लखनऊ, (Sun, 16 Nov 2025): उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ रविवार को एक खास ऐतिहासिक पल की गवाह बनी। वृंदावन आवासीय योजना सेक्टर-19 में वीरांगना ऊदा देवी पासी की भव्य प्रतिमा का अनावरण हुआ, और मंच पर मौजूद नेताओं के बीच एक बात साफ झलक रही थी—इतिहास के अनदेखे पन्नों को आखिर पहचान मिलनी शुरू हो गई है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय मंत्री कमलेश पासवान ने इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया, जो ऊदा देवी के बलिदान दिवस पर आयोजित किया गया था।
राजनाथ सिंह ने यहां अपने भाषण में भारतीय इतिहास के पुराने घावों को छुआ और कहा कि “वर्षों तक वामपंथी इतिहासकारों ने ऐसा नैरेटिव गढ़ा, जिसने दलित-पिछड़े योद्धाओं के संघर्ष को परदे के पीछे धकेल दिया। जिन लोगों ने अपने प्राणों की आहुति दी, उन्हें वह सम्मान कभी नहीं मिला जिसके वे अधिकारी थे।”
उन्होंने इस बात पर भी खुशी जताई कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अब स्कूलों में उन forgotten warriors का इतिहास बच्चों तक पहुँचा रहे हैं—एक तरह से Historical Recognition का वह अध्याय, जो भारतीय समाज में लंबे समय से overdue था।
पासी समाज का इतिहास—’गोरक्षा और मातृभूमि’ की जड़ों से जुड़ा
रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में पासी समाज की वीर परंपरा का विस्तार से उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि पासी समुदाय सदियों से गोरक्षा, मातृभूमि-रक्षा और स्वाभिमान की लड़ाइयों के केंद्र में रहा है। “कई पासी राजाओं ने समाज की सुरक्षा के लिए अपने प्राणों तक का बलिदान दिया, और कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा,” राजनाथ सिंह ने कहा।
उन्होंने महिलाओं की बहादुरी को भी रेखांकित करते हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उदाहरण दिया।
“आज महिलाएं किसी भी बड़े काम में पुरुषों से कम नहीं हैं। ऑपरेशन सिंदूर में उन्होंने यह साबित कर दिया,” उन्होंने कहा।
इसी क्रम में उन्होंने बताया कि योगी सरकार ने बहराइच में महाराजा सुहेलदेव का स्मारक बनवाया है और अब लखनऊ में महाराजा बिजली पासी की स्मृति को संजोने के लिए भी व्यापक कार्य जारी है।
“अन्याय बड़ा हो तो प्रतिकार उससे भी बड़ा होना चाहिए”—CM योगी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शब्दों में भावनाओं की एक अलग ही गूंज थी।
उन्होंने कहा कि ऊदा देवी पासी सिर्फ नारी-शक्ति का प्रतीक नहीं, बल्कि हर भारतीय के हृदय में प्रेरणा का उजाला हैं।
“1857 की लड़ाई में जब फिरंगियों को धूल चटाने का समय आया, ऊदा देवी ने दिखा दिया कि साहस किसी जाति या लिंग का मोहताज नहीं होता। उन्होंने बताया कि जब अन्याय बड़ा होता है, तो उसका प्रतिकार उससे भी बड़ा होना चाहिए।”
सीएम ने यह भी बताया कि:
- बिजली पासी किले पर लाइट एंड साउंड शो की स्वीकृति दी गई है, ताकि समाज के नायकों की गाथा लोग समझ सकें और महसूस कर सकें।
- तीन PAC बटालियनों की भर्ती में 20% सीटों पर महिलाओं का चयन किया गया है।
- आश्रम पद्धति के विद्यालयों में दलित और पिछड़े वर्ग के बच्चों को मुफ्त शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है।
योगी आदित्यनाथ ने स्वतंत्रता आंदोलन की व्यापक पृष्ठभूमि को याद करते हुए 1857 के संग्राम में मंगल पांडेय, धन सिंह कोतवाल, रानी लक्ष्मीबाई, तात्या टोपे और बेगम हजरतमहल जैसे योद्धाओं का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि लखनऊ की धरती ने “अमर बलिदानों की धारा” बहाई है और ऊदा देवी उसका शिखर हैं।
दलित समाज के गौरव का क्षण
केंद्रीय मंत्री कमलेश पासवान ने कहा कि ऊदा देवी की प्रतिमा का अनावरण केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि दलित समाज के गौरव और गर्व को सार्वजनिक मान्यता देने का ऐतिहासिक अवसर है।
कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, महापौर सुषमा खर्कवाल, सांसद अशोक रावत, विधायक राजेश्वर सिंह, पूर्व मंत्री कौशल किशोर और कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
निष्कर्ष: इतिहास के गुमनाम पन्नों की ‘Historical Recognition’ शुरू
कार्यक्रम की समाप्ति के बाद भी एक बात लोगों के मन में गूंज रही थी—क्या इतिहास के वे पन्ने जो दशकों तक दबे रहे, अब सामने आएंगे?
योगी सरकार द्वारा दलित-पिछड़े नायकों को जो नई पहचान मिल रही है, वह एक व्यापक सामाजिक बदलाव की ओर इशारा करती है।
Historical Recognition का यह सफ़र शायद देर से शुरू हुआ, लेकिन सही दिशा में बढ़ता दिख रहा है।












