अयोध्या/05 अक्टूबर 2026: अयोध्या रामनगरी अयोध्या में सोमवार को गुरु पर्व महोत्सव का समापन समारोह धार्मिक और शैक्षिक गतिविधियों के साथ आयोजित हुआ। राजनाथ सिंह अयोध्या दौरे के दौरान सबसे पहले रामलला के दरबार पहुंचे और दर्शन-पूजन किया। इसके बाद वह रानोपाली स्थित उदासीन ऋषि संगत आश्रम पहुंचे, जहां उन्होंने गुरु पर्व महोत्सव के समापन समारोह में हिस्सा लिया।
आश्रम परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री ने श्रीनारायण राम संस्कृत विद्यालय के नवनिर्मित भवन का लोकार्पण किया। इस मौके पर संत सम्मेलन और जनसभा भी हुई। रक्षामंत्री के आगमन को देखते हुए पुलिस और प्रशासन की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे।
राजनाथ सिंह अयोध्या में बोले- संस्कृत शिक्षा को व्यापक केंद्र बनाना होगा
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि श्रीनारायण राम संस्कृत महाविद्यालय की संस्कृत शिक्षा की परंपरा को और व्यापक बनाने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ना चाहिए। उनके मुताबिक, नवनिर्मित भवन केवल विद्यार्थियों के रहने की सुविधा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे आगे चलकर संस्कृत शिक्षा के एक बड़े केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है।
उन्होंने संस्कृत विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि संस्कृत पढ़ने का संकल्प लेना अपने आप में सौभाग्य की बात है। देवभाषा संस्कृत में ज्ञान, विज्ञान और अध्यात्म की समृद्ध परंपरा मौजूद है। ऐसे में विद्यार्थियों की जिम्मेदारी केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं है। उन्हें भारतीय धर्म, साहित्य और ज्ञान परंपरा का लगातार अध्ययन करना चाहिए।
राजनाथ सिंह ने विद्यार्थियों को देश का भविष्य बताते हुए कहा कि यही युवा आगे चलकर संस्कृत और भारतीय संस्कृति की परंपरा को आगे बढ़ाने का काम करेंगे।
नया भवन आने वाली पीढ़ियों तक ज्ञान पहुंचाने का माध्यम
रक्षा मंत्री ने नवनिर्मित भवन को आश्रम और संस्कृत शिक्षा की परंपरा के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह सामान्य निर्माण नहीं है। यह आने वाली पीढ़ियों तक भारतीय परंपरा और ज्ञान को पहुंचाने के संकल्प का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि इस भवन का निर्माण संस्कृत शिक्षा को मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। करीब 1.35 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस भवन से आवासीय संस्कृत महाविद्यालय में अध्ययनरत ब्रह्मचारियों को सुविधाएं मिलने की जानकारी सामने आई है।
संस्कृत और आधुनिक शिक्षा के बीच समन्वय पर जोर
राजनाथ सिंह ने संस्कृत को ज्ञान-विज्ञान की समृद्ध परंपरा वाली भाषा बताते हुए कहा कि इसके विस्तार और महत्व को पूरी तरह समझने में काफी समय लगेगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संस्कृत शिक्षा को आधुनिक शिक्षा से जोड़ना समय की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को एक ओर संस्कृत के श्लोक और भारतीय ज्ञान परंपरा समझनी चाहिए, तो दूसरी ओर आधुनिक तकनीक और बदलती दुनिया की जरूरतों से भी परिचित होना चाहिए। आधुनिक शिक्षा और संस्कृत का यह मेल युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ते हुए भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार कर सकता है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि किसी परंपरा को जीवित रखने का सबसे प्रभावी तरीका केवल उसे याद करना नहीं, बल्कि उसके ज्ञान और संस्कारों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना है। अयोध्या में आयोजित यह कार्यक्रम इसी सोच को आगे बढ़ाने का एक अवसर बना।









