लखनऊ/25 जुलाई 2026: उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में कारोबार सुगमता (Ease of Doing Business) को नई गति देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। निवेश मित्र 3.0 के जरिए अब उद्योगों की मंजूरी प्रक्रिया पहले से अधिक तेज, पारदर्शी और जवाबदेह बनने जा रही है। नई व्यवस्था के तहत निवेश प्रस्ताव दाखिल करने से लेकर उद्योग में व्यावसायिक उत्पादन शुरू होने तक हर चरण की रीयल-टाइम डिजिटल मॉनिटरिंग की जाएगी। इससे निवेशकों को समय पर मंजूरी मिलने के साथ-साथ विभागीय देरी और अनावश्यक आपत्तियों पर भी प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।
डीरेगुलेशन-2.0 के तहत लागू हुई नई व्यवस्था
उत्तर प्रदेश सरकार ने डीरेगुलेशन-2.0 के तहत सिंगल विंडो सिस्टम में व्यापक सुधार करते हुए निवेश मित्र 3.0 को नई सुविधाओं से लैस किया है। इस प्रणाली में अब निवेशकों की पूरी फाइल यात्रा डिजिटल रूप से रिकॉर्ड होगी। आवेदन किस विभाग में कितने समय तक लंबित रहा, किस स्तर पर आपत्ति दर्ज हुई, कितनी बार अतिरिक्त जानकारी मांगी गई और स्वीकृति में कहां देरी हुई, इसकी पूरी जानकारी एकीकृत स्मार्ट डैशबोर्ड पर उपलब्ध रहेगी।
सरकार का उद्देश्य उद्योगों को अनावश्यक प्रशासनिक बाधाओं से राहत देना और निवेश प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाना है।
निवेशकों को मिलेगा तेज और पारदर्शी अनुभव
नई डिजिटल व्यवस्था के लागू होने के बाद निवेशक को हर चरण की ऑनलाइन जानकारी मिलेगी। इससे न केवल आवेदन की स्थिति स्पष्ट रहेगी, बल्कि विभागों के चक्कर लगाने की जरूरत भी काफी कम हो जाएगी।
स्मार्ट डैशबोर्ड के माध्यम से शासन और संबंधित विभाग यह भी देख सकेंगे कि कौन-सा विभाग निर्धारित समय से अधिक आवेदन लंबित रख रहा है। बार-बार लगने वाली आपत्तियों और अस्वीकृति के कारणों का विश्लेषण कर प्रक्रियाओं को और सरल बनाने की दिशा में भी कार्रवाई की जाएगी।
केंद्र सरकार की सिफारिश पर बढ़ाया गया डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम
केंद्र सरकार ने डीरेगुलेशन-2.0 के तहत राज्यों को सिंगल विंडो सिस्टम में एंड-टू-एंड टर्नअराउंड टाइम (TAT) की निगरानी, लंबित आवेदनों का विश्लेषण और अनावश्यक देरी को समाप्त करने की व्यवस्था लागू करने की सिफारिश की थी। उत्तर प्रदेश ने इस दिशा में पहल करते हुए निवेश मित्र 3.0 में इन सभी सुविधाओं को शामिल कर दिया है।
इससे उद्योग स्थापना की पूरी प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और समयबद्ध होने की उम्मीद है।
सिंगापुर के GoBusiness मॉडल से मिली प्रेरणा
प्रदेश सरकार ने इस नई व्यवस्था को विकसित करने में सिंगापुर के GoBusiness मॉडल को आधार बनाया है। इस मॉडल में व्यवसाय पंजीकरण और लाइसेंस से जुड़ी सभी सेवाएं एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई जाती हैं। साथ ही औसत निस्तारण समय सार्वजनिक किया जाता है और उपयोगकर्ताओं की शिकायतों एवं सुझावों के आधार पर प्रक्रियाओं में लगातार सुधार किया जाता है।
इसी तर्ज पर निवेश मित्र 3.0 को केवल ऑनलाइन आवेदन पोर्टल नहीं, बल्कि एक इंटेलिजेंट मॉनिटरिंग सिस्टम के रूप में विकसित किया गया है।
उद्योगों को मिलेगा सीधा फायदा
नई व्यवस्था लागू होने के बाद उद्योगों को मंजूरी मिलने की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और समयबद्ध बनने की संभावना है। शासन स्तर पर नियमित समीक्षा से लंबित मामलों पर तेजी से निर्णय लिए जा सकेंगे। इससे निवेश प्रस्तावों की स्वीकृति में तेजी आएगी और उद्योग कम समय में उत्पादन शुरू कर सकेंगे। सरकार का मानना है कि यह पहल उत्तर प्रदेश को निवेश और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।













