वडोदरा, गुजरात/23 सितंबर 2026: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को छात्रों से कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल व्यक्तिगत सफलता हासिल करना नहीं, बल्कि उसका उपयोग समाज और देश के व्यापक हित में करना भी है। उन्होंने युवाओं से अपने-अपने कार्यक्षेत्र में राष्ट्र और समाज के हितों को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। राष्ट्रपति महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय, बड़ौदा के 75वें वार्षिक दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रही थीं। राष्ट्रपति का गुजरात दौरा 21 से 23 सितंबर तक निर्धारित था और 23 सितंबर को उनके वडोदरा पहुंचने का आधिकारिक कार्यक्रम था।
राष्ट्रपति मुर्मू ने छात्रों से क्या कहा?
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि विद्यार्थियों को अपनी शिक्षा का इस्तेमाल केवल अपने या अपने परिवार के हित तक सीमित नहीं रखना चाहिए। उन्हें यह भी सोचना चाहिए कि उनकी प्रतिभा, ज्ञान और पेशेवर क्षमता समाज के बड़े वर्ग के लिए किस तरह उपयोगी हो सकती है।
उन्होंने कहा कि यदि छात्र अपने काम के क्षेत्र में देश और समाज के हितों को सबसे ऊपर रखेंगे, तो इससे केवल राष्ट्र और समाज को ही लाभ नहीं होगा, बल्कि स्वयं उनका जीवन भी आगे बढ़ेगा। ऐसी प्रगति व्यक्ति को अपने काम की सार्थकता का अनुभव कराती है और भीतर से संतुष्टि देती है।
राष्ट्रपति ने अलग-अलग पेशों का उदाहरण देते हुए छात्रों को समझाया कि शिक्षा और पेशे को केवल आजीविका का माध्यम मानना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि इंजीनियर ऐसी तकनीक विकसित करने का प्रयास करें, जिससे लोगों का जीवन आसान और बेहतर हो। डॉक्टर चिकित्सा को केवल पेशे के रूप में न देखें, बल्कि इसे मानव सेवा से जोड़ें।
‘सेवा में ही मानवता और शांति निहित है’
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए संसाधनों की जरूरत होती है, लेकिन धन ही सब कुछ नहीं है। उनके मुताबिक, दूसरों की मदद और सेवा से मिलने वाली संतुष्टि का अपना अलग महत्व है। सेवा को उन्होंने मानवता और शांति से जोड़ते हुए कहा कि समाज के लिए किया गया काम व्यक्ति को अपने जीवन और शिक्षा की सार्थकता का एहसास कराता है।
उनका संदेश दीक्षांत समारोह में मौजूद विद्यार्थियों के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण रहा। डिग्री हासिल करने के बाद युवा जब अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत करते हैं, तब उनके सामने व्यक्तिगत करियर और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाने की चुनौती भी रहती है। राष्ट्रपति ने इसी व्यापक जिम्मेदारी की ओर छात्रों का ध्यान खींचा।
वैज्ञानिकों, कलाकारों और लेखकों से भी की अपील
राष्ट्रपति ने केवल इंजीनियरों और डॉक्टरों तक अपनी बात सीमित नहीं रखी। उन्होंने वैज्ञानिकों से मानवता के सामने मौजूद समस्याओं के समाधान के लिए काम करने की अपील की। वहीं कलाकारों और लेखकों से अपनी कला और रचनाओं के जरिए समाज की संवेदनशीलता को समृद्ध करने की बात कही।
इस तरह राष्ट्रपति का संदेश अलग-अलग पेशों से जुड़े युवाओं के लिए एक साझा सूत्र पर केंद्रित रहा—ज्ञान और प्रतिभा का इस्तेमाल व्यापक सामाजिक हित के लिए किया जाए।
महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय, बड़ौदा के 75वें दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति की मौजूदगी उनके गुजरात दौरे के आधिकारिक कार्यक्रम का हिस्सा थी। राष्ट्रपति भवन ने भी 23 सितंबर को वडोदरा में विश्वविद्यालय के 75वें वार्षिक दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति की भागीदारी की पुष्टि की थी।











