाल सकता है। इसी वजह से उत्तर प्रदेश और बिहार के सीमावर्ती जिलों में प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
खासकर गंडक और उससे जुड़े नदी क्षेत्रों में जलस्तर पर नजर रखी जा रही है। उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक नेपाल की बाढ़ से गंडक में पानी का प्रवाह बढ़ सकता है, लेकिन शुरुआती आकलन में महाराजगंज और कुशीनगर से गुजरते समय नदी के खतरे के निशान से नीचे रहने की उम्मीद है। इसके बाद नदी बिहार में प्रवेश करती है।
यानी फिलहाल उत्तर प्रदेश में तत्काल बड़े खतरे की स्थिति नहीं बताई जा रही, लेकिन नेपाल में हालात तेजी से बदलने के कारण नदी किनारे के इलाकों में निगरानी बढ़ाना जरूरी माना जा रहा है।
कैलाश मानसरोवर यात्रियों को लेकर बढ़ी चिंता
इस हादसे ने कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए भारतीय यात्रियों के परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। नेपाल-तिब्बत मार्ग से होकर जाने वाले यात्रियों की बड़ी संख्या बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में थी। पर्यटन बोर्ड की सूची में 105 भारतीयों के लापता होने की जानकारी सामने आई है।
ऐसे में अब सबसे बड़ी प्राथमिकता लापता यात्रियों की स्थिति का पता लगाना और सुरक्षित लोगों को प्रभावित क्षेत्र से बाहर निकालना है। नेपाल और भारत के अधिकारी इस दिशा में संपर्क और राहत प्रयासों को आगे बढ़ा रहे हैं।
आपदा ने हिमालयी क्षेत्र की बढ़ती चुनौती फिर दिखाई
नेपाल की यह त्रासदी एक बार फिर दिखाती है कि हिमालयी क्षेत्र में अचानक आने वाली बाढ़, भूस्खलन और ग्लेशियर से जुड़ी घटनाएं कितनी तेजी से गंभीर आपदा का रूप ले सकती हैं। सामान्य बारिश कम होने के बावजूद नदी में अचानक आया सैलाब इस खतरे की प्रकृति को और स्पष्ट करता है।
फिलहाल नेपाल में राहत और बचाव अभियान जारी है, जबकि भारत में सीमावर्ती नदी क्षेत्रों पर नजर रखी जा रही है। सबसे बड़ी चिंता उन सैकड़ों लोगों को लेकर है जिनका अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है।












